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Home Prabhat Khabar Special इजरायल से क्यों है हमास और हिजबुल्लाह की दुश्मनी? 107 साल बाद भी नहीं निपटा विवाद

इजरायल से क्यों है हमास और हिजबुल्लाह की दुश्मनी? 107 साल बाद भी नहीं निपटा विवाद

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इजरायल से क्यों है हमास और हिजबुल्लाह की दुश्मनी? 107 साल बाद भी नहीं निपटा विवाद

Israel Hamas War: पश्चिम एशिया में युद्ध की आग तब और तेज हो गई थी जब पिछले साल 2023 में हमास ने इजरायल पर राकेट दागे और उनके इलाके में घुसकर हमास के आतंकियों ने कई नागरिकों को मारा. इस हमले के बाद इजरायल और हमास तो आमने-सामने हैं ही कई अन्य देश भी इस जंग में कूद पड़े हैं. हमास के लीडर इस्माइल हानिये की हत्या के बाद से ईरान और लेबनान इजरायल पर हमले कर रहे हैं. हिजबुल्लाह और ईरान ने हानिये की मौत के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराते हुए लगातार उसपर हमले कर रहा है और यह ऐलान कर चुका है कि इजरायल  का अंत नजदीक है. 

रविवार सुबह भी हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमला किया और उनके सैन्य ठिकानों पर हमला करने का दावा किया. वहीं इजरायल का कहना है कि हिजबुल्ला ने उनके नागरिकों को निशाना बनाया है. हिजबुल्ला और इजरायल के बीच विवाद तब से ज्यादा गहरा गया है जबसे इस्माइल हानिये की हत्या हुई है. इस्माइल हानिए की 31 जुलाई को हत्या कर दी गई थी, उसके बाद ईरान ने खुले तौर पर यह कहा था कि वह इजरायल  को समाप्त कर देगा. 

कौन है इस्माइल हानिये जिसकी हत्या के बाद बौखला गया है ईरान

इस्माइल हानिये हमास का चीफ था और वह फिलस्तीन का प्रधानमंत्री भी रहा था. उसका जन्म एक रिफ्यूजी कैंप में गाजापट्टी में 1962 में हुआ था. 1985 में शिक्षा के दौरान वह हमास से जुड़ा और इजरायल ने उसे कई बार जेल में भी रखा. सात अक्टूबर 2023 को जब हमास ने इजरायल पर हमला किया और इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की तो यह इजरायल और हमास के बीच युद्ध की चर्चा जोरों पर हुई. हानिए ने सार्वजनिक तौर पर यह कहा था कि उसने इजरायल-फिलिस्तीन विवाद का नया अध्याय शुरू किया है. इस हमले के बाद से ही इस्माइल हानिए इजरायल के निशाने पर था और जब वह तेहरान में था, उसी वक्त इजरायल ने उसपर हमला किया और उसकी हत्या कर दी. इस हमले को ईरान ने अपनी संप्रुभता पर हमला बताया था और यह कहा था कि इजरायल को खत्म कर दिया जाएगा. 

ईरान की बौखलाहट से यह साफ है कि वह इजरायल पर हमला करेगा, यहां यह स्पष्ट नहीं था कि वह खुद इजरायल पर हमला करेगा या हिजबुल्लाह, हूथी और हमास का सहारा लेगा. हानिये की हत्या के बाद हिजबुल्ला लगातार इजरायल पर हमले कर रहा है.

क्या है हिजबुल्लाह

1943 में लेबनान को फ्रांस से आजादी मिली थी. लेबनान की बहुसंख्यक आबादी मुसलमान है. हिजबुल्लाह यहीं का एक आतंकवादी समूह है, जिसका गठन 1982 में किया गया था. इजरायली आक्रमण का जवाब देने के लिए ईरान और सीरिया के समर्थन से हिजबुल्लाह का गठन किया गया था. यह शिया मुसलमानों का संगठन है. लेबनान में यह एक राजनीतिक दल के रूप में भी काम करता है, साथ ही यह शिया मुसलमानों को अपनी सेवाएं देता है, जिसमें उसके लड़ाके शामिल होते हैं. हालांकि हिजबुल्लाह के पास कोई मान्यता प्राप्त सेना नहीं है, लेकिन इसके नेता हसन नसरूल्लाह का कहना है कि उनके पास एक लाख से अधिक लड़ाके हैं. यह लड़ाके गुरिल्ला युद्ध में शामिल हैं और इनका उद्देश्य इजरायल के खिलाफ युद्ध करना और उसे सबक सिखाना है. अमेरिका ने इसे आतंकवादी संगठन घोषित किया है और हसन नसरूल्लाह का नाम टाॅप आतंकियों की सूची में नंबर वन पर है.

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इजरायल से क्या है हमास और हिजबुल्लाह की दुश्मनी

Israeal Hamas War
राॅकेट से लगातार हो रहे हैं हमले

हमास और हिजबुल्लाह की इजरायल से जो दुश्मनी है उसे पीछे फिलिस्तीन और इजरायल का विवाद है. इस विवाद की शुरुआत 1917 में तब हुई थी जब ब्रिटेन के विदेश सचिव आर्थर जेम्स ने बाल्फोर  घोषणा की थी. इस घोषणा में यह कहा गया था कि फिलिस्तीन में यहूदियों के लिए एक घर होगा, यानी उनके लिए अलग देश बनाया जाएगा. इस घोषणा के बाद यहूदियों और फिलिस्तीनियों का संघर्ष और बढ़ गया. फिलिस्तीन में यहूदी रिफ्यूजी के रूप में यूरोप से भागकर आए थे. धीरे-धीरे उनकी संख्या काफी बढ़ गई और उनका विरोध फिलिस्तीन करने लगे. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो भाग में बांटने की घोषणा की थी, जिसे यहूदियों ने स्वीकार किया, लेकिन फिलिस्तीनियों ने इसे स्वीकार नहीं किया और युद्ध छिड़ गया. 14 मई, 1948 को इजरायल ने अपने आपको स्वतंत्र देश घोषित कर दिया, इसके बाद फिलिस्तीन-इजराइल युद्ध की शुरुआत हुई. वर्ष 1949 में इस युद्ध में इजरायल की जीत हुई और सात लाख से अधिक फिलिस्तीनी विस्थापित हो गये और यह क्षेत्र तीन भागों में विभाजित हो गया- इजरायल, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी. इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया. यह तनाव आज भी कायम है और फिलिस्तीन और इजरायल के बीच युद्ध जारी है. इसी वजह से हमास और हिजबुल्लाह इजरायल के दुश्मन हैं.

सभी मुस्लिम देश इजरायल के दुश्मन नहीं : धनंजय त्रिपाठी

विदेश मामलों के जानकार डाॅ धनंजय त्रिपाठी ने बताया कि हिजबुल्लाह इजरायल पर जो हमले कर रहा है उसके पीछे ईरान ही है. इजरायल-हमास युद्ध के बाद जब उसके लीडर हानिये की हत्या कर दी गई तो हिजबुल्लाह ने इजरायल पर हमला शुरू कर दिया है. गाजापट्टी पर इजरायल के हमले से फिलिस्तीन और अन्य मुस्लिम देशों में बेचैनी और गुस्सा है. वे इजरायल को अपना दुश्मन मानते हैं. हालांकि यह जनता का रिएक्शन है, जहां तक बात सरकार की है, तो सभी मुस्लिम देश इजरायल के विरोधी नहीं हैं. इसकी वजह राजनीति है.

जहां तक बात अमेरिका की करें तो वह फिलहाल की स्थिति में यह चाहता है कि इजरायल और फिलिस्तीन के युद्ध रूके और वहां शांति स्थापित हो, लेकिन यह बात भी तय है कि अमेरिका में चाहे किसी की भी सरकार हो वे इजरायल को समर्थन देना बंद नहीं करेंगे. अमेरिका और इजरायल के बीच कई सैन्य और रणनीतिक समझौते हैं जिसकी वजह से यह सबकुछ होगा.

https://www.youtube.com/watch?v=pItcllcbg5I

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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