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Home Prabhat Khabar Special Explained : क्या है गाजा शांति योजना का प्रथम चरण? जो भुखमरी से लोगों को दिलाएगा मुक्ति और बंदियों की होगी रिहाई

Explained : क्या है गाजा शांति योजना का प्रथम चरण? जो भुखमरी से लोगों को दिलाएगा मुक्ति और बंदियों की होगी रिहाई

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Explained : क्या है गाजा शांति योजना का प्रथम चरण? जो भुखमरी से लोगों को दिलाएगा मुक्ति और बंदियों की होगी रिहाई
गाजा शांति योजना का प्रथम चरण

Gaza Peace Plan First Phase : इजरायल और हमास के बीच पिछले दो साल से जारी युद्ध अब समाप्त हो जाएगा, इसकी उम्मीद इसलिए लगाई जा रही है क्योंकि गाजा शांति योजना के तहत पहले चरण के समझौतों पर इजरायल और हमास से हस्ताक्षर कर दिए हैं. इस बात की पुष्टि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करके किया है. डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इजरायल और हमास ने गाजा शांति योजना के पहले चरण पर हस्ताक्षर कर दिए हैं.

सोशल मीडिया ट्रूथ पर ट्रंप ने लिखा है कि जल्दी ही सभी बंधकों की रिहाई होगी और इजरायल अपनी सेना को एक सहमत रेखा तक वापस बुला लेगा. अगले 72 घंटे में समझौते के तहत दोनों पक्ष बंधकों की रिहाई करेंगे, हालांकि अभी बंधकों की लिस्ट नहीं मिलने की बात सामने आई है, लेकिन अगर यह संभव हो पाया तो मिडिल-ईस्ट में जारी घमासान थम पाएगा. आइए समझते हैं क्या है गाजा शांति योजना का पहला चरण.

क्या है गाजा शांति योजना का पहला चरण? (Gaza Peace Plan First Phase)

Donald-Trump
डोनाल्ड ट्रंप

इजरायल और हमास के बीच जारी युद्ध को रोकने के लिए कई दौर की बातचीत के बाद युद्धविराम का समझौता तय किया गया. यह समझौता 20 सूत्री है और इसके प्रथम चरण की शुरुआत हो चुकी है. काहिरा में हुए शांति समझौते के तहत अब अगले 72 घंटे में बंधकों को रिहा किया जाएगा. शांति के लिए आयोजित इस प्रथम चरण के समझौते के लिए इज़रायल, हमास, अमेरिका, क़तर और मिस्र के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई. 20 सूत्री शांति योजना का प्रथम चरण बहुत महत्वपूर्ण है. इसके पहले चरण के तहत बंधकों की रिहाई और मानवीय आदान-प्रदान की जगह दी गई है.

प्रथम चरण में हमास उन 48 बंदियों को रिहा करेगा, जिन्हें 7 अक्टूबर 2023 के हमले में उसने बंदी बना लिया था. हालांकि आशंका है कि उनमें से कई लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं इजरायल भी फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ेगा, बताया जा रहा है कि एक इजरायली बंधक की रिहाई पर 100 फिलिस्तीनी को छोड़ा जाएगा. बंधकों की रिहाई के बाद इजरायल अपने देश के जेल में बंद फिलिस्तीनियों को भी छोड़ेगा, जिन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. इनमें 250 आजीवन कारावास झेल रहे कैदी और युद्ध के बाद हिरासत में लिए गए और बच्चों को भी छोड़ेगा.

प्रथम चरण के समझौते में क्या शवों का भी होगा आदान-प्रदान?

गाजा शांति योजना के तहत प्रथम चरण में दोनों पक्ष इजरायल और हमास ना सिर्फ जीवित बंधकों की रिहाई करेंगे, बल्कि वे शवों का भी आदान प्रदान करेंगे. इस संबंध में व्हाइट हाउस ने कहा है कि एक इजरायली बंधक के शव के बदले इजरायल 15 मृत फिलिस्तीनियों के शव लौटाएगा. पीस प्लान के तहत शवों की अदला-बदली का यह दृष्टिकोण बहुत ही मानवीय है, जो स्थिति को सामान्य बनाने में मदद कर सकता है.

क्या इजरायल की मानवीय सहायता पैकेज उपलब्ध कराने में भूमिका है?

गाजा में मानवीय सहायता को इजरायल ने अबतक पहुंचने से रोका है, लेकिन गाजा शांति योजना के लागू होने के बाद प्रथम चरण में वह मानवीय सहायता को सुरक्षित गाजा तक पहुंचने देगा. हालांकि मानवीय पैकेज वितरित करने में उसकी कोई भूमिका नहीं होगी, लेकिन वह उसे रोकेगा भी नहीं. गाजा में मानवीय सहायता पैकेज संयुक्त राष्ट्र की निगरानी में वितरित किए जाएंगे जिसमें मिस्र की भी अहम भूमिका होगी. दो साल से जारी युद्ध के बीच गाजा में स्थिति बहुत खराब हो गई है. शिविरों में रह रहे लोगों के सामने भुखमरी की स्थिति है और वे बीमार भी हैं. युद्ध की वजह से कई लोग घायल भी हुए हैं. ऐसे लोगों को भोजन और चिकित्सा सामग्री के साथ जीवन के लिए बुनियादी चीजें भी उपलब्ध कराई जाएंगी.

क्या शांति योजना के लागू होते ही युद्ध की समाप्ति हो जाएगी?

Hamas Attack On Gaza
हमास का गाजा पर हमला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में लागू हो रही गाजा शांति योजना इस बात की गारंटी तो नहीं देती है कि अब इजरायल और हमास के बीच युद्ध समाप्त हो जाएगा, लेकिन इसे शुरुआत माना जा सकता है.समझौते की घोषणा के बावजूद गाजा में विस्फोट हुए हैं.समझौते के तहत यह बात कही गई है कि जबतक समझौता लागू रहेगा, इजरायल और हमास अपनी सैन्य गतिविधियों को बंद रखेंगे. वे ना तो हमला करेंगे और ना ही एक दूसरे के क्षेत्र में घुसपैठ करेंगे.

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समझौते के तहत इजरायल अपने सैनिकों की वापसी भी करेगा. 20 सूत्री गाजा शांति समझौते का उद्देश्य ही यह है कि इस क्षेत्र में शांति स्थापित की जाए. इसके तहत मानवीय आधार पर बंदियों की अदला-बदली, राहत सामग्री का वितरण और सेना की वापसी और सीमाओं का सम्मान शामिल है. इस पूरी योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करवाने में ट्रंप की भूमिका भी अहम होगी.

कब शुरू हुआ था इजरायल और हमास के बीच युद्ध?

इजरायल और हमास के बीच तनाव आज की बात नहीं है. इसके पीछे वजह है फिलिस्तीन और इजरायल का विवाद है. इस विवाद की शुरुआत 1917 में तब हुई थी जब ब्रिटेन के विदेश सचिव आर्थर जेम्स ने बाल्फोर घोषणा की थी. इस घोषणा में यह कहा गया था कि फिलिस्तीन में यहूदियों के लिए एक घर होगा, यानी उनके लिए अलग देश बनाया जाएगा. इस घोषणा के बाद यहूदियों और फिलिस्तीनियों का संघर्ष और बढ़ गया. फिलिस्तीन में यहूदी रिफ्यूजी के रूप में यूरोप से भागकर आए थे. धीरे-धीरे उनकी संख्या काफी बढ़ गई और उनका विरोध फिलिस्तीन करने लगे. द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 1947 में संयुक्त राष्ट्र ने फिलिस्तीन को दो भाग में बांटने की घोषणा की थी, जिसे यहूदियों ने स्वीकार किया, लेकिन फिलिस्तीनियों ने इसे स्वीकार नहीं किया और युद्ध छिड़ गया.

14 मई, 1948 को इजरायल ने अपने आपको स्वतंत्र देश घोषित कर दिया, इसके बाद फिलिस्तीन-इजराइल युद्ध की शुरुआत हुई. वर्ष 1949 में इस युद्ध में इजरायल की जीत हुई और सात लाख से अधिक फिलिस्तीनी विस्थापित हो गये और यह क्षेत्र तीन भागों में विभाजित हो गया- इजरायल, वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी. इसके बाद से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता गया. यह तनाव आज भी कायम है और फिलिस्तीन और इजरायल के बीच युद्ध जारी है. चूंकि हमास फिलिस्तीन का हितैषी है इसलिए वह इजरायल का दुश्मन है. वर्तमान युद्ध की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हुई थी, जब हमास ने दक्षिणी हिस्से पर मिसाइल से हमला कर दिया था. इस हमले में दो हजार के करीब इजरायली नागरिक मारे गए थे और सैकड़ों घायल भी हुए थे.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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