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Cyclone Ditwah : कैसे होता है किसी चक्रवाती तूफान का लैंडफॉल? जानिए पूरी बात

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Cyclone Ditwah : कैसे होता है किसी चक्रवाती तूफान का लैंडफॉल? जानिए पूरी बात
चक्रवाती तूफान का लैंडफॉल

Cyclone Ditwah : चक्रवाती तूफान दित्वा के प्रभाव से तमिलनाडु और पुडुचेरी में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो रही है. जगह-जगह पर जलजमाव की स्थिति है, मौसम विभाग ने इन इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है. हालांकि अभी दित्वा तूफान तट से टकराया नहीं है, लेकिन वह तेजी से भारत के पूर्वी तटीय इलाकों की ओर बढ़ रहा है.

मौसम विभाग की ओर से जो जानकारी अभी तक मिली है, उसके अनुसार संभव है कि दित्वा तूफान तट से ना भी टकराए और उसके समानांतर चलते हुए गुजर जाए. किसी भी चक्रवाती तूफान के लैंडफॉल यानी जमीन से टकराने की प्रक्रिया को बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि उसी वक्त तूफान का प्रभाव सबसे अधिक दिखता है और तबाही होती है.

किसी चक्रवाती तूफान का लैंडफॉल कैसे होता है?

Process-Of-Landfall
लैंडफॉल की प्रक्रिया

लैंडफॉल उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें एक चक्रवाती तूफान या साइक्लोन का केंद्र जिसे आंख भी कहा जाता है, जमीन की सतह से टकराता है. हालांकि जब कोई चक्रवाती तूफान जमीन की ओर बढ़ता है तो उसके केंद्र से पहले उसकी बाहरी दीवारें जिसे आइवॉल कहते हैं, वह सतह से टकराती हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि आइवॉल के टकराने को लैंडफॉल नहीं कहा जाता है,जब चक्रवाती तूफान की आंख जमीन से टकराती है, तो उसे लैंडफॉल कहा जाता है.

चक्रवाती तूफान के लैंडफॉल का क्या होता है परिणाम?

कोई भी चक्रवाती तूफान जब समुद्र में बनता है तो वह गर्म पानी से ऊर्जा प्राप्त करता रहता है, इसलिए उसकी तीव्रता बहुत अधिक होती है. जैसे-जैसे वह जमीन की सतह की ओर बढ़ता है उसके प्रभाव से तटीय इलाकों में तेज बारिश होती है और हवाएं भी बहुत तेज चलती हैं. चक्रवाती तूफान का सबसे भयंकर स्वरूप तब नजर आता है जब उसका केंद्र सतह से टकराता है. हालांकि चक्रवाती तूफान की दीवारों के सतह से टकराने पर भी बारिश बहुत होती है और तेज हवाएं भी चलती है.

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मौसम विभाग, रांची के वैज्ञानिक अभिषेक आनंद बताते हैं कि चक्रवाती तूफान का लैंडफॉल तब माना जाता है, जब उसका केंद्र जिसे आंख कहा जाता है, वह जमीन की सतह से टकराए. किसी भी चक्रवाती तूफान का सबसे भयंकर रूप उसी वक्त दिखता है. सतह से टकराने के बाद चक्रवाती तूफान कमजोर पड़ने लगता है. इसके पीछे वजह यह है कि जमीन पर आने के बाद तूफान को गर्म पानी की ऊर्जा नहीं मिलती, इसलिए वह धीरे-धीरे कमजोर हो जाता है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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