[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Prabhat Khabar Special Integration of 565 Princely States 2 : हैदराबाद के निजाम के शागिर्द ने पटेल से कहा था सरदार होंगे आप दिल्ली के… ऐसे टूटा घमंड

Integration of 565 Princely States 2 : हैदराबाद के निजाम के शागिर्द ने पटेल से कहा था सरदार होंगे आप दिल्ली के… ऐसे टूटा घमंड

0
Integration of 565 Princely States 2 : हैदराबाद के निजाम के शागिर्द ने पटेल से कहा था सरदार होंगे आप दिल्ली के… ऐसे टूटा घमंड
Operation Polo military operation

Operation Polo Annexation of Hyderabad : आजाद भारत में 565 स्वतंत्र रियासतों को शामिल करना भारत सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी. प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इसके लिए अलग से रियासत विभाग बनाया था, जिसके मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल थे. मंत्रालय में उनके सचिव वीपी मेनन थे. उन्होंने अपनी किताब THE STORY OF THE INTEGRATION OF THE INDIAN STATES में हैदराबाद के भारत में विलय की पूरी कहानी लिखी है. उन्होंने अपनी किताब में तीन चैप्टर में यह बताया है कि हैदराबाद की रियासत का इतिहास क्या था और किस तरह हैदराबाद के निजाम ने भारत के सामने हेकड़ी दिखाई और अंतत: हथियार डाल दिए.

मीर कमरुद्दीन चिन ने की थी हैदराबाद राज्य की स्थापना

वीपी मेनन ने अपनी किताब में जिक्र किया है कि हैदराबाद राज्य की स्थापना मीर कमरुद्दीन चिन किलिच खान ने की थी. वह औरंगजेब के सेनापति गाजी-उद-दीन खान फिरोज जौग का पुत्र था. जिसके वंश का संबंध मुसलमानों के पहले खलीफा अबू बकर से था. 1713 में औरंगजेब की मृत्यु के छह साल बाद  मुगल शासक फर्रुखसियर ने मीर कमरुद्दीन को निजाम-उल-मुल्क फिरोज जंग की उपाधि के साथ दक्कन का वायसराय बनाया.  बाद में मुगल शासक मुहम्मद शाह ने उन्हें आसफ जाह की उपाधि प्रदान की और इसी उपाधि से निजामों का वंश जाना गया.  

कहां स्थित था हैदराबाद रियासत

Copy Of Add A Heading 2024 12 04T201245.310
Integration of 565 princely states 2 : हैदराबाद के निजाम के शागिर्द ने पटेल से कहा था सरदार होंगे आप दिल्ली के... ऐसे टूटा घमंड 5

1947 का हैदराबाद आज के आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों तक फैला था. इस रियासत की तीन चौथाई आबादी हिंदुओं की थी और मुसलमानों की एक चौथाई . लेकिन रियासत में इसी एक चौथाई आबादी की तूती बोलती थी और तमाम सरकारी पदों पर वे काबिज थे. हैदराबाद रियासत 82 हजार वर्गमील तक फैला था और यहां के शासक निजाम को सबसे अमीर रियासत का मालिक माना जाता था. निजाम के पास दौलत की कोई कमी नहीं थी.

लैप्स ऑफ पैरामाउंसी ने बढ़ाई हैदराबाद के निजाम की हिम्मत

 4 जून 1947 को  लॉर्ड माउंटबेटन ने भारत की आजादी की तारीख घोषित की और यह बताया कि भारत में जो 565 रियासते हैं, उन्हें भी आजाद किया जा रहा है. माउंटबेटन ने उस संधि के खत्म होने की घोषणा की जिसके तहत ये रियासतें अंग्रेजों के अधीन थीं. लैप्स ऑफ पैरामाउंसी  के तहत माउंटबेटन ने इन देसी रियासतों को दो विकल्प दिया . पहला वे या तो भारत के साथ जाएं या पाकिस्तान के और दूसरा वे स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भी रह सकते हैं. इस विकल्प के मिलने के बाद हैदराबाद के निजाम ने अपना अलग रंग दिखाना शुरू किया और यह कहा कि वे भारत में किसी भी कीमत पर शामिल नहीं होंगे. हैदराबाद के निजाम ने खुले तौर पर भारत सरकार को चेतावनी दे दी थी. 

भारत ने Standstill Agreement एग्रीमेंट पेश किया

Copy Of Add A Heading 2024 12 04T202018.465
Integration of 565 princely states 2 : हैदराबाद के निजाम के शागिर्द ने पटेल से कहा था सरदार होंगे आप दिल्ली के... ऐसे टूटा घमंड 6

भारत के बीचोंबीच एक स्वतंत्र मुल्क किसी भी तरह भारत सरकार को गंवारा नहीं था. लेकिन हैदराबाद के निजाम इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार नहीं था, जिसके जरिए इन रियासतों का भारत में विलय होता. पंडित जोर जबरदस्ती नहीं करना चाह रहे थे क्योंकि हैदराबाद पाकिस्तान की ओर भी जा सकता था. तब पंडित नेहरू ने स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट का प्रस्ताव रखा, जिसके तहत यह व्यवस्था थी कि आजादी के एक साल तक हैदराबाद और भारत के बीच वही स्थिति रहेगी जो आजादी के समय थी. लेकिन इस प्रस्ताव को भी हैदराबाद ने नहीं स्वीकार किया. उलटे उसने दो अध्यादेश पास किया जिसके जरिए भारतीय मुद्रा पर प्रतिबंध लगा दिया गया और सभी कीमती धातुओं के हैदराबाद से भारत निर्यात को रोक दिया गया.

Also Read : Integration of 565 Princely States : कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को एक करने की राह में बाधा था माउंटबेटन प्लान

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

Assisted Dying Bill : अब मांगने से मिलेगी मौत, सांसदों ने उठाया ऐतिहासिक कदम

कासिम रिजवी सरदार पटेल को धमकाने दिल्ली आया

निजाम का खासमखास कासिम रिजवी सरदार पटेल से मिलने दिल्ली आया था. सरदार पटेल ने उनसे शांतिपूर्ण तरीके से बात की और मसले का समाधान निकालने की कोशिश की. लेकिन कासिम रिजवी ने एक तरह से सरदार पटेल को धमकाते हुए कहा था कि पटेल साहब आप सरदार होंगे दिल्ली के, हैदरबाद में आसफ जाह का झंडा बुलंद है और वही रहेगा.  कासिम रिजवी ने सरदार पटेल से कहा था हमारे पास यह विकल्प ही नहीं है कि हम भारत के साथ जाएं और हमारा स्वतंत्र अस्तित्व समाप्त हो. उसने सरदार पटेल को यह धमकी भी दी थी कि अगर भारत सरकार का यही रुख रखा तो हैदराबाद में हिंदुओं को परेशानी हो सकती है. इसपर पटेल साहब ने उनसे कहा था कि अगर आप आत्महत्या ही करना चाहते हैं, तो क्या किया जा सकता है. कासिम रिजवी आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति था और वह एक रजाकार थे, जिसने अपना एक ट्रेनिंग कैंप चला रखा था, जहां से ट्रेनिंग पाकर रजाकर हैदराबाद में हिंदुओं पर अत्याचार करते थे.

सैन्य कार्रवाई के विरोधी थे माउंटबेटन

Copy Of Add A Heading 2024 12 04T202451.298
Integration of 565 princely states 2 : हैदराबाद के निजाम के शागिर्द ने पटेल से कहा था सरदार होंगे आप दिल्ली के... ऐसे टूटा घमंड 7

लॉर्ड माउंटबेटन हैदराबाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विरोधी थे. वहीं नेहरू कैबिनेट में भी कुछ लोग यह मानते थे कि हैदराबाद के खिलाफ सैनिक कार्रवाई ना हो. इससे सांप्रदायिक दंगा फैलने का डर था. 22 अप्रैल 1948 को अंतत: भारत सरकार ने एक ऐसा प्लान तैयार किया, जो किसी अन्य रियासत के लिए नहीं किया गया था. इस समझौते में हैदराबाद के स्पेशल स्टेट्‌स को स्वीकार कर लिया गया. उसे 20 हजार तक सैनिक रखने की छूट दी गई और अपना कानून बनाने की आजादी भी दी गई. लेकिन हैदराबाद के निजाम ने इस समझौते को भी ठुकरा दिया और यह कहा कि वे अपना स्वतंत्र अस्तित्व कायम रखेंगे. निजाम ने पाकिस्तान के साथ व्यापार शुरू कर दिया और उसे लोन भी दिया. इससे भारत सरकार नाराज हो गई और उनके पास सैन्य कार्रवाई के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा.

सैन्य कार्रवाई से पहले सरदार पटेल ने निजाम को लिखा पत्र

अंतिम प्रयास के रूप में सरदार पटेल ने 10 सितंबर 1948 को  निजाम को पत्र लिखा, ताकि बात संभल जाए और सैन्य कार्रवाई की जरूरत ना पड़े. लेकिन निजाम ने अपनी जिद नहीं छोड़ी और बाध्य होकर भारत को हैदराबाद के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी.

13 सितंबर 1948 से शुरू हुआ ऑपरेशन पोलो 

कोई विकल्प नहीं बचने के बाद भारतीय सेना ने ऑपरेशन पोलो शुरू कर दिया. दोनों तरह की सेनाएं आमने–सामने थीं. चार तरफ से भारतीय सेना ने हैदराबाद में प्रवेश किया और युद्ध चला. पांच दिनों के युद्ध के बाद हैदराबाद की हालत खराब हुई. तब 17 सितंबर को निजाम ने रेडियो पर आकर अपनी हार स्वीकार की. उन्होंने इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर भी साइन करने की बात कही. इस तरह हैदराबाद रियासत भारत का हिस्सा बन गया.

Also Read : दक्षिण कोरिया में मार्शल लॉ के कुछ घंटे बाद राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग, पढ़ें,पूरी कहानी

हैदराबाद रियासत को भारत में शामिल करने के लिए ऑपरेशन पोलो कब चलाया गया था?

ऑपरेशन पोलो 13 सितंबर 1948 को शुरू हुआ था और 17 सितंबर को निजाम ने हथियार डाल दिए थे.

लैप्स ऑफ पैरामाउंसी किसे कहते हैं?

लैप्स ऑफ पैरामाउंसी का विकल्प अंग्रेजों ने देसी रियासतों को दिया था, जिसमें यह व्यवस्था थी कि आजादी के बाद वे भारत या पाकिस्तान के साथ जा सकते हैं या फिर स्वतंत्र भी रह सकते हैं.

Previous article नगर पुलिस ने लाखों रुपये की ठगी मामले में लॉज मालिक से की पूछताछ
Next article विद्यार्थियों को दी गयी कानून की जानकारी
Avatar Of Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel