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Home Prabhat Khabar Special क्या बुधवार सुबह अमेरिका कर सकता है परमाणु हथियारों के जरिए ईरान की प्राचीन सभ्यता का अंत?

क्या बुधवार सुबह अमेरिका कर सकता है परमाणु हथियारों के जरिए ईरान की प्राचीन सभ्यता का अंत?

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क्या बुधवार सुबह अमेरिका कर सकता है परमाणु हथियारों के जरिए ईरान की प्राचीन सभ्यता का अंत?
ट्रंप ने ईरान को दी सभ्यता समाप्त करने की धमकी

US-Iran War : ईरान के लोगों के लिए आज की रात कयामत की रात साबित हो सकती है. हालांकि ईरान भी किसी भी सूरत में अमेरिका के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं है और वो जवाबी कार्रवाई की बात कर चुका है. अगर दोनों देश इसी तरह आमने सामने रहे, तो भारतीय समयानुसार सुबह 5:30 बजे के बाद विश्व में कुछ विनाशकारी हो सकता है. इसकी तीव्रता कितनी होगी, यह तो अमेरिका के राष्ट्रपति ही तय कर सकते हैं. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका कूटनीति की ओर जाता है या फिर किसी बड़े युद्ध की ओर.

क्या ट्रंप की चेतावनी परमाणु हथियारों के प्रयोग की ओर इशारा कर रही हैं?

इसमें कोई दो राय नहीं है कि ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी है, लेकिन इस चेतावनी को मनोवैज्ञानिक दबाव के रूप में ज्यादा देखा जा रहा है. परमाणु हथियारों का प्रयोग बहुत बड़ा कदम होगा, जिसके लिए शायद अमेरिका तैयार ना हो. वैसे भी व्हाइट हाउस ने यह स्पष्ट किया है कि जेडी वेंस के टूल्स का मतलब परमाणु हथियार नहीं बल्कि कई और तरीके हैं. ट्रंप अपने सोशल मीडिया पोस्ट में एक ओर जहां चेतावनी दे रहे हैं, वहीं बातचीत के अवसर को भी जिंदा रखने की कोशिश कर रहे हैं.

परमाणु हथियारों का प्रयोग हुआ, तो पूरी दुनिया अमेरिका के खिलाफ होगी

अमेरिका इस बात को अच्छी तरह से जानता है कि अगर उसने परमाणु हथियारों का प्रयोग किया, तो उसे पूरी दुनिया का विरोध झेलना होगा. इसी वजह से अमेरिका परमाणु हथियार होते हुए भी उनका प्रयोग करने में हिचकेगा. रूस और चीन जैसे देश भी उसके खिलाफ खड़े हो सकते हैं, जो युद्ध को क्षेत्रीय तनाव से बढ़ाकर वैश्विक कर देंगे.ईरान पर परमाणु हमला हुआ, तो लाखों लोगों की मौत हो सकती है और पूरा मिडिल ईस्ट रेडिएशन के दायरे में आ जाएगा, जिससे मानवता पर घोर संकट उत्पन्न हो जाएगा. निश्चित तौर पर अमेरिका इस स्थिति के लिए तैयार नहीं होगा, क्योंकि ट्रंप की इस नीति का विरोध उनके अपने देश में भी होगा.

एनर्जी वार की तरफ जा रहा है विश्व

ईरान ने ट्रंप की धमकी के बाद कहा है कि इंशाल्लाह कल जो होगा, उसमें अमेरिका और उसके सहयोगियों को ईरान की प्राचीन सभ्यता की ताकत दिखेगी. कहने का आशय यह है कि ईरान भी पूरी तैयारी में है और वे अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ एनर्जी वार करने के लिए तैयार हैं. ईरान होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलेगा और खार्ग द्वीप पर जो अमेरिकी हमले हो रहे हैं, उनके एवज में अमेरिका और उसके दोस्तों को तेल संकट झेलने पर मजबूर करेगा. यह तमाम बयान यह साबित करते हैं कि मिडिल ईस्ट में अगले 12 घंटे बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं, जो पूरी दुनिया को एक नई दिशा दे सकते हैं.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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