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Microgreens: अंकुरित अनाज से ज्यादा पौष्टिक हैं माइक्रोग्रींस

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Microgreens: अंकुरित अनाज से ज्यादा पौष्टिक हैं माइक्रोग्रींस

Microgreens: माइक्रोग्रींस वो पौधे हैं जो किसी भी बीज के बोने के बाद 7 से 14 दिन बाद छोटी पत्तियों के रूप में उगते हैं. जिस तरह चना, दाल आदि को दो से तीन दिन में अंकुरित करके खाया जाता है. उसी तरह अंकुरित अनाज को 7 से 14 दिन तक विशेष परिस्थितियों में रखकर उसमें पत्तियां आने का इंतजार किया जाता है. जब अनाज में शुरुआती दो पत्तियां आ जाती हैं तो उसे काटकर खाया जाता है. तने के साथ दो से तीन इंच के ये पौधे माइक्रोग्रींस कहलाते हैं. सरल शब्दों में स्प्राउट्स या अंकुरित अनाज के बाद छोटी पत्तियां निकलने की स्थिति माइक्रोग्रींस कहलाती है.

सुपर फूड है माइक्रोग्रींस

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ फूड एंड न्यूट्रीशन के अनुसार माइक्रोग्रींस में अंकुरित अनाज से अधिक फाइबर व पौष्टिक तत्व होते हैं. माइक्रोग्रीन में शुरूआती पत्तियों के साथ उसका तना भी शामिल रहता है. इसमें विटामिन, एंटी ऑक्सीडेंट, मिनिरल्स जैसे कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, जिंक आदि कई गुना अधिक मात्रा में होते हैं. कई अन्य एंजाइम्स होने के कारण ये अंकुरित अनाज के मुकाबले जल्दी पच जाते हैं. एक बार में 50 से 100 ग्राम तक इसे खाया जा सकता है. इसे घर में उगाना आसान है. प्लास्टिक ट्रे, एग ट्रे या अन्य किसी ट्रे की तरह के आकार के बर्तन में उगाया जा सकता है. कम्पोस्ट मिट्टी में इसे उगाया जाता है. लेकिन इसकी अच्छी फसल के लिए धूप जरूरी है. जबकि अनाज को अंकुरित बिना धूप के ही किया जा सकता है.

कैसे उगाएं माइक्रोग्रींस

मटर, सूरजमुखी, गोभी, मूली, ब्रोकली, लाल गोभी, लाल मसूर, सरसों आदि के माइक्रोग्रींस को उगाकर उनको खाया जा सकता है. ये माइक्रोग्रींस सलाद, बर्गर, सैंडविच आदि में टॉपिंग करके भी खाए जा सकते हैं. इससे खाने की वस्तुएं देखने में अच्छी भी लगती हैं. इसे फ्रिज में रखकर दो से तीन दिन तक खाया जा सकता है.

जेब के लिए भी सेहतमंद

माइक्रोग्रींस जेब के लिए भी सेहतमंद है. बड़े स्थान व देखभाल में लगने वाले समय से बचने के लिए लोग माइक्रोग्रीन को खरीदकर भी खाते हैं. इसलिए इसे किसी बड़े स्थान पर लगाकर बिजनेस भी किया जा सकता है. माइक्रोग्रींस को उगाने के लिए 3 से 4 इंच गहरे ट्रे या कंटेनर का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें कम्पोस्ट मिट्टी की परत बिछाकर सब्जियों के बीच डाले जाते हैं. इसके बाद मिट्टी की एक नई परत भी ऊपर से डाली जाती है. मिट्टी को नम रखने के लिए उसमें हल्की सिंचाई की जरूरत पड़ती है. दो से तीन दिन में बीज अंकुरित हो जाते हैं तो इन्हें धूप में रखा जाता है. इनकी पानी से दो से तीन बार सिंचाई करना भी जरूरी होता है. सही देखभाल के बाद 7 से 14 दिन में तीन से चार इंच के छोटी हरी पत्तियों के साथ माइक्रोग्रीन तैयार हो जाते हैं. फिर इसे सुविधानुसार पैक करके बेचा जा सकता है.

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