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Home Prabhat Khabar Special कौन है निकिता सिंघानिया, जिसका पति नहीं चाहता उसकी पत्नी उसके शव के करीब भी आए, सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोल

कौन है निकिता सिंघानिया, जिसका पति नहीं चाहता उसकी पत्नी उसके शव के करीब भी आए, सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोल

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कौन है निकिता सिंघानिया, जिसका पति नहीं चाहता उसकी पत्नी उसके शव के करीब भी आए, सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोल
#MenToo

Atul Subhash Wife Nikita Singhania : निकिता सिंघानिया सोशल मीडिया पर यह नाम मंगलवार देर रात से ट्रेंड कर रहा है और अबतक #Nikita Singhania के नाम से 87.5 हजार एक्सपोस्ट हो चुके हैं. निकिता सिंघानिया एक साॅफ्टवेयर इंजीनियर हैं और बेंगलुरू की एक मल्टी नेशनल कंपनी Accenture में काम करती हैं.

निकिता सिंघानिया का नाम एक्स और LinkedIn पर ट्रेंडिंग

निकिता सिंघानिया का नाम उस वक्त ट्रेंड करने लगा जब उसके पति अतुल सुभाष का एक वीडियो सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने यह बात कही कि वे अपनी पत्नी की प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या कर रहे हैं. 34 वर्षीय अतुल का आरोप है कि उनकी पत्नी निकिता ना सिर्फ उन्हें मानसिक रूप से परेशान करती है, बल्कि अब वह उनके पैसे पर नजर गड़ाकर बैठी है और वह उनसे तीन करोड़ गुजारा भत्ते की मांग कर रही है.

निकिता सिंघानिया और अतुल Shadi.com के जरिए मिले

बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले अतुल सुभाष और उनकी पत्नी निकिता की शादी Shadi.com के जरिए 2019 में हुई थी. 2022 में निकिता ने अपने पत्नी पर यौन प्रताड़ना और दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज किया. इसके अलावा निकिता सिंघानिया ने अपने पति पर कुल नौ केस किए, जिसमें हत्या का मामला भी शामिल है.निकिता सिंघानिया का व्यवहार अपने सास-ससुर के प्रति भी अच्छा नहीं था. वह उनके साथ रहना नहीं चाहती थी और शादी के महज दो दिन बाद ही वह अपने पति के साथ बेंगलुरू चली गई थी.

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सास-ससुर के साथ भी निकिता का व्यवहार अच्छा नहीं था

अतुल सुभाष की मौत के बाद उसके दुखी पिता ने कहा कि हमारा तो घर बर्बाद हो गया. मेरा बेटा चला गया. मेरी पत्नी कुछ समय पहले बेंगलुरू गई थी लेकिन वहां का माहौल इतना खराब था कि वह वापस आ गई. तनाव से उसे शुगर की बीमारी हो गई. निकिता सिंघानिया का एक भाई है और पिता की मौत हो चुकी है, जिनकी मौत के लिए निकिता ने अपने पति को जिम्मेदार ठहराया था. अतुल ने अपनी मौत के लिए जिन्हें जिम्मेदार ठहराया है, उनमें उसका साला और सास भी शामिल हैं. अतुल सुभाष के परिजनों ने प्रभात खबर को बताया कि निकिता अपने चार साल के बच्चे को अपने पति से मिलने नहीं देती थी. अतुल के माता-पिता ने आज तक अपने पोते को नहीं देखा है. अतुल सुभाष के पिता का नाम पवन मोदी है. उसके परिजनों ने यह नहीं बताया कि उनकी शादी कैसे हुई थी.


निकिता सिंघानिया को सोशल मीडिया में किया जा रहा है ट्रोल

निकिता सिंघानिया को सोशल मीडिया में बुरी तरह ट्रोल किया जा रहा है. लोग Accenture कंपनी से यह मांग कर रहे हैं कि उसे नौकरी से निकाला जाए. साथ ही दहेज कानूनों के प्रति भी लोगों का गुस्सा नजर आ रहा है. लोग अतुल के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर रहे हैं और उनके लिए न्याय की गुहार भी लगा रहे हैं. अतुल ने अपने कमरे में मैसेज लगा रहा रखा था- Justice is Due. सोशल मीडिया में इस तरह के मैसेज भी वायरल हैं कि दहेज तो कानूनन जुर्म है लेकिन गलत तरीके से एलिमनी मांगना वैध है.

अतुल सुभाष सिस्टम से थे नाराज

पत्नी से परेशान अतुल सुभाष ने देश के कानूनों के प्रति भी अपनी निराशा व्यक्त की और कहा कि यहां सिर्फ महिलाओं के लिए कानून है, हमारे जैसे लोगों की कोई सुनने वाला नहीं है. मुझपर झूठा केस दर्ज किया गया है. लेकिन मैं अपनी पत्नी को पैसा देने की बजाय मरना पसंद करूंगा. मैं कमाऊंगा और वह मुझे प्रताड़ित करके मुझसे पैसे लेगी. यह अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा. अपने एक घंटे के वीडियो में अतुल ने कई तरह की बातें की जिसमें उनका दर्द नजर आया.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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