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Home Prabhat Khabar Special Afghanistan vs Pakistan War : डूरंड लाइन को लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच क्या है विवाद?

Afghanistan vs Pakistan War : डूरंड लाइन को लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच क्या है विवाद?

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Afghanistan vs Pakistan War : डूरंड लाइन को लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच क्या है विवाद?
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन

Afghanistan vs Pakistan War : पाकिस्तान और अफगानिस्तान एक बार फिर आमने-सामने हैं. पिछले सप्ताह के सप्ताहांत में 11 अक्टूबर से दोनों देशों की सेना एक दूसरे पर आक्रमण कर रही है, जिसमें अबतक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है. अफगानिस्तान की ओर से यह दावा किया गया था कि उसने पाकिस्तान के 58 लोगों को मारा, जबकि पाकिस्तान इससे अलग दावा कर रहा है. बेशक अभी सही आंकड़ा देना संभव नहीं है, लेकिन यह तो कहा ही जा सकता है इस युद्ध में सेना और आम आदमी को मिलाकर सैकड़ों लोगों की मौत हुई है. यह युद्ध डूरंड रेखा (Durand Line) के आसपास जारी है. डूरंड रेखा वह सीमा है, जिसे लेकर दोनों देशों के बीच विवाद है, आइए समझते हैं कि डूरंड रेखा क्या है और दोनों देशों के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध की वजह क्या है?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के संबंध पहले बहुत तनावपूर्ण नहीं थे, लेकिन आज यह स्थिति है कि दोनों देश सीमा पर युद्ध लड़ रहे हैं. पाकिस्तान का कहना है कि अफगानिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनखवा प्रांत में आतंकवादी संगठन तहरीक एक तालिबान यानी टीटीपी का वर्चस्व है, जो पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधि को बढ़ावा दे रहा है.हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार इससे इनकार करती है. पाकिस्तान का यह भी दावा है कि भारत टीटीपी आतंकियों को सहायता देती है ताकि वह पाकिस्तान को अस्थिर कर सके.

पिछले सप्ताह अफगानिस्तान ने यह दावा किया कि पाकिस्तान ने काबुल और देश के पूर्वी हिस्से में एक बाजार पर बमबारी की जिसके बाद सीमा पर दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति बन गई, हालांकि पाकिस्तान ने हमले की बात को स्वीकारा नहीं, लेकिन उसने खंडन भी नहीं किया. यह तमाम संघर्ष डूरंड सीमा पर हुए हैं, जिसे स्वीकार करने से अफगानिस्तान इनकार करता रहा है. पाकिस्तान ने इस सीमा पर बाड़ लगाए हैं, यह भी युद्ध की एक वजह है. इस युद्ध की वजह से व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है क्योंकि कई प्रमुख सीमा क्रॉसिंग को पाकिस्तान ने बंद कर दिया है.

क्या है डूरंड रेखा, जिसकी वजह से पाकिस्तान और अफगानिस्तान हैं आमने-सामने?

डूरंड रेखा या Durand Line अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच की सीमा रेखा है, जिसकी लंबाई 2,640 किलोमीटर है. इस रेखा का निर्धारण ब्रिटिश भारत के काल में 1893 में विदेश सचिव मॉर्टिमर डूरंड और अफगान शासक अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच हुए समझौते के बाद हुआ था. अपनी सुविधा के लिए अंग्रेज अफगानिस्तान के कुछ क्षेत्रों में अपना प्रभाव जताना चाहते थे. यह एक सीमा रेखा थी, लेकिन अफगानिस्ता ने हमेशा इस सीमा रेखा पर आपत्ति जताई और इस रेखा के बारे में कहा कि यह सहमति से बनाई गई रेखा नहीं थी, बल्कि इसे अंग्रेजों ने उनपर थोपा था.

डूरंड रेखा की वजह से अफगानिस्तान का पश्तून समाज दो हिस्सों में जिसकी वजह से पश्तून जाति पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा क्योंकि उनकी आधी आबादी अफगानिस्तान में रही और आधी पाकिस्तान में. आज का बलूचिस्तान पश्तून लोगों का ही इलाका है. यह एक कबीलाई जीवन जीने वाले लोग हैं, जो कट्टर इस्लामिक रीति-रिवाज को मानते हैं.डूरंड लाइन को लेकर पाकिस्तान का कहना यह है कि उसे यह सीमा अंग्रेजों ने सौंपी है, जो एक तरह से उनकी विरासत है, इसी वजह से पाकिस्तान ने वहां बाड़ भी लगाया है, लेकिन अफगानिस्तान इस सीमा को मानने को तैयार नहीं है और इसी वजह से दोनों देश आमने-सामने है और यह विवाद की सबसे बड़ी वजह है.

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कौन सी रेखा है?

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड रेखा है.

पाकिस्तान ने कहां बाड़ लगाया है?

पाकिस्तान ने डूरंड रेखा पर बाड़ लगाया है.

किसने डूरंड रेखा का निर्माण कराया था?

1893 में विदेश सचिव मॉर्टिमर डूरंड ने डूरंड रेखा का निर्धारण करवाया था.

क्या डूरंड रेखा को अफगानिस्तान स्वीकार करता है?

नहीं, अफगानिस्तान इसे थोपा हुआ बताता है.

भारत और श्रीलंका के बीच कौन सी रेखा है?

भारत और श्रीलंका के बीच पाक जलसंधि है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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