[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Prabhat Khabar Special Hindenburg Research : फिर धमाके के लिए तैयार हिंडनबर्ग, रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर उठ चुके हैं सवाल

Hindenburg Research : फिर धमाके के लिए तैयार हिंडनबर्ग, रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर उठ चुके हैं सवाल

0
Hindenburg Research : फिर धमाके के लिए तैयार हिंडनबर्ग, रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर उठ चुके हैं सवाल
Hindenburg Research

Hindenburg Research : हिंडनबर्ग रिसर्च एक साल बाद भारत में फिर धमाका करने की तैयारी में है और उसने इसके संकेत शनिवार सुबह दे दिए हैं. हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपने एक्स पोस्ट में लिखा है-Something big soon India. यानी जल्दी ही भारत के लिए जल्दी ही कुछ बड़ा होने वाला है. हिंडनबर्ग के इस पोस्ट के बाद से भारत में चर्चाओं का बाजार गर्म है और सब यह कह रहे हैं कि अदाणी के बाद अब किसकी बारी है. हिंडनबर्ग रिसर्च ना सिर्फ गूगल के टाॅप ट्रेंड में है, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफाॅर्म में भी ये ट्रेंड कर रहा है. हिंडनबर्ग रिसर्च ने 24 जनवरी 2023 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें उन्होंने अदाणी ग्रुप के शेयरों की कीमत में की गई हेराफेरी पर विस्तृत जानकारी थी.

इस रिपोर्ट के आने के बाद कुछ महीनों तक अदाणी ग्रुप के शेयरों में भारी गिरावट आई थी और कंपनी को बड़ा नुकसान भी हुआ था. निवेशकों को 30 अरब डालर से ज्यादा का नुकसान हुआ था, वह भी महज कुछ महीनों में.
हिंडनबर्ग के एक बार फिर संकेत दिए हैं कि वह भारत को लेकर कोई बड़ा खुलासा कर सकता है. अब सबके मन में यह सवाल है कि आखिर हिंडनबर्ग रिसर्च का अगला टारगेट कौन है? आम आदमी यह जानने के लिए बेताब है कि हिंडनबर्ग आखिर इस बार किस उद्योगपति को निशाने पर लेता है? हिंडनबर्ग की रिपोर्ट पर सेबी ने उसे नोटिस भेजा था, जिसे हिंडनबर्ग ने सच्चाई सामने लाने वाले को चुप कराने की कोशिश बताया था. अदाणी समूह ने तो हिंडनबर्ग की पूरी रिपोर्ट को ही खारिज कर दिया था और उसे झूठा और बदनाम करने वाला बताया था.


क्या है हिंडनबर्ग रिसर्च

हिंडनबर्ग रिसर्च अमेरिका की इंवेस्टमेंट रिसर्च कंपनी है, जिसकी स्थापना 2017 में नाॅथन एंडरसन ने की थी. एंडरसन इंटरनेशनल बिजनेस में ग्रेजुएट हैं. उन्होंने अपने शुरुआती नौकरी में डाटा रिसर्च पर काम किया. उनका रिसर्च पैसे के इंवेस्टमेंट को लेकर था. यही से उनकी रुचि शेयर बाजार और उससे जुड़े रिसर्च में हुई. बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर अपनी कंपनी खोली और शेयर मार्केट पर रिसर्च करने लगे. रिसर्च में उन्होंने शेयर मार्केट में हो रहे घपलों को उजागर करना शुरू किया. चूंकि शेयर मार्केट में आम आदमी भी इंवेस्ट करता है, इसलिए उसकी नजर उस कंपनी पर रहती है, जहां से उसे मुनाफा होगा. वह कतई उस कंपनी के शेयरों में पैसा नहीं लगाना चाहेगा, जहां उसके पैसे का गलत इस्तेमाल हो और उसका लाभ भी उसे ना मिले.

Also Read :Waqf Amendment Bill 2024: वक्फ एक्ट बिल पर मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा- यह जुल्म है, क्या राम मंदिर ट्रस्ट में शामिल होगा गैर हिंदू?


हिंडनबर्ग के रिसर्च से इसी तरह की घपलेबाजी उजागर हुई और आम आदमी को मदद मिली. हालांकि हिंडनबर्ग की रिसर्च पर कई बार सवाल उठाए गए और यह भी कहा गया कि यह अपने हित में कंपनी को बदनाम करने की साजिश है. लेकिन कंपनी कहती है कि हम बाजार में मौजूद मानव निर्मित आपदाओं के बारे में लोगों को जानकारी देते हैं.

आम आदमी को नुकसान से बचाने का दावा करती है कंपनी

विदेश मामलों के जानकार शशांक बताते हैं कि हिंडनबर्ग जैसी कंपनियां अवयरनेस का काम करने का दावा करती हैं. इनका कहना है कि वे यह चाहती है कि आप आदमी को नुकसान ना हो. यह बात स्वाभाविक है कि जो लोग बाजार में अपना पैसा लगाते हैं, उनकी मंशा मुनाफा कमाने की रहती हैं. वे अपने पैसे को उस तरह की कंपनी में नहीं लगाना चाहेंगे जहां से उनको पैसे का नुकसान हो और प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठे. कई बार ऐसा भी देखा गया है कि रिसर्च कंपनियां होशियारी दिखाने के लिए भी इस तरह के रिपोर्ट जारी करती है, जिसका उद्देश्य अवयरनेस के अतिरिक्त भी बहुत कुछ होता है. कई बार कंपनियों को टेकओवर करने और उसे बदनाम करने की मंशा से भी इस तरह के रिपोर्ट जारी किए जाते हैं.


जहां तक बात रिपोर्ट की विश्वसनीयता की है, तो अगर सरकार को लगता है कि एक विदेशी कंपनी उनके देश की कंपनियों को बदनाम कर रही है और यह अनैतिक और गैरकानूनी है तो वे संबंधित देश से इस संबंध में करार कर सकते हैं. जैसे अपराधियों के संबंध में होता है,लेकिन वित्तीय मामलों में अबतक यह संभव नहीं हो पाया है.

Also Read :Jaya Amitabh Bachchan : जया अमिताभ बच्चन कहने से क्यों नाराज हैं ‘गुड्डी’, नाम पर क्या है कानून

https://www.youtube.com/watch?v=lukDiQ9uCcc
Previous article Shravani Mela: भोले के भक्तों के लिए खुशखबरी, बाबा मंदिर और बासुकिनाथ धाम के लिए शुरू होगी हेलिकॉप्टर दर्शन सेवा
Next article Varalakshmi Vrat 2024: वरलक्ष्मी व्रत कब है, जानें शुभ मुहूर्त-पूजा विधि और महत्व
Avatar Of Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel