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Home Prabhat Khabar Special LK Advani : हिंदुत्व का झंडा बुलंद करने वाले नेता, जिन्होंने सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली थी राम रथयात्रा

LK Advani : हिंदुत्व का झंडा बुलंद करने वाले नेता, जिन्होंने सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली थी राम रथयात्रा

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LK Advani : हिंदुत्व का झंडा बुलंद करने वाले नेता, जिन्होंने सोमनाथ से अयोध्या तक निकाली थी राम रथयात्रा
लाल कृष्ण आडवाणी ने राम रथयात्रा की शुरुआत 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से की थी. रथ पर उनके साथ नरेंद्र मोदी

LK Advani Birthday : लाल कृष्ण आडवाणी बीजेपी के एक ऐसे नेता हैं, जिन्होंने पार्टी को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 1984 के चुनाव में बीजेपी को महज दो सीटें हासिल हुईं थीं, लेकिन उन्होंने हिंदुत्व का झंडा बुलंद करते हुए ना सिर्फ बीजेपी को राष्ट्रीय पार्टी बनाया, बल्कि 1989 के चुनाव में 89 और 1991 के चुनाव में बीजेपी को 120 सीट के साथ प्रमुख विपक्षी पार्टी बनाया और फिर अगले चुनाव में यानी 1996 में पहली बार देश में कोई गैर कांग्रेसी सरकार बनी थी.

हिंदुत्व के नाम पर हिंदू वोटर्स को एक सूत्र में बांधा

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राम रथयात्रा सोमनाथ में

1986 में अदालत के फैसले के बाद राजीव गांधी ने अयोध्या के राम मंदिर का ताला तो खुलवा दिया, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर बनवाने के मुद्दे को बीजेपी ने इस तरह अपना बनाया कि कांग्रेस इसका श्रेय नहीं ले सकी और ताला खुलने के बाद मुसलमान कांग्रेस से नाराज भी हो गए. वहीं लालकृष्ण आडवाणी ने अयोध्या में राममंदिर के मुद्दे को राष्ट्रवाद से जोड़कर हिंदुओं को एकसूत्र में बांध दिया. बीजेपी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनवाने को अपने एजेंडे में शामिल किया और इसे देशव्यापी अभियान बना दिया.

लाल कृष्ण आडवाणी ने 1990 में निकाली राम रथयात्रा

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए विश्व हिंदू परिषद ने 1984 में दिल्ली में प्रथम धर्म संसद का आयोजन किया था, जिसमें यह तय हुआ था कि रामजन्मभूमि को मुक्त कराकर वहां राम मंदिर का निर्माण कराया जाएगा. इसके पीछे यह धार्मिक मान्यता थी कि अयोध्या ही भगवान श्रीराम की जन्मभूमि है. विश्व हिंदू परिषद के इस अभियान का राजनीतिक चेहरा बीजेपी बनी और इसमें लाल कृष्ण आडवाणी ने भरपूर योगदान दिया. राम मंदिर को राष्ट्रवाद से जोड़कर उन्होंने एक राम रथयात्रा निकाली जिसकी शुरुआत 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ में हुई थी. लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा देश के जिस भी इलाके के से होकर गुजरी वहां का हिंदू राम के नाम पर एकजुट हुआ और उनका बीजेपी से तार जुड़ता गया. 23 अक्टूबर 1990 को जब बिहार के समस्तीपुर में लालू यादव ने उनको गिरफ्तार करवाया तो पूरे देश में खूब हंगामा भी हुआ था और हिंदू वोटर्स की सहानुभूति बीजेपी और आडवाणी को मिली थी. इसके लिए आडवाणी ने बहुत मेहनत की वे एक दिन में कई सभाएं करते थे. बीजेपी को आम आदमी की पार्टी बनाने के लिए उन्होंने अपने भाषणों से उनके दिल में जगह बनाई.राम रथयात्रा का आमजन मानस पर कितना प्रभाव पड़ा इसे ऐसे समझा जा सकता है कि जिस बीजेपी को 1984 के लोकसभा चुनाव में महज दो सीटें मिलीं थीं और 196 में वे सत्ता तक पहुंच गए.

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आर्टिकल 370, यूसीसी और राममंदिर को आडवाणी ने बनाया एजेंडा

जनसंघ के जमाने से ही आडवाणी आर्टिकल 370 और यूसीसी के समर्थन में थे, लेकिन जब उन्होंने यह देखा कि जनता का समर्थन मात्र इन मुद्दों से प्राप्त नहीं किया जा सकता है, तो उन्होंने जनभावनाओं से जुड़े मुद्दे को उठाया और हिंदुत्व उनकी और बीजेपी की आवाज बन गया. लाल कृष्ण आडवाणी तीन बार बीजेपी के अध्यक्ष भी रहे है और अपने दो कार्यकाल  में उन्होंने बीजेपी को शीर्ष पर पहुंचाया.

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पाकिस्तान से आए रिफ्यूजी थे लालकृष्ण आडवाणी

लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची (अब पाकिस्तान में) में हुआ था. उन्होंने कराची से ही स्कूली शिक्षा ली थी और उसके बाद काॅलेज की पढ़ाई के लिए वे सिंध राज्य के डीजी नेशनल काॅलेज गए थे. भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद उनका परिवार कराची से मुंबई आकर बस गया. यहां उन्होंने गवर्मेंट लाॅ काॅलेज से लाॅ की डिग्री ली. आजादी से पहले ही आडवाणी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक बन गए थे और वे कराची यूनिट के सेक्रेटरी भी बन गए थे. 1951 में वे जनसंघ से जुड़े और यहीं पर उनकी मुलाकात अटल बिहारी वाजपेयी से हुई और फिर दोनों गहरे मित्र बन गए. 1970 में आडवाणी पहली बार राज्यसभा के लिए चुने गए. वे 1998 में देश के गृहमंत्री बने और 2002 से 2004 तक वे देश के उप प्रधानमंत्री भी रहे.  2024 में उन्हें सरकार ने भारत का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया है. 

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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