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Home Prabhat Khabar Special Chandra Grahan : क्या होता है चंद्रग्रहण, किसे कहते हैं ब्लड मून?

Chandra Grahan : क्या होता है चंद्रग्रहण, किसे कहते हैं ब्लड मून?

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Chandra Grahan : क्या होता है चंद्रग्रहण, किसे कहते हैं ब्लड मून?
चंद्रग्रहण

Chandra Grahan Time 2025 : साल के अंतिम चंद्रग्रहण सात सितंबर को था. भारतीय समयानुसार रात 9 बजकर 57 मिनट पर चंद्रग्रहण की शुरुआत हुई . यह चंद्रग्रहण इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि पितृपक्ष की शुरुआत चंद्रग्रहण से हुई. वर्ष 1903 में ऐसी घटना हुई थी और ज्योतिषशास्त्र के अनुसार अब 122 साल बाद ही पितृपक्ष के मौके पर चंद्रग्रहण लगेगा. यह एक अद्‌भुत खगोलीय घटना है, हालांकि हिंदू मान्यताओं के अनुसार चंद्रग्रहण को शुभ नहीं माना जाता है. आइए समझते हैं कि चंद्रग्रहण क्या है और यह क्यों इतना खास है.

1. चंद्रग्रहण क्या है और इसकी वजह क्या है?

हम सभी इस बात से वाकिफ हैं कि पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है. जब कभी सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा (alignment) में आ जाते हैं और पृथ्वी बीच में होती है, तब उसकी छाया चंद्रमा पर पड़ती है. इसे ही चंद्रग्रहण कहा जाता है. यह एक अद्‌भुत खगोलीय घटना है.जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच में होती है, तो सूर्य का प्रकाश सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता है, यदि चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाए तो यह पूर्ण चंद्रग्रहण होता है और अगर चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में नहीं होता है, तो उसे आंशिक चंद्रग्रहण कहते हैं.

2. चंद्रग्रहण को खुली आंखों से देखना कितना सुरक्षित है?

खगोल शास्त्र के अनुसार चंद्रग्रहण को खुली आंखों से देखना कहीं से भी असुरक्षित नहीं है. चंद्रग्रहण का कोई गलत प्रभाव ना तो शरीर पर और ना ही आंखों पर पड़ता है. चंद्रग्रहण एक खगोलीय घटना है, इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं होता है. यह आसमान का अद्‌भुत नजारा है, इसे विनाशकारी मानना गलत है.

3. ब्लड मून किसे कहते हैं

ब्लड मून किसे कहते हैं, ये समझने के लिए आप यह समझें कि सूर्य का प्रकाश सफेद होता, लेकिन इसमें कई रंग मिले होते हैं, बैंगनी, नीला, हरा पीला, नारंगी, लाल. जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरता है, तो वायुमंडल में मौजूद गैस के अणु, धूल, जलकण आदि प्रकाश को बिखेरते हैं. छोटी तरंग वाली नीली रोशनी इस अणुओं से टकराकर हर दिशा में बिखर जाती हैं. वहीं लंबी तरंगें (लाल, नारंगी) आसानी से टकराती नहीं हैं, वे सीधी आगे निकल जाती हैं. जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो चंद्रमा तक सीधी धूप नहीं पहुंच पाती. परंतु सूर्य की कुछ रोशनी पृथ्वी के वायुमंडल से होकर मुड़कर (refract होकर) चंद्रमा तक जाती है. उस समय भी नीली रोशनी बिखर जाती है और सिर्फ लाल-नारंगी रोशनी ही चंद्रमा तक पहुंचती है. इसी वजह से चंद्रमा लाल दिखाई देता है. इसको ही ब्लड मून कहते हैं.

4. भारत में ब्लड मून (पूर्ण चंद्रग्रहण) का समय

भारत में चंद्रग्रहण की शुरुआत रात 9: 57 मिनट पर हो गई है. यह चंद्रग्रहण 12 बजकर 22 मिनट पर चंद्रग्रहण पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. हालांकि रात 1 बजकर 26 मिनट तक इसका प्रभाव रहेगा.

8:58 PM – उपछाया (Penumbral) ग्रहण शुरू

9:57 PM – आंशिक (Partial) ग्रहण शुरू

11:00 PM – पूर्ण (Total) ग्रहण शुरू – ब्लड मून दिखेगा

11:41 PM – ग्रहण का चरम

12:22 AM – पूर्ण ग्रहण समाप्त

1:26 AM – आंशिक ग्रहण समाप्त

2:25 AM – उपछाया समाप्त

5. ब्लड मून बताएगा धरती की सेहत

खगोलशास्त्रियों का कहना है कि ब्लड मून का रंग वायुमंडल की स्थिति और उसकी शुद्धता के बारे में हमें बताएगा. अगर चांद हल्का लाल या तांबे जैसा दिखेगा, तो इसक अर्थ है कि हवा शुद्ध है. अगर चंद्रमा धुंधला और गाढ़ा लाल दिखता है तो इसका अर्थ है कि वातावरण प्रदूषित है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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