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Home Prabhat Khabar Special पाकिस्तान के अंदर 300 किलोमीटर की दूरी पर विमान को मार गिराना भारत की बड़ी सामरिक उपलब्धि

पाकिस्तान के अंदर 300 किलोमीटर की दूरी पर विमान को मार गिराना भारत की बड़ी सामरिक उपलब्धि

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पाकिस्तान के अंदर 300 किलोमीटर की दूरी पर विमान को मार गिराना भारत की बड़ी सामरिक उपलब्धि
ऑपरेशन सिंदूर

Operation Sindoor : वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह ने शनिवार को बेंगलुरु में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने एक ऐसा काम किया, जो रिकाॅर्ड है. अमरप्रीत सिंह ने बताया कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के 5 फाइटर जेट के साथ एक बड़े विमान को भी मार गिराया. उन्होंने बताया कि बड़े विमान को लगभग 300 किमी की दूरी से मार गिराया गया. यह विमान संभवतः ELINT या AEW&C था, यह भारत की बड़ी उपलब्धि है क्योंकि 300 किलोमीटर की दूरी से अबतक सतह-से-आकाश तक किसी ने इस तरह का हमला नहीं किया था.

S-400 के जरिए भारत ने इस हमले को सफल बनाया

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि 300 किलीमीटर की दूरी से अपने लक्ष्य को साधना कठिन काम होता है और यह भी पुष्टि के साथ बता पाना मुश्किल होता है कि लक्ष्य सधा या नहीं. लेकिन भारत ने यह सबकुछ किया और यह संभव हो पाया एस-400 की मदद से. उन्होंने बताया कि रूसी मूल का एयर डिफेंस सिस्टम एस-400 ऑपरेशन सिंदूर में गेमचेंजर साबित हुआ. इस डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन के ग्लाइड बॉम्ब जैसे लंबी दूरी से हथियारों को काम ही करने नहीं दिया. एस-400 की मारक क्षमता 400 किलोमीटर की रेंज तक है, जिसकी वजह से इसने पाकिस्तान के बड़े विमान को मार गिराया.

रडार के जरिए हुई बड़े विमान को मार गिराने की पुष्टि

वायुसेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर की जानकारी देते हुए यह भी बताया कि हमने 300 किलोमीटर की दूरी पर जिस बड़े विमान को मार गिराया, उसकी पुष्टि मुश्किल हो सकती थी क्योंकि हमने काफी दूर से लक्ष्य को साधा था. लेकिन हमारे पास इसके पुख्ता सबूत हैं क्योंकि इसकी पुष्टि इलेक्ट्रॉनिक सत्यापन से हुई है. रडार ब्लिप ने यह स्पष्ट कर दिया कि इंटरसेप्शन हुआ है.

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भारत की बड़ी सामरिक उपलब्धि

भारत ने जिस प्रकार पाकिस्तान के अंदर 300 किलोमीटर दूर स्थित एक विमान को मार गिराया वह भारत की बड़ी सामरिक उपलब्धि है. इससे यह साबित होता है कि भारत स्टैंड-ऑफ अटैक क्षमता रखता है, जिसका अर्थ है कि भारत लंबी दूरी के लक्ष्यों को भी साध सकता है. इसका फायदा यह होगा कि भारतीय सेना अपनी सीमा में रहकर भी पाकिस्तान के अंदर बैठे अपने दुश्मनों को साध सकती है. यह भारत के उन्नत रडार सिस्टम का भी परिचय देता है. भारत की इस उच्च क्वालिटी की मारक क्षमता की वजह से उसकी धाक पड़ोसी देशों पर भी बनेगी और दुश्मन भारत के खिलाफ षडयंत्र करने से पहले विचार करेगा. साथ ही भविष्य में कोई भी पड़ोसी देश भारत पर हमला करने से पहले उसकी मारक क्षमता के बारे में सोचेगा, खासकर पाकिस्तान.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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