[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Prabhat Khabar Special रिटायरमेंट से पहले बुलडोजर एक्शन पर डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनाया फैसला, ‘पत्नी, पति की संपत्ति नहीं’ के फैसले में भी थे शामिल

रिटायरमेंट से पहले बुलडोजर एक्शन पर डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनाया फैसला, ‘पत्नी, पति की संपत्ति नहीं’ के फैसले में भी थे शामिल

0
रिटायरमेंट से पहले बुलडोजर एक्शन पर डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनाया फैसला, ‘पत्नी, पति की संपत्ति नहीं’ के फैसले में भी थे शामिल
भारत के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़

Chief Justice DY Chandrachud :  जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भारत के 50वें मुख्य न्यायाधीश हैं और उन्होंने अपने कार्यकाल में कई अहम फैसले सुनाए हैं, यही वजह है कि आमलोग उनके रिटायरमेंट प्लान के बारे में जानना चाहते हैं. क्या वे सार्वजिनक जीवन में रहेंगे हैं या फिर वे निहायत ही निजी जीवन जीएंगे? हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बात करते हुए डीवाई चंद्रचूड़ ने बताया है कि एक चीफ जस्टिस को जनता हमेशा उसी रूप में देखती है, इसलिए उसे रिटायमेंट के बाद भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए. 

डीवाई चंद्रचूड़ ने पूरा किया दो वर्ष से अधिक का कार्यकाल

Whatsapp Image 2024 11 10 At 4.24.27 Pm
रिटायरमेंट से पहले बुलडोजर एक्शन पर डीवाई चंद्रचूड़ ने सुनाया फैसला, ‘पत्नी, पति की संपत्ति नहीं’ के फैसले में भी थे शामिल 4

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के इतिहास में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 14वें ऐसे चीफ जस्टिस हैं जिन्होंने दो साल से अधिक का कार्यकाल पूरा किया. भारत के पहले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मंडकोलाथुर पतंजलि शास्त्री पहले ऐसे जस्टिस थे, जिन्होंने दो साल 139 दिन का कार्यकाल पूरा किया था. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ 2016 सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे और और 9 नवंबर 2022 में वे मुख्य न्यायाधीश बने थे. 

Also Read :पिचके गाल, शरीर पर सिर्फ चमड़ी वायरल हुई सुनीता विलियम्स की ये तस्वीर, दोगुना खा रहीं खाना NASA चिंतित

विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर पढ़ने के लिए क्लिक करें

क्या है बाॅलीवुड और गैंगस्टर का कनेक्शन, सलमान के बाद शाहरुख खान को क्यों मिली धमकी

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के पांच बड़े फैसले

Copy Of Add A Heading 2024 11 10T161425.524
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का फेयरवेल

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल पर नजर डालेंगे तो उन्होंने कई अहम फैसले चीफ जस्टिस के पद पर रहते हुए सुनाए, जिनका व्यापक प्रभाव पड़ा. अपने फेयरवेल पर उन्होंने भाषण दिया और यह भी कहा कि जो लोग उन्हें ट्रोल करते थे वो अब बेरोजगार हो जाएंगे.

1. आर्टिकल 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा : चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय बेंच ने यह फैसला सुनाया कि सरकार द्वारा आर्टिकल 370 को निरस्त करना सही था, क्योंकि जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने का प्रावधान संविधान में एक अस्थायी व्यवस्था थी.

2. चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक बताने का फैसला : जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने पांच सदस्यीय बेंच की अध्यक्षता करते हुए चुनावी बांड योजना को असंवैधानिक बताया और यह कहा इस योजना को लागू करने के लिए संविधान में जो संशोधन किए गए हैं वो असंवैधानिक हैं, इसलिए बैंक तत्काल इस बांड को बेचना बंद करें. चुनावी बांड को बैंक से खरीदा जा सकता था, जिसके जरिए राजनीतिक दलों को फंडिंग की जाती थी. 

3. बुलडोजर मामला : सुप्रीम कोर्ट ने बुलडोजर एक्शन के खिलाफ अपना निर्णय सुनाया और कहा कि कोई व्यक्ति अगर दोषी है, तो  बुलडोजर एक्शन उचित नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बुलडोजर एक्शन कानून के शासन में उचित नहीं है. सीजेआई के रूप में जस्टिस चंद्रचूड़ ने इसी मसले पर अपना अंतिम फैसला सुनाया और बुलडोजर एक्शन को मौलिक अधिकारों के खिलाफ बताया. इसके अलावा में कई अन्य महत्वपूर्ण मामलों के निर्णय में भी जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ शामिल रहे, हालांकि वे उस वक्त चीफ जस्टिस नहीं थे. जैसे निजता का अधिकार , समलैंगिकता को अपराधमुक्त करना, व्यभिचार को अपराध से मुक्त करना, अयोध्या विवाद और सबरीमाला विवाद जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे.

चीफ जस्टिस रिटायरमेंट के बाद क्या नहीं कर सकते?

संविधान के आर्टिकल 124 में सुप्रीम कोर्ट की आवश्यता और गठन पर फोकस किया गया है. इस आर्टिकल की धारा 124(7) में यह बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस और अन्य जस्टिस कार्यकाल समाप्त होने यानी रिटायर होने के बाद भारत के किसी भी कोर्ट में वकालत नहीं कर पाएंगे. इस व्यवस्था का उद्देश्य जजों की प्रतिष्ठा को बरकरार रखना है. हालांकि जज सार्वजनिक सेवा कर सकते हैं और कई जज  राज्यपाल या सरकारी समितियों के सदस्य के रूप में काम करते हैं. 

Also Read : पैसे के लिए शारदा सिन्हा ने नहीं किया कभी समझौता, चाहे सामने गुलशन कुमार हों या अनुराग कश्यप

Previous article फाइल- 10- चौसा में अक्षय नवमी की रही धूम, महिलाओं ने की आंवला वृक्ष की पूजा
Next article Alia Bhatt New Movie: नाग अश्विन की फिल्म में नजर आएंगी आलिया भट्ट, बॉक्स ऑफिस पर मचेगा बवाल, रिपोर्ट 
Avatar Of Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel