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Home Prabhat Khabar Special Al-Aqsa Masjid: अल-अक्सा मस्जिद का क्या है विवाद, कैसे जुड़ी है मुस्लिम, यहूदी और ईसाई धर्मों की आस्था

Al-Aqsa Masjid: अल-अक्सा मस्जिद का क्या है विवाद, कैसे जुड़ी है मुस्लिम, यहूदी और ईसाई धर्मों की आस्था

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Al-Aqsa Masjid: अल-अक्सा मस्जिद का क्या है विवाद, कैसे जुड़ी है मुस्लिम, यहूदी और ईसाई धर्मों की आस्था
Al-Aqsa Masjid

Al-Aqsa Masjid: अल-अक्सा मस्जिद (Al-Aqsa Mosque) इजरायल की राजधानी येरुशलम में स्थित है. यह मस्जिद मक्का-मदीना के बाद इस्लाम का तीसरा सबसे बड़ा पवित्र स्थल माना जाता है. इस्लाम में इसे अल-हरम-अल-शरीफ कहा जाता है. इसे 7वीं शताब्दी में पैगंबर मोहम्मद के मित्र खलीफा इल-अब- खट्टाब ने बनवाया था. इन्हें उमय्यद खलीफा भी कहा जाता है. यह भी मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद ने इसी जगह से जन्नत का रास्ता तय किया था. इसीलिए फिलिस्तीन ही नहीं दुनिया भर के मुसलमानों की धार्मिक आस्था का केंद्र यह मस्जिद है. कई बार आए भूकंप से मस्जिद को नुकसान पहुंचा, लेकिन इसका पुनर्निर्माण भी जारी रहा.

निर्माण को लेकर अलग-अलग मत

अल-अक्सा मस्जिद को लेकर मुसलमानों, ईसाइयों और यहूदियों के अलग-अलग मत हैं. यहूदियों का कहना है कि 957 ईसा पूर्व किंग सोलोमन ने येरुशलम में पहला यहूदी मंदिर बनाया था. इतिहासकार बताते हैं कि बेबिलोनियन ने इस यहूदी मंदिर को तोड़ दिया. इसके बाद 516 ईसा पूर्व यहां दूसरे यहूदी मंदिर का निर्माण किया गया. ये मंदिर लगभग 600 साल तक सुरक्षित रहा. इसके बाद सन् 70 में यहां रोमन्स ने हमला बोल दिया. इस मंदिर को तोड़ा गया. लेकिन एक दीवार यहां आज भी मौजूद है. इसे ही यहूदी वेस्टर्न वॉल या वेलिंग वॉल कहते हैं. यहां यहूदी आज भी पूजा करने आते हैं और दीवार की दरारों में मन्नत मांगने वाली चिठ्ठियां रखकर जाते हैं.

यहूदियों का टेंपल ऑफ माउंट

यहूदी धार्मिक मान्यता के अनुसार 1000 ईसा पूर्व राजा सोलोमन ने येरुशलम में यहूदी मंदिर बनाया था. वह जगह वही है जहां अल-अक्सा-मस्जिद है. इसी जगह एक दीवार है, जिसे वेस्टर्न वॉल कहा जाता है. यहूदियों का मानना है कि अल अक्सा मस्जिद में ही ईश्वर ने पहला इंसान बनाया था. ये जगह उनके लिए पवित्र से भी पवित्र (The Holy of The Holies) है. यहूदियों का विश्वास है कि यहीं पर पैगंबर अब्राहम अपने बेटे इश्हाक को बलि देने के लिए लाए थे.

ईसा मसीह हुए थे पुनर्जीवित

वहीं ईसाई धर्म की मान्यता है कि येरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद परिसर जहां है, वहीं ईसा मसीह ने अपना पवित्र उपदेश दिया था. इसी जगह पर उन्हें सूली पर चढ़ाया गया था. इसी जगह पर वह पुनर्जीवित हुए थे. इसलिए ईसाइयों के लिए भी ये सबसे पवित्र जगह के रूप में जानी जाती है. ईसाइयों का मानना है कि 561 ईस्वी में येरुशलम में इसका निर्माण कराया गया. इसे सेंट मेरी चर्च कहा जाता था.

1948 के बाद क्या हुआ?

इजरायल का 1948 में नए राष्ट्र के रूप में जन्म हुआ तो वो येरुशलम को अपनी राजधानी बनाने के प्रयास में जुट गया. क्योंकि उसका मानना था यहां ही टेंपल ऑफ माउंट मौजूद है. अरब देश इसका विरोध करने लगे. फिलिस्तीन की जमीन देकर इजरायल बनाने से अरब देशों की नाराजगी को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने एक पार्टिशन रेलॉल्यूशन बनाया. इसमें येरुशलम पर संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में इंटरनेशनल कंट्रोल का सुझाव दिया गया. लेकिन अरब देशों ने इस सुझाव को ठुकरा दिया. इजरायल और अरब देशों के बीच लगातार मनमुटाव बना रहा. इसका नतीजा ये हुआ कि 1967 में मिश्र, सीरिया और जॉर्डन के साथ इजरायल का युद्ध छिड़ गया. तीनों देश के साथ इजरायल ने अकेले मोर्चा लिया और छह दिन में ही जीत हासिलकर ली. इस जीत से उसका टेंपल ऑफ माउंट एरिया में कब्जा हो गया. लेकिन उसने यूएन कंट्रोल में कोई बदलाव नहीं किया. उस दौरान मुस्लिम नेताओं से बातचीत के बाद समझौता हुआ कि टेंपल ऑफ माउंट का प्रबंधन जॉर्डन देखेगा. यहूदियों को परिसर में प्रवेश की अनुमति मिल गई, लेकिन वो वहां पूजा-पाठ नहीं कर सकते थे.

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