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मलेरिया के विरुद्ध सफलता

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मलेरिया के विरुद्ध सफलता
Malaria

Malaria: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पिछले दिनों जारी ‘विश्व मलेरिया रिपोर्ट, 2024’ में भारत में मलेरिया से होने वाली मौतों में कमी को उल्लेखनीय बताया है, जिसका निश्चय ही नोटिस लिया जाना चाहिए. भारत में मलेरिया के मामलों में आयी 69 प्रतिशत की कमी और इससे होने वाली मौतों में 69 प्रतिशत कमी का जिक्र करते हुए उसने यह निष्कर्ष दिया है कि 2024 में भारत आधिकारिक तौर पर ‘उच्च बोझ-उच्च प्रभाव’ (एचबीएचआइ) वाले स्थानिक देशों के समूह से बाहर निकल गया है. दरअसल 2019 में देश के चार राज्यों, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में मलेरिया उन्मूलन की गति तेज करने के लिए अभियान चलाया गया था, जिसका निश्चित तौर पर लाभ मिला है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जिन कुछ देशों में मलेरिया पर बेहतर ढंग से काबू पाया गया है, उनमें भारत एक है.

2017 में भारत में मलेरिया के थे 64 लाख मामले

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में भारत में मलेरिया के 64 लाख मामले थे, जो 2023 में घटकर 20 लाख रह गये. इस दौरान मलेरिया से होने वाली अनुमानित मौतें भी 11,110 से घटकर 3,500 रह गयीं. रिपोर्ट बताती है कि चिकित्सीय सुविधा और सजगता बढ़ाने से भारत में जहां मलेरिया के अनुमानित 1.77 करोड़ मामलों को टाला गया, वहीं मलेरिया का जोखिम प्रति 1,000 की आबादी पर 20 से घटकर 1.5 पर आ गया, यानी इसमें 93 प्रतिशत की कमी आयी.

2023 में मलेरिया से आठ देश प्रभावित थे

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, दक्षिण पूर्व एशिया में 2023 में मलेरिया प्रभावित आठ देश थे, जिनमें 40 लाख मामले थे और विश्व स्तर पर मलेरिया के मामलों के बोझ में 1.5 प्रतिशत का योगदान था. इन आठ देशों में से भारत में मलेरिया के कुल मामलों का आधा था और दूसरे स्थान पर इंडोनेशिया था. भारत समेत दक्षिण पूर्व एशिया में मलेरिया के खिलाफ हुई यह प्रगति इसलिए भी उल्लेखनीय है, क्योंकि इस पूरे क्षेत्र में दुनिया की एक चौथाई जनसंख्या निवास करती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दक्षिण पूर्व एशिया में मलेरिया के खिलाफ लड़ाई में मिली जीत की प्रशंसा तो की ही है, उसने इस रोगवाहक मच्छरजनित बीमारी की रोकथाम, निदान और उपचार तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए जोखिम संभावित लोगों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा है. इसकी वजह यह है कि भारत, बांग्लादेश, इंडोनेशिया और नेपाल में मलेरिया के मामले भले ही कम हुए हों, लेकिन दक्षिण कोरिया, थाईलैंड और म्यांमार में मलेरिया के मामलों में वृद्धि देखी गयी है. जाहिर है, मलेरिया के खिलाफ लड़ाई अभी जारी है.

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