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Home Prabhat Khabar Special भारत- तालिबान क्यों धीरे-धीरे बढ़ा रहे नजदीकियां, शकुनि से आमिर खान मुत्ताकी तक कैसे रहे रिश्ते?

भारत- तालिबान क्यों धीरे-धीरे बढ़ा रहे नजदीकियां, शकुनि से आमिर खान मुत्ताकी तक कैसे रहे रिश्ते?

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भारत- तालिबान क्यों धीरे-धीरे बढ़ा रहे नजदीकियां, शकुनि से आमिर खान मुत्ताकी तक कैसे रहे रिश्ते?
विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी

India Taliban Relation : आमिर खान मुत्ताकी अफगानिस्तान के तालिबान सरकार में विदेश मंत्री हैं, उनकी चर्चा यहां इसलिए क्योंकि उनके भारत दौरे पर पूरे विदेश की नजर थी. मुत्ताकी एक सप्ताह भारत में रहे और इस दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की, अजित डोभाल से गंभीर चर्चा की, दारुल उलूम देवबंद के कार्यालय गए और भारत के कई अहम जगहों का दौरा भी किया. जिस वक्त मुत्ताकी भारत दौरे पर थे उस वक्त अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच डूरंड लाइन पर युद्ध के हालात थे, दोनों एक दूसरे की सीमा में गोलिया और बम बरसा रहे थे. आमिर खान मुत्ताकी के भारत दौरे से एक ओर पाकिस्तान के अंदर बहुत बेचैनी है और उसने लगातार यह आरोप लगाया है कि भारत, तालिबान को फंडिंग करता है, ताकि वह पाकिस्तान विरोधी कार्रवाइयों को जारी रखे. वहीं दूसरी ओर पूरा विश्व यह जानना चाहता है कि क्या भारत, अफगानिस्तान में तालिबान की सरकार को मान्यता दे देगा?

आखिर भारत और तालिबान के बीच क्यों बढ़ी हैं नजदीकियां?

2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया, तो भारत सरकार ने तालिबान के शासन को मान्यता नहीं दी. तालिबान को वहां की जनता ने नहीं चुना था, बल्कि उसने सत्ता पर कब्जा किया था. उससे पहले वहां लोकतांत्रिक सरकार थी. इसी वजह से भारत सरकार ने तालिबान को मान्यता नहीं दी,अपना दूतावास वहां बंद कर दिया, लेकिन अफगानिस्तान के साथ मानवीय संबंध रखा. अब जबकि अफगानिस्तान में तालिबान सरकार के चार साल पूरे हो चुके हैं, भारत, तालिबान के साथ नजदीकी बढ़ा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत यह नहीं चाहता है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान की जमीन का उपयोग भारत के खिलाफ करे.

इस संबंध में साउथ एशियन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर धनंजय त्रिपाठी बताते हैं कि भारत के लिए यह बहुत जरूरी है कि अफगानिस्तान के साथ संबंध बनाए जाएं. विश्व के कई देश इस ओर पहल कर चुके हैं और कई करने वाले हैं. रूस ने तो तालिबान सरकार को मान्यता पहले ही दे दी है, चीन भी तालिबान के साथ लगातार संपर्क में है.

अफगानिस्तान में भारत के सहयोग से कई डेवलपमेंट प्रोजेक्ट भी चल रहे थे, तालिबान सरकार के आने से उसमें दिक्कत आई. अब भारत यह चाहता है कि यह डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चलते रहें, इसके लिए अफगानिस्तान में जो भी सरकार है उससे संबंध बनाना जरूरी है. अफगानिस्तान के कई स्टूडेंट भारत आकर पढ़ाई करते हैं और कई लोग इलाज कराने भी भारत आते हैं, अगर भारत और अफगानिस्तान के बीच किसी तरह के संबंध नहीं होंगे, तो इन जरूरतमंद अफगानों को परेशानी होगी,इस वजह से भी भारत ने तालिबान के साथ संपर्क बनाया है.

पाकिस्तान जिस प्रकार का रिश्ता भारत के साथ रखता है, उस लिहाज से भी भारत ने अफगानिस्तान में अपनी दर्ज कराने की कोशिश की है, क्योंकि अफगानिस्तान के साथ भारत के संबंध काफी पुराने हैं. भारत और अफगानिस्तान का संबंध इसलिए भी जरूरी है क्योंकि कुछ शक्तियां अफगानिस्तान पर अपना प्रभाव बनाकर दक्षिण एशियाई रीजन में अस्थिरता उत्पन्न करना चाहते हैं. अगर ऐसा हुआ तो इसका भारत पर भी असर होगा, इसी वजह से भारत यह चाहता है कि अफगानिस्तान में शांति रहे और कोई उसका दुरुपयोग ना कर पाए.

क्रमांककारणभारत और तालिबान के बीच नजदीकियों की वजह
1भारत के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का संरक्षणअफगानिस्तान में भारत के सहयोग से चल रहे कई विकास परियोजनाएं तालिबान के आने से प्रभावित हुईं, जिन्हें फिर से चालू रखना भारत की प्राथमिकता है.
2मानवता और जनसंपर्क का पहलूअफगानिस्तान के छात्र और मरीज भारत आते हैं, इसलिए भारत चाहता है कि मानवीय आधार पर संपर्क बना रहे ताकि आम अफगानों को कठिनाई न हो.
3क्षेत्रीय स्थिरता की चिंताकुछ बाहरी शक्तियां अफगानिस्तान का उपयोग करके दक्षिण एशिया में अस्थिरता फैला सकती हैं, जिससे भारत भी प्रभावित हो सकता है.
4पाकिस्तान के प्रभाव को संतुलित करनापाकिस्तान अफगानिस्तान में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है, इसलिए भारत भी अपनी उपस्थिति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
5भूतपूर्व ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधभारत और अफगानिस्तान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्ते पुराने हैं, जिनको बनाए रखना भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है.
6अन्य वैश्विक शक्तियों की सक्रियतारूस और चीन जैसे देशों ने तालिबान से संपर्क बढ़ाया है, जिससे भारत को भी अफगानिस्तान के साथ संबंध बनाए रखने की आवश्यकता महसूस हुई.
7शांति और सुरक्षा की रणनीतिभारत चाहता है कि अफगानिस्तान में शांति बनी रहे ताकि कोई उसका दुरुपयोग भारत विरोधी गतिविधियों के लिए न कर सके.

कौन हैं आमिर खान मुत्ताकी, संयुक्त राष्ट्र की इजाजत लेकर क्यों आए भारत?

Amir Khan Muttaqi
आमिर खान मुत्ताकी

आमिर खान मुत्ताकी तालिबान द्वारा नियुक्त अफगानिस्तान के विदेश मंत्री हैं. वे अफगानिस्तान के हेलमंद प्रांत के नाद अली जिले में जन्मे हैं, लेकिन परिस्थितिवश उन्हें पाकिस्तान के रिफ्यूजी कैंप में पढ़ाई करनी पड़ी. वे तालिबान के सदस्य हैं और वे तालिबान के विभिन्न पदों पर भी रहे हैं. उन्होंने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित मदरसा दारुल उलूम हक्कानिया से उच्च इस्लामी पढ़ाई की है. इस मदरसे से कई तालिबानी पढ़ाई कर चुके हैं. आमिर खान मुत्ताकी जब भारत आने वाले थे तो उन्हें इस यात्रा के लिए संयुक्त राष्ट्र से इजाजत लेनी पड़ी. इसकी वजह यह है कि संयुक्त राष्ट्र ने मुत्ताकी को आतंकी घोषित कर रखा है और उनके विदेश जाने पर भी प्रतिबंध है.

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महाभारत से वर्तमान समय तक भारत का रहा है अफगानिस्तान से संबंध

भारत और अफगानिस्तान का संबंध काफी पुराना है. महाभारत काल में जिस गंधार का जिक्र आता है, वह आज के कंधार, पेशावर और काबुल तक फैला था. महाभारत के शुकनि और गांधारी इसी इलाके से आते थे. गांधारी कुरुवंश के राजा धृतराष्ट्र की पत्नी और कौरवों की मां थीं. मौर्यकाल में भी भारत का शासन कंधार और काबुल तक फैला था.अफगानिस्तान को कई साम्राज्यों की कब्रगाह भी कहा जाता है क्योंकि यहां कब्जा करने के लिए इतिहास के कई नायकों ने यहां युद्ध लड़े, जिनमें सिकंदर से लेकर, तुर्क, मंगोल सभी शासक शामिल था. भारत और अफगानिस्तान के संबंध सदियों पुराने हैं, जिनमें संस्कृति, धर्म, राजनीति और व्यापार भी शामिल रहे हैं.

प्राचीन और मध्यकालीन काल में अफगानिस्तान का कंधार और हिंदू कुश क्षेत्र भारतीय उपमहाद्वीप से जुड़ा रहा है.उपनिवेशवाद के दौर में ब्रिटिश भारत और रूस के बीच अफगानिस्तान की स्थिति रणनीतिक थी. उसी वक्त ब्रिटिश भारत को सुरक्षित करने के लिए डूरंड लाइन का निर्धारण हआ. सोवियत अफगान युद्ध के दौरान भारत ने अफगानी शरणार्थियों की मदद की. 2001 के बाद से भारत ने वहां कई डेवलपमेंट प्रोजेक्ट चलाए हैं और आज भी अफगानिस्तान को मानवीय सहायता प्रदान कर रहा है.

क्या भारत ने तालिबान को मान्यता दी है?

नहीं, भारत ने तालिबान सरकार को अफगानिस्तान में मान्यता नहीं दी है.

क्या भारत अफगानिस्तान की मदद कर रहा है?

हां, भारत मानवीय आधार पर अफगानिस्तान की मदद करता है.

दक्षिण एशियाई देशों में अफगानिस्तान को सबसे अधिक सहायता कौन देता है?

दक्षिण एशियाई देशों में अफगानिस्तान को सबसे अधिक सहायता भारत देता है.

तालिबान, भारत के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध क्यों रखता है?

ऐतिहासिक संबंधों की वजह से तालिबान भारत को अपना मित्र और करीबी मानता है.

तालिबान का देश कौन है?

तालिबान का देश अफगानिस्तान है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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