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Home Prabhat Khabar Special लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के बाद भी BCCI बना हुआ है प्राइवेट संस्था, अब CIC ने क्यों कहा RTI के तहत नहीं आता?

लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के बाद भी BCCI बना हुआ है प्राइवेट संस्था, अब CIC ने क्यों कहा RTI के तहत नहीं आता?

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लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के बाद भी BCCI बना हुआ है प्राइवेट संस्था, अब CIC ने क्यों  कहा RTI के तहत नहीं आता?
मिथुन मनहास और राजीव शुक्ला

BCCI : क्रिकेट एक ऐसा खेल है, जो पूरे देश को जोड़ता है. क्रिकेट के नाम पर भारत के लोग जाति-धर्म से ऊपर उठकर सोचते हैं. भारत में क्रिकेट के पूरे सिस्टम को बीसीसीआई संचालित करता है जिसे
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India) यानी बीसीसीआई कहा जाता है. बीसीसीआई के बारे में सूचना आयोग ने जो टिप्पणी की है, उसके बाद इसके पूरे सिस्टम को समझना बहुत जरूरी है.

BCCI कैसे काम करता है?

बीसीसीआई एक निजी संस्था है, जिसका गठन 1928 में क्रिकेट के प्रशासकों ने किया था. बीसीसीआई की स्थापना 1 दिसंबर 1928 को मद्रास में मद्रास के अधिनियम XXI, 1860 के तहत की गई थी. बाद में इसे तमिलनाडु सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1975 के तहत रजिस्टर्ड किया गया.यह राज्य क्रिकेट संघों का एक संघ है जो अपने प्रतिनिधियों का चयन करता है जो बीसीसीआई अध्यक्ष का चुनाव करते हैं. बीसीसीआई मुख्यत: तीन तरह के काम करता है-

  1. क्रिकेट का प्रशासन : भारत में क्रिकेट के सभी बड़े फैसले लेता है, जैसे टीम चयन के नियम, घरेलू टूर्नामेंट (रणजी ट्रॉफी, विजय हजारे ट्रॉफी) और अंतरराष्ट्रीय मैचों का आयोजन.हालांकि टीम चयन सीधे BCCI नहीं, बल्कि उसकी चयन समिति करती है.
  2. व्यावसायिक मॉडल : बीसीसीआई दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड है. इसकी कमाई के मुख्य स्रोत हैं-मीडिया और ब्रॉडकास्टिंग राइट्स,स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री. बीसीसीआई इस व्यावसायिक मॉडल को पूरी तरह कंट्रोल करता है.
  3. संरचना का निर्माण : बीसीसीआई एक संघीय ढांचे पर काम करता है, जिसमें राज्य क्रिकेट संघ के सदस्य होते हैं.अध्यक्ष,सचिव और कोषाध्यक्ष ये सभी पद आंतरिक चुनाव से तय होते हैं. इस चयन प्रक्रिया में सरकार की कोई भूमिका नहीं होती है.

कौन सी संस्थाएं RTI के तहत आती हैं?

RTI कानून के तहत वैसी संस्थाएं आती हैं, जो सरकार से पैसा पाती हैं या फिर जो सरकार द्वारा स्थापित होती है. ऐसी संस्थाओं को पब्लिक अथॉरिटी माना जाता है.संवैधानिक संस्थाएं भी आरटीआई के तहत आती हैं.

BCCI क्यों नहीं आता है RTI के तहत

बीसीसीआई एक ऐसी संस्था है, जिसका गठन ना तो सरकार ने किया है और ना ही यह सरकार से पैसा लेती है. यह अपने काम से कमाई करती है, जिसमें ब्रॉडकास्टिंग राइट्स,स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री शामिल है.

केंद्रीय सूचना आयोग ने BCCI के बारे में क्या कहा है?

केंद्रीय सूचना आयोग ने कहा कि बीसीसीआई किसी कानून या संसद द्वारा नहीं बनाई गई है. इसे निजी लोगों ने बनाया और बाद में रजिस्टर कराया है, इसलिए इसके कामकाज पर सरकार का नियंत्रण नहीं है. बीसीसीआई को सरकार की ओर से जो सहायता मिलती है, वह सुरक्षा और स्टेडियम की है. इस सुविधा को ऐसी सुविधा नहीं माना जा सकता है कि जिसके बिना संस्था चल नहीं सकती. सूचना आयोग ने जी टेलीफिल्म्स लिमिटेड बनाम भारत संघ का हवाला देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था कि बीसीसीआई स्टेट नहीं है क्योंकि यह सरकार द्वारा नियंत्रित या वित्तपोषित नहीं है.

लोढ़ा कमेटी ने बीसीसीआई को आरटीआई के तहत लाने की सिफारिश की थी

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 2015 में लोढ़ा कमेटी का गठन किया गया था. इस कमेटी का उद्देश्य बीसीसीआई में व्यापक सुधार लाना और 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग घोटाले की जांच के लिए किया गया था. जस्टिस आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली इस कमेटी ने बीसीसीआई के कामकाज, पारदर्शिता और ढांचे में भारी बदलाव की सिफारिशें की थीं. कमेटी ने यह भी कहा था कि इसे आरटीआई के तहत लाया जाए. लॉ कमीशन ऑफ इंडिया ने 2018 में यह कहा था कि बीसीसीआई स्टेट की तरह काम करता है, इसलिए इसे आरटीआई के तहत लाया जाए. ध्यान देने वाली बात यह है कि अबतक इनकी सिफारिशों को लागू नहीं किया गया है इसलिए बीसीसीआई अबतक निजी संस्था बना हुआ है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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