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Home Prabhat Khabar Special झारखंड चुनाव 2019 में इन 3 विधायकों को मिले थे सबसे ज्यादा वोट, पोटका सीट बना हाॅट केक

झारखंड चुनाव 2019 में इन 3 विधायकों को मिले थे सबसे ज्यादा वोट, पोटका सीट बना हाॅट केक

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झारखंड चुनाव 2019 में इन 3 विधायकों को मिले थे सबसे ज्यादा वोट, पोटका सीट बना हाॅट केक

Jharkhand Elections : झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में इस बार तीन विधानसभा चुनाव क्षेत्र पर आम लोगों की खास नजर रहने वाली है. इनके नाम है बहरागोड़ा, सिसई और पोटका. इसकी वजह यह है कि झारखंड विधानसभा चुनाव 2019 में इन सीटों पर चुनाव जीतने वाले प्रत्याशियों को मतदाताओं ने सबसे ज्यादा पसंद किया था और इन्हें सबसे अधिक वोट दिए थे. ये तीनों विधायक समीर कुमार मोहंती, जिग्गा सुसारण होरो और संजीब सरदार एक बार फिर चुनाव मैदान में हैं. झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 में उनके सामने जो उम्मीदवार हैं, वे भी राजनीति में अच्छी पैठ रखते हैं.

बहरागोड़ा के विधायक समीर मोहंती को मिला था सबसे अधिक वोट

बहरागोड़ा के विधायक समीर कुमार मोहंती को 2019 के विधानसभा चुनाव में 61.99 प्रतिशत वोट मिले और वे सबसे अधिक वोट से जीतने वाले नेताओं की लिस्ट में टाॅप पर रहे. उन्हें कुल 106017 वोट मिले थे जो कुल वोट का 61.99 प्रतिशत था. उन्होंने बीजेपी नेता कुणाल षाड़ंगी को पराजित किया था. इस बार के चुनाव में बहरागोड़ा से जेएमएम ने समीर कुमार मोहंती को फिर से टिकट दिया है, उनके खिलाफ बीजेपी के डाॅ दिनेशानंद गोस्वामी चुनाव लड़ रहे हैं. 

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जिग्गा सुसारण होरो ने दिनेश उरांव को दी थी शिकस्त

सिसई विधानसभा क्षेत्र से जेएमएम के जिग्गा सुसारण होरो ने रिकाॅर्ड जीत दर्ज की थी और उन्हें कुल वोट का 57.85 प्रतिशत वोट मिला था. उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार दिनेश उरांव को हराया था, जबकि दिनेश उरांव ताकतवार उम्मीदवार थे और दो बार इस सीट से विधायक भी रहे चुके थे. जिग्गा सुसारण होरो को 93720 वोट मिले थे. इस बार के चुनाव में जिग्गा सुसारण के सामने बीजेपी के उम्मीदवार डाॅ अरुण उरांव हैं. जिग्गा होरो के सामने इस बार अपनी प्रतिष्ठा बचाने की चुनौती है, क्योंकि पिछले चुनाव में जनता ने उन्हें भारी समर्थन दिया था.

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पोटका से 55.61% वोट लेकर विजयी हुए थे संजीब सरदार

पोटका विधानसभा क्षेत्र इस बार खासा चर्चा में है, क्योंकि इस बार बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा की पत्नी को यहां से टिकट दिया है. मेनका सरदार इस सीट पर बीजेपी की सशक्त उम्मीदवार रही हैं और उन्होंने यहां से तीन बार चुनाव जीता भी है. लेकिन विधानसभा चुनाव 2019 में मेनका सरदार को झारखंड मुक्ति मोरचा के संजीब सरकार ने शिकस्त दे दी थी. संजीब सरदार को कुल 55.61% वोट मिले थे. उन्हें कुल 110753 वोट मिले थे. चूंकि पिछला चुनाव मेनका सरकार हार गई थीं,  इस बार चुनावी मैदान में पूर्व मुख्यमंत्री की पत्नी हैं, इसलिए यह हाॅट सीट बना हुआ है और परिणाम पर सबकी नजर रहेगी.

गौर करने वाली बात यह है कि सिसई और पोटका दोनों ही आदिवासियों के लिए रिजर्व सीट है और इन दोनों सीट पर महिला उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा है. पोटका में कुल महिला मतदाता 158596 हैं, जबकि पुरुष 151625 हैं, वहीं सिसई में कुल महिला मतदाता 134190 और पुरुष वोटर 128422 हैं. बहरागोड़ा निर्वाचन क्षेत्र की अगर बात करें तो यहां 2009 से जेएमएम का कब्जा है, उससे पहले इस सीट से बीजेपी उम्मीदवार दिनेश षाड़ंगी विधायक थे.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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