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Home Prabhat Khabar Special Dhurandhar: कौन हैं मेजर मोहित शर्मा और चौधरी असलम खान , जिनके जीवन से प्रेरित है मूवी धुरंधर ?

Dhurandhar: कौन हैं मेजर मोहित शर्मा और चौधरी असलम खान , जिनके जीवन से प्रेरित है मूवी धुरंधर ?

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Dhurandhar: कौन हैं मेजर मोहित शर्मा और चौधरी असलम खान , जिनके जीवन से प्रेरित है मूवी धुरंधर ?
धुरंधर मूवी (फोटो आदित्य धर के X हैंडल से ली गई है.

Dhurandhar : धुरंधर मूवी आज ही सिनेमा घरों में रिलीज हुई है और ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि यह फिल्म बाॅलीवुड में एक नया ट्रेंड लेकर आ सकती है. बाॅलीवुड की यह काफी लंबी फिल्म है और इस फिल्म को इस साल की सबसे लंबी मूवी माना जा रहा है. फिल्म 3 घंटा 34 मिनट की बताई जा रही है. इस फिल्म की सबसे खास बात यह है कि इस फिल्म को भारत और पाकिस्तान के खुफिया एजेंसी RAW vs ISI से जोड़कर देखा जा रहा है और यहां कई गुप्त ऑपरेशन भी दिखाए गए हैं, जिसकी वजह से इसमें आम लोगों की रुचि बढ़ सकती है.

इस फिल्म में जिस तरह अंडरकवर ऑपरेशन को दिखाया गया है, उससे भारत में भी खुफिया ऑपरेशन को आधार बनाकर फिल्में बनाने का ट्रेंड शुरू हो सकता है, जैसा कि हाॅ लीवुड की फिल्मों में होता है. विवाद को अगर दरकिनार कर दें, तो इस फिल्म के दोनों किरदार हीरो रणवीर सिंह और विलेन संजय दत्त दोनों का ही किरदार दर्शकों को पसंद आ सकता है.

हालांकि दोनों ही किरदार पर आपत्तियां आईं हैं और मामला कोर्ट तक भी गया है. दरअसल रणवीर सिंह जो किरदार निभा रहे हैं उसके बारे में यह कहा जा रहा है कि वह अशोक चक्र विजेता मेजर मोहित शर्मा से प्रभावित है. उनके परिजनों ने इसके विरोध में कोर्ट का रुख भी किया. हालांकि फिल्म के निर्देशक आदित्य धर का कहना है कि फिल्म सच्ची घटनाओं से प्रेरित जरूर है, लेकिन यह किसी व्यक्ति का बायोपिक नहीं है, तो आइए जानते हैं रियल लाइफ उन किरदारों को जिनके जीवन से प्रेरित होकर धुरंधर मूवी बनाई गई है.

कौन हैं मेजर मोहित शर्मा जिनके जीवन से प्रेरित है धुरंधर मूवी?

मेजर मोहित शर्मा भारतीय सेना के अधिकारी थे. वे स्पेशल फोर्स 1पैरा के अधिकारी थे. उनके बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने एक कश्मीर युवक इफ्तिकार भट्ट बनकर हिजबुल मुजाहिद्दीन जैसे आतंकवादी संगठन में घुसपैठ की और कई आतंकवादियों को मारा था. 2009 में जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ मुहिम में वे शहीद हो गए थे. उन्होंने अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है. मेजर मोहित शर्मा के बारे में यह भी कहा जाता है कि उन्होंने पाकिस्तान में घुसकर कई अंडरकवर ऑपरेशन चलाए और आतंकवादियों को मारा. उनके परिजनों ने इस बात को लेकर आपत्ति जताई थी कि उनसे बिना अनुमति लिए मेजर मोहित शर्मा के जीवन पर फिल्म कैसे बनाई जा सकती है, हालांकि फिल्म के निर्देशक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह एक फिक्शन स्टोरी है, जो सच्ची घटनाओं से प्रेरित है, लेकिन इसे किसी की बाॅयोपिक नहीं कहा जा सकता है. फिल्म में रणवीर सिंह का गेटअप भी उसी तरह का है, जिस तरह का मेजर मोहित शर्मा अंडरकवर ऑपरेशन के दौरान रखते थे.

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कौन है चौधरी असलम खान, जिसका रोल निभा रहे हैं संजय दत्त?

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धुरंधर मूवी में संजय दत्त

धुरंधर मूवी के विलेन संजय दत्त, फिल्म में एक ऐसा कैरेक्टर निभा रहे हैं, जिसे पाकिस्तान के एनकाउंटर स्पेशलिस्ट चौधरी असलम खान से प्रेरित बताया जा रहा है.फिल्म के ट्रेलर पर पाकिस्तान में भी विरोध होने की बात सामने आई है, क्योंकि असलम खान एक पुलिस अधिकारी थे और फिल्म में उनको लेकर अपमानजनक डाॅयलाॅग होने की बात कही जा रही है. चौधरी असलम खान कराची पुलिस के अधिकारी थे. जिनके बारे में यह कहा जाता है कि उन्होंने अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया था और कइयों का एनकाउंटर भी किया था. असलम खान की मौत एक बम विस्फोट के दौरान हुई थी और उसके बारे में यह कहा जाता है कि वह आईएसआई का एजेंट था.

RAW vs ISI का क्या है सच?

RAW और ISI भारत और पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां हैं. भारत और पाकिस्तान के संबंध जिस तरह के रहे हैं उसकी वजह से दोनों ही खुफिया एजेंसियां अकसर आमने-सामने आ जाती हैं. भारत के विभाजन के बाद पाकिस्तान का निर्माण हुआ, निर्माण के समय से ही पाकिस्तान कश्मीर पर कुदृष्टि बनाए हुए और इस कोशिश में रहता है कि किसी तरह कश्मीर को भारत से अलग कर दें. इसी कोशिश की वजह से पाकिस्तान, भारत के खिलाफ युद्ध लड़ता है, आतंकवादी गतिविधि को अंजाम देता है और जासूसी करवाता है. भारत की सुरक्षा को लेकर राॅ हमेशा सक्रिया रहता है इसलिए उसका सामना आईएसआई के एजेंटों से होता रहता है.

क्या धुरंधर मूवी सच्ची घटनाओं से प्रेरित होकर बनाई गई है?

हां, 1999 के विमान हाईजैक और 2001 के संसद पर हमले से प्रेरित होकर यह फिल्म बनाई गई है.

क्या धुरंधर पाकिस्तान में बेस्ड मूवी है?

हां, धुरंधर मूवी को पाकिस्तान में ही दिखाया गया है, क्योंकि हीरो पाकिस्तान में ही अपने गुप्त ऑपरेशन चलाता है.

कौन हैं मेजर मोहित शर्मा?

मेजर मोहित शर्मा भारतीय सेना के अधिकारी थे, जिन्होंने कई गुप्त ऑपरेशन चलाए और 2009 में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शहीद हुए.

पाकिस्तानी बाॅलीवुड को क्या कहा जाता है?

पाकिस्तान में बाॅलीवुड को लाॅलीवुड कहा जाता है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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