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Home Prabhat Khabar Special Donald Trump : डोनाल्ड ट्रंप ने मारी बाजी बनेंगे अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति, जानिए ‘असंभव को संभव’ कैसे बनाया

Donald Trump : डोनाल्ड ट्रंप ने मारी बाजी बनेंगे अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति, जानिए ‘असंभव को संभव’ कैसे बनाया

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Donald Trump : डोनाल्ड ट्रंप ने मारी बाजी बनेंगे अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति, जानिए ‘असंभव को संभव’ कैसे बनाया

Donald Trump : अमेरिका का राष्ट्रपति चुनाव इस बार शुरुआत से ही चौंकाने वाला रहा. मुख्य मुकाबला डेमोक्रेट जो बाइडेन और रिपब्लिकन डोनाल्ड ट्रंप के बीच था, लेकिन चुनाव के महज चार महीने पहले जो बाइडेन मैदान से हट गए और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस का नाम सामने कर दिया. जो बाइडेन पर पार्टी का दबाव था क्योंकि वे डोनाल्ड ट्रंप से बहस में पिछड़ रहे थे. कमला हैरिस के मैदान में आने से मुकाबला रोचक हो गया, क्योंकि वे बहस के दौरान ट्रंप को जोरदार टक्कर दे रही थी.

कमला हैरिस के प्रति कई वर्गों के लोगों की सहानुभूति थी, एक तो वो महिला है, जिसकी वजह से अमेरिका को एक बार फिर एक महिला राष्ट्रपति मिलने की उम्मीद जागी, दूसरे वह अश्वेत हैं, तो अमेरिका का अश्वेत उनके साथ था और भारतवंशी होने की वजह से उनके साथ भारतीयों की भी सहानुभूति थी. 

डोनाल्ड ट्रंप ने कैसे कमला हैरिस को पछाड़ा

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डोनाल्ड ट्रंप ने कमला हैरिस को पछाड़ा

डोनाल्ड ट्रंप ने इस चुनाव में लोगों की भावनाओं का खूब फायदा उठाया और एक तरह से उन्हें यह विश्वास दिला दिया कि वे अमेरिकियों के लिए कमला हैरिस से बेहतर राष्ट्रपति साबित होंगे. जो बाइडेन के शासनकाल से आम अमेरिकी नाराज था. कोरोना काल के दौरान जो कुछ हुआ और जिस तरह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को झटका लगा उससे देश में एंटी इनकम्बेंसी नजर आ रही थी. जो बाइडेन को अमेरिका के सबसे कमजोर राष्ट्रपति के रूप में भी देखा जा रहा था और ट्रंप ने इस बात का पूरा फायदा उठाया. बाइडेन द्वारा यूक्रेन और इजरायल को अमेरिकी मदद देने से अमेरिका का आम आदमी नाराज है.

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अश्वेत कमला की जगह ट्रंप पर अमेरिकियों का ज्यादा भरोसा दिखा

कमला हैरिस ब्लैक अमेरिकन हैं और कहीं ना कहीं अमेरिकियों का विश्वास उनपर ट्रंप की अपेक्षा कम दिखा. जनसंख्या की बात करें तो अश्वेतों की संख्या वहां गोरे लोगों से कम है, शायद इसी बात का फायदा ट्रंप को मिला और वे जीत गए.

ट्रंप की चुनावी रणनीति

डोनाल्ड ट्रंप ने चुनावी रणनीति पर काफी काम किया और जब जो बाइडेन की जगह उनके सामने कमला हैरिस आईं, तो उनकी टीम ने पूरी तैयारी कर रखी थी. कमला के उपराष्ट्रपति के रूप में पूरे कार्यकाल का लेखा-जोखा रखा गया और ट्रंप ने हैरिस पर जोरदार हमले किए. अपने भाषणों के दौरान ट्रंप ने अपने आक्रामक अंदाज से खूब वाहवाही बटोरी, जबकि हैरिस जिन्हें समय भी कम मिला था, वे उस तरह का जवाब ट्रंप को नहीं दे पाईं.

भारतीयों को ट्रंप ने अंतिम समय में लुभाया

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जेंडी वेस और उनकी भारतीय मूल की पत्नी ऊषा वेंस

अमेरिका में भारतीय मूल के 2.6 मिलियन वोटर हैं, जिन्हें आकर्षित करने के लिए ट्रंप ने दीपावली पर खास मैसेज दिया और यह बताया कि वे हिंदुओं की रक्षा के लिए उनके साथ खड़े हैं. उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमले की निंदा की और कहा कि अगर हिंदुओं पर कहीं भी हमला होता है तो वे उनके साथ हैं. ट्रंप के इस मैसेज का भारतवंशियों पर खास प्रभाव पड़ा जबकि कमला हैरिस ने भारतवंशी होते हुए हिंदुओं को इग्नोर किया. इसके साथ ही ट्रंप ने उपराष्ट्रपति पद के लिए जेंडी वेंस का नाम आगे किया, जिनकी पत्नी भारतीय मूल की ऊषा वेंस हैं.

स्विंग स्टेट पर किया फोकस

डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव में कांटे की टक्कर को देखते हुए स्विंग स्टेट पर विशेष फोकस किया और उसका लाभ उन्हें मिला भी वे 7 में 6 स्विंग स्टेट में आगे हैं. पेंसिल्वेनिया, मिशिगन, विस्कॉन्सिन, जॉर्जिया, नेवादा, एरिजोना और नॉर्थ कैरोलिना स्विंग स्टेट में आते हैं, जिनका ट्रंप ने शुक्रिया भी अदा किया है और कहा है कि उनका पूरा साथ मिला. स्विंग स्टेट के मूड और मुद्दों को भांपकर ट्रंप ने अपना अभियान चलाया. ट्रंप ने अमेरिकियों को भरोसा दिलाया कि उन्होंने अपने शासनकाल में विश्व में कोई युद्ध नहीं कराया और अमेरिका के नवनिर्माण के बारे में सोचा.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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