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Home Prabhat Khabar Special युद्ध के 20वें दिन ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को हड़काया, बदला डोनाल्ड ट्रंप का सुर

युद्ध के 20वें दिन ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को हड़काया, बदला डोनाल्ड ट्रंप का सुर

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युद्ध के 20वें दिन ईरान ने कतर के जरिए अमेरिका को हड़काया, बदला डोनाल्ड ट्रंप का सुर
डोनाल्ड ट्रंप

Iran Strike World Largest LNG Plant : मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने 19 मार्च को बहुत ही खतरनाक रूप ले लिया है, जिसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख में नरमी आई है और उन्होंने चौंकाने वाले बयान दिए हैं. हालांकि डोनाल्ड ट्रंप ने सीधे–सीधे तो नरमी नहीं बरती है, लेकिन वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर उनकी चिंता नजर आई. आइए समझते हैं आखिर ट्रंप क्यों बदले हुए नजर आ रहे हैं.

क्या ईरान ने अपने ऊपर हुए हमलों का बदला लिया है?

28 फरवरी से लगातार हमले झेल रहे ईरान ने 19 मार्च को कतर के सबसे अहम ऊर्जा केंद्र रास लाफान पर बड़ा हमला किया. इस हमले की पुष्टि कतर के विदेश मंत्रालय ने की. यह हमला कूटनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. कतर में दुनिया की सबसे बड़ी LNG (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) सुविधाएं मौजूद हैं. ईरान के हमले से पर्ल GTL प्लांट सहित कई ऊर्जा इकाइयों को नुकसान पहुंचा है.

ईरान पर हुए हमले में कतर सीधे तौर पर कहीं से भी शामिल नहीं था, लेकिन जब इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े गैस भंडार साउथ पार्स गैस फील्ड और असालूयेह क्षेत्र पर हमले किया, तो ईरान ने जवाबी कार्रवाई में वैश्विक ऊर्जा भंडार को निशाना बना दिया. उसने यह मैसेज दिया है कि अगर ईरान की ऊर्जा अर्थव्यवस्था की रीढ़ को तोड़ा जाएगा, तो ईरान भी चुप नहीं बैठेगा. इजरायल के हमले में ईरान के कई बड़े अधिकारी भी मारे गए हैं, जिनमें इस्माइल खातिब और अली लारिजानी जैसे नेता और अधिकारी भी शामिल हैं.

ईरान ने कतर को निशाना क्यों बनाया?

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कतर पर ईरान का बड़ा हमला

अमेरिका ने ईरान पर इजरायल के सहयोग से जो हमला शुरू किया है, उसमें कतर की सीधे तौर पर कोई भूमिका नहीं है. बावजूद इसके ईरान ने कतर पर हमला किया, जिसका प्रभाव पूरे विश्व पर नजर आ रहा है. ईरान ने इसी उद्देश्य से यह हमला किया कि वह विश्व को यह बता सके कि अगर उसके ऊर्जा भंडारों पर हमला होगा और उनके नेताओं को मारा जाएगा, तो वह पूरी दुनिया पर इसके प्रभाव को दिखा देगा. इसी उद्देश्य से उसने क्षेत्रीय ऊर्जा नेटवर्क को अस्थिर करने के लिए कतर पर हमला किया. इतना ही नहीं ईरान ने खाड़ी देशों को भी एक तरह से चेतावनी दी है कि अगर वे इजरायल और अमेरिका के साथ खड़े रहे, तो परिणाम उन्हें भी भुगतना पड़ेगा. रास लाफान बिजली बनाने और इंडस्ट्रीज में इस्तेमाल होने वाले फ्यूल का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक्सपोर्टर है.

ट्रंप ने आखिर क्यों मारा यूटर्न?

कतर पर ईरान के हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत में ही सही लेकिन यूटर्न तो लिया है. सबसे बड़ी बात कि डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहा कि इजरायल ने ईरान के ऊर्जा भंडारों पर जो हमला किया है उसकी उन्हें कोई पूर्व जानकारी नहीं थी. ट्रंप का यह बयान काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि ईरान पर हमला इजरायल और अमेरिका का संयुक्त सैन्य अभियान है. ऐसे में अगर ट्रंप यह कह रहे हैं कि उन्हें हमले की कोई जानकारी नहीं थी, तो वह एक तरह से इससे खुद को अलग करने की कोशिश कर रहे हैं.

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ट्रंप ने यह भी कहा कि इजरायल अब साउथ पार्स गैस फील्ड जैसे संवेदनशील ऊर्जा ठिकानों पर हमला नहीं करेगा. यह बयान बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें ट्रंप ने एक तरह से इजरायल को रोकने की कोशिश की है. वहीं ट्रंप ने ईरान को भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने फिर से कतर पर हमला किया तो अमेरिका इसका मुंहतोड़ जवाब देगा. अपने इस बयान में ट्रंप ने यह कोशिश की है कि वे विश्व में बढ़ती ऊर्जा संकट को रोकें और तत्काल खाड़ी क्षेत्र में तनाव कम करें. संभवत: युद्ध के 20वें दिन ट्रंप के रुख में नरमी नजर आई है, जिसे शुभ संकेत माना जा सकता है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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