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Home Prabhat Khabar Special क्या कनाडा में बजेगा भारत का डंका, पीएम पद की दौड़ में अनिता आनंद?

क्या कनाडा में बजेगा भारत का डंका, पीएम पद की दौड़ में अनिता आनंद?

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क्या कनाडा में बजेगा भारत का डंका, पीएम पद की दौड़ में अनिता आनंद?
अनिता आनंद

Anita Anand : ‘धन्यवाद प्रधानमंत्री जी. आपके नेतृत्व और देश के प्रति आपके समर्पण के लिए धन्यवाद.आपके साथ कनाडाई लोगों की सेवा करने का मौका मिला,यह मेरे लिए सम्मान और सौभाग्य की बात है.’ यह पंक्तियां हैं कनाडा की एकमात्र हिंदू मंत्री अनिता आनंद की, जिन्हें उन्होंने एक्स पर तब पोस्ट किया है जब कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने यह घोषणा कर दी कि वे आने वाले महीनों में वे पद छोड़ देंगे. जस्टिन ट्रूडो अपना इस्तीफा तब देंगे जब उनकी पार्टी नया नेता चुन लेगी. 

ट्रूडो की जगह लेने वालों की सूची में क्रिस्टिया फ्रीलैंड मार्क कार्नी भी शामिल

जस्टिन ट्रूडो की इस घोषणा के साथ कनाडा की राजनीति में हलचल गई है. ट्रूडो की जगह लेने वालों की सूची में क्रिस्टिया फ्रीलैंड,मार्क कार्नी, फ्रांकोइस-फिलिप शैम्पेन, मेलानी जोली और अनिता आनंद का नाम शामिल है. क्रिस्टिया फ्रीलैंड ट्रूडो मंत्रिमंडल में उपप्रधानमंत्री रही हैं और उनके साथ विवाद के बाद इस्तीफा दे दिया था. बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर मार्क कार्नी को भी इस दौड़ में शीर्ष पर माना जा रहा है. भारत में रहने वाला हर व्यक्ति इस सूची के पांचवें नाम पर ठिठक जाता है और यह जानने की कोशिश करता है कि कनाडा के पीएम की रेस में आने वाली अनिता आनंद कौन हैं?

कैसे हैं कनाडा के राजनीतिक हालात

कनाडा के राजनीतिक हालात पर नजर डालें, तो हमें यह पता चलता है कि पीएम जस्टिन ट्रूडो की लोकप्रियता काफी कम हो गई है और भारत के साथ उनके लगातार चल रहे विवाद का असर भी उनकी लोकप्रियता पर पड़ा है. उनके कार्यकाल में कनाडा में आर्थिक विकास धीमा रहा और बेरोजगारी भी काफी बढ़ी है. महंगाई तो बढ़ी, लेकिन वेतन उस अनुपात में नहीं बढ़े, जिसकी वजह से सर्वे बता रहे हैं कि अगले चुनाव में ट्रूडो की हार तय है. 

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कनाडा में अक्टूबर से पहले चुनाव होना है, लेकिन उससे पहले मार्च के अंत में संसद का सत्र है, जिसमें बजट पेश किया जाएगा, लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि लिबरल पार्टी अल्पमत में है. ट्रूडो के इस्तीफे से वे 338 सदस्यीय संसद में 153 ही रह जाएंगे, इन हालात में विपक्ष हावी हो सकता है और सरकार पर जल्दी चुनाव कराने का दबाव बना सकता है. इन हालात में लिबरल पार्टी एक  ऐसे नेता की तलाश में है, जो अक्टूबर के चुनाव तक पार्टी को सत्ता में बनाए रखे. कुछ नाम जो रेस में हैं, उनमें अनिता आनंद शीर्ष पर तो नहीं है, लेकिन एक महत्वकांक्षी नेता है, यही वजह है कि उनकी चर्चा जोरों पर है.

कौन है अनिता आनंद और क्या है उनका भारत कनेक्शन

Anita Anand
अनिता आनंद के माता-पिता

अनीता आनंद एक अति महत्वकांक्षी नेता मानी जाती है. यही वजह है कि उन्होंने रक्षा मंत्री जैसे पदों पर भी काम किया है, लेकिन उन्हें सजा के रूप में यहां से हटाकर ट्रेजरी बोर्ड का अध्यक्ष बनाया गया था. फिलहाल अनिता आनंद परिवहन मंत्री हैं. उन्होंने 2019 में पहली बार चुनाव जीता और संसद पहुंचीं.कोविड के दौरान भी उनकी भूमिका चर्चा में रही थी. 

अनिता आनंद के माता-पिता दोनों भारतीय थे. उनकी मां सरोज डी राम एनेस्थेसियोलॉजिस्ट थीं, जबकि पिता एसवी आनंद सर्जन थे. पिता का संबंध तमिलनाडु से और मां का संबंध पंजाब से था. अनिता की दो बहनें जो कनाडा में ही रहती हैं. अनिता आनंद के माता-पिता नाइजीरिया से कनाडा आए थे. अनीता इंदिरा आनंद का जन्म केंटविले, नोवा स्कोटिया में 1967 में हुआ था. उन्होंने क्वीन्स विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री हासिल की और कानून की पढ़ाई करने के लिए ऑक्सफोर्ड के वाधम कॉलेज चली गईं. नोवा स्कोटिया में ही उनकी मुलाकात जॉन से हुई और दोनों ने शादी की. इनके चार बच्चे हैं. कानून की पढ़ाई करने वाली अनिता आनंद अब राजनीति में हैं और संभावना जताई जा रही है कि वह कनाडा की पीएम बन सकती हैं. अगर  ऐसा संभव हुआ तो अनिता आनंद के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी, साथ ही लिबरल पार्टी की छवि सुधारने की चुनौती भी उनके सामने होगी. 

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क्या कनाडा में चुनाव की तिथियां निर्धारित हैं?

हां कनाडा में संघीय और राज्यों के चुनाव की तिथियां निर्धारित हैं.

कनाडा का प्रधानमंत्री कितने साल के लिए चुना जाता है?

कनाडा का प्रधानमंत्री चार साल के लिए चुना जाता है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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