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Home Prabhat Khabar Special पाकिस्तान की हरकतों से परेशान IMF ने लोन के लिए क्यों लगाई ये शर्तें? जानिए,भारत–पाक तनाव का इससे क्या है संबंध

पाकिस्तान की हरकतों से परेशान IMF ने लोन के लिए क्यों लगाई ये शर्तें? जानिए,भारत–पाक तनाव का इससे क्या है संबंध

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पाकिस्तान की हरकतों से परेशान IMF ने लोन के लिए क्यों लगाई ये शर्तें? जानिए,भारत–पाक तनाव का इससे क्या है संबंध
शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री

Pakistan And IMF : कंगाल हो चुके पाकिस्तान को अब एक और मार पड़ी है. सरकारी खजाना खाली होने के बाद से वह आईएमएफ ( International Monetary Fund, IMF) के दरवाजे पर उधार के लिए दस्तक देता रहता है, लेकिन अब आईएमएफ ने भी उसके सामने नई शर्तें रख दी है. आईएमएफ ने कहा है कि अगर उसे अपना लोन जारी रखना है तो उसे संस्था की 11 नई शर्तों को मानना होगा.

IMF ने पाकिस्तान पर नई शर्त क्यों लगाई?

आईएमएफ ने अबतक पाकिस्तान को लोन देने से मना नहीं किया है, लेकिन आईएमएफ जब लोन देता है, तो वह यह भी देखता है कि उसके लोन की वापसी सुनिश्चत हो. आईएमएफ यह समझता है कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है, जहां समस्या सिर्फ पैसे की नहीं है. पाकिस्तान में गुड गवर्नेंस की कमी है और भ्रष्टाचार बहुत ज्यादा है, जिसकी वजह से लोन की समय पर वापसी में दिक्कत हो सकती है. इसी वजह से आईएमएफ ने 11 नई शर्तें लगाई हैं, ताकि पाकिस्तान में सुधार हो और लोन की वापसी हो सके. IMF ने पाकिस्तान के लिए लोन लेने के लिए जो 11 नए स्ट्रक्चरल बेंचमार्क लगाए हैं, उनमें से टैक्स रिफॉर्म, सरकारी अधिकारियों के एसेट डिक्लेरेशन और एनर्जी सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी से जुड़ी तीन शर्तें दिसंबर के अंत तक पूरी करनी होंगी. पाकिस्तान आईएमएफ से मिले लोन का इस्तेमाल भारत के खिलाफ करता है, यह बात जगजाहिर है. इस वजह से भी संस्था ने शर्तें लगाई हैं, ताकि पाकिस्तान पर लगाम कसी जा सके.

क्या है IMF की शर्तें?

आईएमएफ ने अपनी रिपोर्ट में यह साफ कहा है कि पाकिस्तान की सरकार में करप्शन कूट–कूट कर भरा है. इसे रोकने के लिए कोई मजबूत कार्रवाई सरकार की ओर से होती नहीं है. न्यायपालिका पर भी सवाल किए जाते हैं. इन हालतों में पाकिस्तान को अगर लोन चाहिए तो उसे कुछ शर्तों का पालन करना होगा. प्रमुख शर्तें इस प्रकार हैं–

  • –टैक्स रिफॉर्म, अब अमीरों को भी टैक्स देना होगा
  • –सरकारी अधिकारियों को एसेट डिक्लेरेशन सरकारी वेबसाइट पर देना होगा.
  • – एनर्जी सेक्टर में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी, ताकि घाटे को कम किया जाए
  • –फिस्कल रोडमैप (सरकारी खर्च कैसे घटेगा)
  • –रेमिटेंस (विदेश से आने वाला पैसा) बढ़ाने की रणनीति
  • –क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम सुधार
  • –शुगर मार्केट को लिबरलाइज करना
  • –केंद्रीय और राज्य सरकारों में बेहतर समन्वय

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क्या IMF के पैसे के बिना नहीं बचेगा पाकिस्तान ?

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी समय से संकट में है. वहां टैक्स देने वाले लोग बहुत कम हैं और खर्च बहुत ज्यादा है. सरकार का खर्च भी बहुत ज्यादा है, जिसे चलाने के लिए पाकिस्तान विदेश से कर्ज लेता है. वह जरूरत की सारी चीजें आयात करता है, निर्यात बहुत कम है. इस परिस्थिति में अगर उसे आईएमएफ से पैसे ना मिले तो उसके लिए खुद को बचाकर रखना मुश्किल हो जाएगा. बावजूद इसके पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों में शामिल रहता है और भारत के खिलाफ षडयंत्र करता है. यहां तक कि वह आईएमएफ से कर्ज तो लेता है अपने विकास और जरूरतों के नाम पर ,लेकिन उनका उपयोग भी वह भारत के खिलाफ करता है. इसी वजह से भारत की चिंता तब बढ़ जाती है, जब आईएमएफ पाकिस्तान को लोन देता है. अब चूंकि आईएमएफ ने पाकिस्तान पर इतनी शर्तें लागू की हैं, तो शायद पाकिस्तान अपने रवैये में सुधार करे.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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