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Home Prabhat Khabar Special सादगी और इंसानी भावनाओं के दम पर पंचायत वेबसीरीज ने लोगों के दिल में बनाई जगह

सादगी और इंसानी भावनाओं के दम पर पंचायत वेबसीरीज ने लोगों के दिल में बनाई जगह

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सादगी और इंसानी भावनाओं के दम पर पंचायत वेबसीरीज ने लोगों के दिल में बनाई जगह
पंचायत वेबसीरीज

Panchayat Season 4 : पंचायत वेबसीरीज एक बार फिर लोगों के सामने है. जिस बेसब्री से लोग इस वेबसीरीज का इंतजार कर रहे थे, उससे यह महसूस हो रहा है कि वेबसीरीज एक बार फिर धमाल मचाएगी. वेबसीरीज में दौर में पंचायत ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है. एक ओर जहां वेबसीरीज में एडल्ट कंटेंट, हिंसा और गाली-गलौच की भरमार होती है, वहीं पंचायत बहुत ही साफ-सुथरी और दिल को छू लेने वाले अंदाज में दर्शकों को सामने आती है. यह वेबसीरीज अपनी ओरिजनलिटी के लिए खासी पहचानी जाती है. आखिर पंचायत वेबसीरीज में ऐसा क्या है कि लोग इसके चौथे सीजन का भी उतनी ही बेसब्री से इंतजार कर रहे थे?

आम आदमी से जुड़े कैरेक्टर और घटनाएं

पंचायत वेबसीरीज का हिट होना और लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बनना इस बात को पुख्ता करता है कि इंसान अभी भी इंसान ही है और उसके अंदर इंसानी भावनाएं सबसे प्रमुख हैं. जैसे कि हंसना, रोना, गाना, प्रेम करना और तमाम इंसानी भावनाओं से ही वो जुड़कर रहना चाहता है. उसे कल्पना की दुनिया पसंद होगी, लेकिन वह मौलिकता में पक्का यकीन करता है. पंचायत वेबसीरीज के कैरेक्टर कुछ इसी तरह के हैं. सचिव जी का गांव आना और नौकरी करना, उनके सपने यह सबकुछ किसी भी युवा को आकर्षित करता है, क्योंकि ऐसे कई लड़के हमारे आसपास हैं, जो अपने सपने से तो जुड़े हैं, लेकिन उन्हें वास्तविक जीवन में कुछ और नौकरी करनी पड़ रही है. सचिव जी, प्रधान, प्रधानपति वनराकस, प्रह्लाद चा सारे कैरेक्टर असली जीवन के पात्र जैसे हैं, जिससे कोई कनेक्ट हो जाता है. सचिव जी और रिंकी की प्रेम कहानी लोगों को गुदगुदा देती है, क्योंकि अधिकतर लोगों के जीवन में इस तरह का प्रेम पनप चुका होता है.

स्क्रिप्ट और डायलॉग बेहतरीन

पंचायत वेबसीरीज की सफलता में उसके स्क्रिप्ट और डायलॉग का बहुत अहम रोल रहा है. इसके स्क्रिप्ट हमें किसी दूसरी दुनिया में लेकर नहीं जाते हैं, बल्कि ये हमारे आसपास ही रहते हैं. इसकी वजह से होता ये है कि जब लोग इस वेबसीरीज को देखते हैं तो उन्हें लगता है कि जैसे ये तो बस अभी-अभी कहीं घट रहा था, जिसे उन्होंने खुद देखा है और बस यहीं से शुरुआत होती है अपनेपन की. डायलॉग भी आम बोलचाल की भाषा में हैं, जो याद रह जाते हैं. जैसे -‘गांव में थोड़ा adjust करना पड़ता है’,दिक्कत ये है कि तुम efforts कम डाल रहे हो और expectations ज़्यादा रख रहे हो, System कुछ नहीं होता है, System में बैठे लोग सब कुछ होते हैं. ये कुछ डायलॉग हैं, जो बताते हैं कि यह वेबसीरीज कितनी यूनिक है और कैसे आमलोगों की जुबान पर यह चढ़ जाते हैं.

पंचायत वेबसीरीज बहुत कुछ साबित करती है

Panchayat Season 4
पंचायत वेबसीरीज

पंचायत वेबसीरीज यह साबित करती है कि अच्छी चीजों की डिमांड कभी कम नहीं होती है. अगर दर्शकों को अच्छी चीज मिलेगी तो वे उसे जरूर देखेंगे. यह जरूरी नहीं है कि उसमें सस्पेंस और ड्रामा हो ही और सेक्स का तड़का भी लगा हो. पंचायत वेबसीरीज अपनी ओरिजिनल स्टोरी और डायलॉग की वजह से अलग पहचान बनाती है और सबका मन मोह लेती है. इस वेबसीरीज की खासियत यह है कि यह इंसानी भावनाओं को एक तरह से जगाती है और उनके जरिए लोगों का मनोरंजन करती है.

पंचायत की सादगी लोगों को लुभाती है : अजय ब्रह्मात्ज

पंचायत की सादगी लोगों को लुभा रही है और इसी के बल पर पंचायत सीरीज चल रही है. यह कहना है वरिष्ठ फिल्म समीक्षक अजय ब्रह्मात्ज का. वे कहते हैं कि पंचायत वेबसीरीज के दर्शक वो लोग हैं, जिन्होंने गांव का जीवन जिया नहीं है. उनके सामने जब इस तरह की चीज आई है, जिसमें सादगी ज्यादा है और मनोरंजक भी है, तो लोग इसे पसंद कर रहे हैं. जिन लोगों की कहानी इस वेबसीरीज में बुनी गई है, वे लोग इसके दर्शक नहीं है. सोशल मीडिया में भी जिस तरह के कमेंट आ रहे हैं, वे इस बात को साबित करते हैं. हमारे देश में एक नास्टेल्जिया है कि गांव के लोग बहुत सरल और सहज होते हैं, इस वेबसीरीज में इसी तरह की बातों को परोसा गया है, जिसकी वजह से यह वेबसीरीज चल रही है. हालांकि अब सादगी भी हिट होने का फार्मूला भर रही गई है और कई अन्य वेबसीरीज भी इस तरह की आ गई है. चूंकि दर्शक हमेशा कुछ नया देखना चाहता है इसलिए भी उसे पंचायत पसंद आई है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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