[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Opinion ममदानी की जीत ने ट्रंपवाद को ध्वस्त कर दिया

ममदानी की जीत ने ट्रंपवाद को ध्वस्त कर दिया

0
ममदानी की जीत ने ट्रंपवाद को ध्वस्त कर दिया
ममदानी की जीत

Zohran Mamdani : चमचमाती न्यूयॉर्क सिटी में पिछले सप्ताह एक बड़ा बदलाव दिखा, जब चौंतीस वर्ष के मुखर डेमोक्रेटिक समाजवादी जोहरान क्वामे ममदानी इस नगर के दूसरे सबसे कम उम्र के मेयर बने. भारतीय हिंदू मां, फिल्मकार मीरा नायर तथा युगांडा के मुस्लिम पिता की संतान ममदानी ने सिर्फ एक चुनाव नहीं जीता, उन्होंने ट्रंपवाद को ध्वस्त कर दिया. वर्ष 2016 में ट्रंप का उदय उथल-पुथल की तरह था. उन्होंने भय को अपनी नीति तथा पहचान को अपना हथियार बनाया. वंचितों की पीठ पर सवार होने वाले तथा दूसरों के विरुद्ध दीवार खड़ी करने का वादा करने वाले ट्रंप ने समृद्धों के लिए करों में कटौती को लोकप्रियतावाद का नाम दिया. पर अपने दूसरे कार्यकाल के एक वर्ष के भीतर ही उनकी कथित मजबूती ढहने लगी है.

ममदानी की जीत के साथ अन्य प्रमुख चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की भारी जीत, ट्रंप की कमजोर पड़ती पकड़ को उजागर करती है. यह ट्रंप की विनाशकारी विरासत पर एक राष्ट्रीय जनमत संग्रह है. अमेरिका के सबसे बड़े शहर के मतदाताओं ने ट्रंप के बहिष्कार के हथकंडों को पूरी शक्ति से खारिज कर दिया. ममदानी ने इस चुनाव को पहचानों के एक निजी युद्धक्षेत्र में बदल दिया, जहां विरासत ढाल और तलवार दोनों बन गयी. हालांकि, वामपंथी आदर्शों पर यह जोर राष्ट्रीय विभाजन को और बढ़ा सकता है. ममदानी की नीतियां अवैध आव्रजन के खिलाफ लड़ाई को कमजोर और सामाजिक कार्यों पर बढ़ते खर्च का संकट उत्पन्न कर सकती हैं, जिससे शहर और देश के संसाधनों पर दबाव पड़ सकता है.


चुनाव अभियान के दौरान दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर जमकर कटाक्ष किये. ट्रंप ने ममदानी की पहचान पर हथौड़े की तरह प्रहार किया. चुनाव से कुछ दिन पहले ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने ममदानी को ‘स्व-घोषित यहूदी द्वेषी’ करार दिया. उन्होंने ममदानी पर ‘न्यूयॉर्क को तबाह कर देने वाली कट्टरपंथी वामपंथी पहचान की राजनीति’ का प्रतीक होने का आरोप लगाया. ममदानी ने भी अपनी वाक्पटुता और सांस्कृतिक मारक क्षमता से पलटवार किया. एक के बाद एक रैली में, उन्होंने अमेरिका के वादे के प्रमाण के रूप में अपनी द्विजातीय, अंतर्धार्मिक जड़ों का हवाला दिया. जीत के बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू के प्रसिद्ध भाषण ‘नियति से भेंट’ का हवाला देते हुए, इसे अमेरिकी संदर्भ में ढालते हुए कहा कि ‘हम एक ऐसा महान शहर बनायेंगे जहां सभी एकजुट होकर रहेंगे, न कि उस चारदीवारी से घिरे हुए भयावह समाज में, जिसकी बातें ट्रंप करते हैं.’ यह ट्रंप के ‘अमेरिका फर्स्ट’ के अलगाववाद को एक सीधा झटका था.


उनकी जीत के जश्न में जब भीड़ उमड़ी, तब बॉलीवुड फिल्म ‘धूम’ का हिंदी गाना ‘धूम मचा ले’ बजने लगा. नेहरू के आदर्शवाद और बॉलीवुड की जीवंतता का यह मिश्रण कोई दिखावा नहीं था, बल्कि एक शक्तिशाली आख्यान था जिसने दक्षिण एशियाई, मुस्लिम और प्रगतिशील मतदाताओं को एकजुट किया. ममदानी की जीत अकेली नहीं है. यह डेमोक्रेटिक के व्यापक पुनरुत्थान का हिस्सा है, जो ट्रंप के प्रभुत्व के लिए विनाश का संकेत है. उधर मिशिगन के डियरबॉर्न में, लेबनानी-अमेरिकी मुस्लिम अब्दुल्ला हम्मूद ने भारी अंतर से मेयर के रूप में पुनः चुनाव जीता. इस बीच, न्यूयॉर्क के बफेलो में, डेमोक्रेट इंडिया वाल्टन ने मेयर के रूप में जीत का दावा किया.

चुनावी सफलताएं शहरी किले में ट्रंपवाद की जबरदस्त अस्वीकृति है. इन जीतों से, नि:संदेह, ट्रंप के प्रभुत्व को बड़ा नुकसान पहुंचा है. घरेलू स्तर पर ये हार रिपब्लिकन पार्टी पर उनकी पकड़ को कमजोर करती है. वर्ष 2026 में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं. ये जीत डेमोक्रेट्स को ट्रंप का आक्रामक तरीके से मुकाबला करने का साहस देती है. तथापि, यह सांस्कृतिक विजय संभावित नुकसानों को छुपाती है. ममदानी का व्यापक सामाजिक एजेंडा, जिसमें बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को जोरदार समर्थन और महत्वाकांक्षी कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार शामिल है, अवैध रूप से सीमा पार करने वालों पर अंकुश लगाने के प्रयासों को कमजोर कर सकता है, सीमाओं पर अराजकता को न्योता दे सकता है, और सुरक्षा के मामले में डेमोक्रेटिक पार्टी की कमजोरी के ट्रंप के दावे को और मजबूत कर सकता है.


एक वर्ष से भी कम समय में ट्रंप की दूसरी पारी ढहने लगी है. इससे पता चलता है कि एक मजबूत लोकतंत्र में निरंकुश व्यक्तिवाद सामूहिक इच्छाओं के वजन से ध्वस्त हो जाता है. हालांकि ममदानी को भी इस जीत पर आत्मसंतुष्ट नहीं होना चाहिए. उनकी वाम विचारधारा पर यदि अंकुश नहीं लगाया गया, तो इससे बहुलतावाद के नष्ट हो जाने का खतरा है. न्यूयॉर्क सिटी के नतीजे को देखें, तो इससे डेमोक्रेटिक पार्टी के उभार के नये युग का सूत्रपात हो सकता है. यदि डेमोक्रेट्स अपनी वैचारिकता के साथ वित्तीय और सुरक्षा के मुद्दों पर संतुलन बना इस जज्बे को बनाये रखें, तो मध्यावधि चुनाव में उनके लिए उम्मीदें बढ़ सकती हैं. उससे ट्रंप का एजेंडा ही खत्म नहीं होगा, राजनीतिक रूप से उनके हाशिये पर चले जाने को भी गति मिलेगी. गोल्डन टावर की चमक आने वाले दिनों में बरकरार रह सकती है, पर इसकी बुनियाद सड़ रही है. अंत में, ट्रंप का पतन शोर-शराबे के साथ नहीं, बल्कि बहुलतावादी आवाजों की धीमी गर्जनाओं के साथ होगा. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel