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Home Prabhat Khabar Special क्या केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के रिटायरमेंट एज में किया है बदलाव? जानिए किसकी सिफारिशों पर पूरी होती है प्रक्रिया

क्या केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के रिटायरमेंट एज में किया है बदलाव? जानिए किसकी सिफारिशों पर पूरी होती है प्रक्रिया

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क्या केंद्र सरकार ने कर्मचारियों के रिटायरमेंट एज में किया है बदलाव? जानिए किसकी सिफारिशों पर पूरी होती है प्रक्रिया
Government Employees Retirement Age

Government Employees Retirement Age : भारत सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 60 साल निर्धारित कर रखी है. कुछ दिनों से एक सूचना सोशल मीडिया में वायरल है, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि केंद्र सरकार ने कर्मचारियों की रिटायरमेंट एज में दो साल की वृद्धि कर दी है और अब सभी कर्मचारी 62 साल की उम्र में रिटायर होंगे.

इस वायरल खबर में यह दावा किया जा रहा है यह योजना 1 अप्रैल 2025 से लागू हो जाएगी. योजना को नाम दिया गया है रिटायरमेंट आयु बढ़ोतरी योजना. इस वायरल खबर में यह दावा किया गया है कि गुणवत्ता में वृद्धि के लिए सरकार रिटायरमेंट की आयु को बढ़ा रही है. खबर में यह भी दावा किया गया है कि जीवन प्रत्याशा यानी एक व्यक्ति के जीवित रहने की औसत आयु में वृद्धि की वजह से भी सरकार ने रिटायरमेंट की उम्र में वृद्धि का फैसला किया है.

रिटायरमेंट की उम्र के वायरल खबर का सच क्या है?

केंद्र सरकार के कर्मचारियों के रिटायरमेंट एज को लेकर जब खबर बहुत वायरल हुई और कर्मचारियों के मन में सवाल उठे तो सरकार की ओर से इस खबर की सच्चाई बताई गई है. पीआईबी ने अपने एक्स हैंडल पर एक पोस्ट किया है, जिसमें यह बताया गया है कि यह खबर झूठी है. पीआईबी ने पोस्ट में बताया है कि भारत सरकार ने इस तरह का कोई फैसला नहीं किया है. पोस्ट में आम लोगों से यह अपील भी की गई है कि वे बिना खबर की सत्यता जानें उसे शेयर ना करें, क्योंकि इससे गलत सूचना का विस्तार होता है.

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रिटायरमेंट की आयु में कब हुआ था बदलाव?

केंद्र सरकार ने पांचवें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों के रिटायरमेंट एज में बदलाव किया था और इसे 58 से बढ़ाकर 60 कर दिया था.  यह सिफारिश 1998 में की गई थी, उसके बाद से आजतक यानी 26 साल के अंतराल में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की आयु में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है.

किसकी सिफारिश पर हुआ था रिटायरमेंट की आयु में बदलाव?

केंद्र सरकार ने पांचवें वेतन आयोग की सिफारिश पर रिटायरमेंट की आयु में बदलाव किया था. वेतन आयोग का गठन सरकार ने आजादी के बाद अपने कर्मचारियों की स्थिति और उनकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सिफारिश करने के लिए किया है. यह आयोग प्रशासनिक व्यवस्था का आवश्यक अंग है और कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करता है. वेतन आयोग वित्त मंत्रालय के अधीन काम करता है. आजादी के बाद से अबतक सरकार ने कुल सात बार वेतन आयोग का गठन किया है और उनकी सिफारिशों के आधार पर कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं में बदलाव किया है. सातवें वेतन आयोग के गठन के 26 वर्ष  बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक आठवें वेतन आयोग का गठन नहीं हुआ है.

  • पहला वेतन आयोग-1946
  • दूसरा वेतन आयोग-1957
  • तीसरा वेतन आयोग-1970
  • चौथा वेतन आयोग-1983
  • पांचवां वेतन आयोग-1994
  • छठा वेतन आयोग-2006
  • सातवां वेतन आयोग-2013

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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