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सेना में महिलाएं

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सेना में महिलाएं

Women in Army : वायु सेना की स्क्वाड्रन लीडर मोहना सिंह लड़ाकू विमान तेजस उड़ाने वाली पहली महिला पायलट बनी हैं. यह युद्धक देश में ही विकसित किया गया है. स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ और अवनी चतुर्वेदी के साथ मोहना सिंह भारतीय वायु सेना में शामिल होने वाली प्रारंभिक महिला युद्धक पायलटों में हैं. कंठ और चतुर्वेदी सुखोई लड़ाकू विमान की पायलट हैं. अभी तक मोहना सिंह मिग युद्धक उड़ाती थीं. इन महिला सैन्य अधिकारियों की उपलब्धियां इसलिए ऐतिहासिक हैं कि ये भविष्य के लिए ऐसा ठोस आधार तैयार कर रही हैं, जिसके कारण भविष्य में सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की भागीदारी में बड़ी बढ़ोतरी होगी तथा अन्य क्षेत्रों में भी लड़कियों एवं महिलाओं का मनोबल बढ़ाने में योगदान मिलेगा.

वर्ष 2016 में महिलाओं को लड़ाकू विमान पायलट बनाने का निर्णय लिया गया था. वर्तमान में इन पायलटों की संख्या लगभग 20 है. देश की स्वतंत्रता के बाद 1958 में महिलाओं को सैन्य सेवा में नियमित कमीशन के तौर पर शामिल करने का सिलसिला शुरू हुआ था, पर प्रारंभ में उनकी भूमिका चिकित्सा सेवा तक सीमित थी. लंबे अंतराल के बाद 1992 में उन्हें शॉर्ट सेवा का अवसर हासिल हुआ. फिर भी, आज तक की उनकी यात्रा आसान नहीं रही है. जीवन के अन्य क्षेत्रों की तरह सशस्त्र सेना में भी अपनी पुख्ता जगह बनाने के लिए महिलाओं को बड़ा संघर्ष करना पड़ा है. आज भी सेना में उनकी तादाद चार प्रतिशत के आसपास ही है.

साल 2020 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि शॉर्ट सेवा की महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन पाने का अधिकार है. वर्तमान में महिलाएं मेडिकल सेवा के अलावा सेना के दस विभागों में कार्य कर सकती हैं, जिनमें इंजीनियरिंग, सिग्नल, सेना वायु सुरक्षा, सेना सेवा कोर, आयुध, सेना उड्डयन कोर, इंटेलिजेंस कोर, शिक्षा एवं न्याय विभाग शामिल हैं. थल और वायु सेनाओं के साथ-साथ नौसेना में भी महिलाओं के लिए सेवा क्षेत्रों का विस्तार हो रहा है. साल 2019 में शुभांगी स्वरूप को नौसेना के लिए डोर्नियर निगरानी हवाई जहाज उड़ाने का पहली बार मौका मिला था.

एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं के द्वार खोले जाने के बाद से महिला भर्ती बढ़ी है, पर इसकी गति धीमी है. इस वर्ष मार्च में सेवा में शामिल हुए 2,630 अग्निवीर सैनिकों के तीसरे बैच में 396 महिलाएं भी थीं. मिलिटरी पुलिस में महिलाओं के उत्साहजनक प्रदर्शन को देखते हुए थल सेना ने अधिक से अधिक महिला जवानों की भर्ती का निर्णय लिया है. महिलाओं को लेकर जो सामाजिक पूर्वाग्रह और भेदभाव है, उसमें बदलाव के बाद ही राह आसान हो पायेगी.

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