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स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध

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स्वास्थ्य क्षेत्र में शोध

भारत का फार्मास्युटिकल उद्योग देश ही नहीं दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है. भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन निर्माता देश है. दुनिया में इस्तेमाल होने वाली लगभग 60 प्रतिशत वैक्सीन भारत में बनती हैं. भारत जेनरिक दवाओं का भी सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. दुनिया की लगभग 20-22 प्रतिशत जेनरिक दवाएं भारत से ही बनकर जाती हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में जी-20 के स्वास्थ्य मंत्रियों के एक सम्मेलन में गर्व के साथ बताया कि कोरोना महामारी से लड़ने के लिए भारत ने लगभग 185 देशों को आवश्यक दवाओं की आपूर्ति की थी.

चिकित्सा का वास्तविक लक्ष्य मानवता की सेवा करना है. भारत इस अपेक्षा को पूरा कर रहा है. लेकिन, अब भारत को स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपने लक्ष्य को और ऊंचा करने की जरूरत है. स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार चुनौतियां आती रहती हैं और इनके लिए तैयारी जरूरी होती है. कोरोना महामारी के समय सबने देखा कि कैसे समस्त दुनिया कहीं भी किसी भी कोने से वैक्सीन बन जाने की आस लगाए बैठी थी. अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, चीन से लेकर भारत में भी वैज्ञानिक इस प्रयास में जुटे हुए थे.

ऐसी आकस्मिक परिस्थितियों के लिए उत्कृष्ट सुविधाएं और योग्य वैज्ञानिकों की आवश्यकता होती है. दुनिया के दिग्गज देशों के साथ भारत ने भी कोवैक्सीन बनाकर अपना सामर्थ्य साबित किया था. भारत ने कोरोना महामारी के दौरान दूसरे देशों को तरह-तरह के मेडिकल उपकरण भी भेजे थे, जैसे वेंटिलेटर, रैपिड एंटीजेन टेस्ट किट, आरटी-पीसीआर किट, पीपीइ किट और एन-95 मास्क. स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत के सामर्थ्य को और मजबूती देने के इरादे से एक राष्ट्रीय नीति बनाने की कोशिश हो रही है.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने जानकारी दी है कि अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन देने के लिए प्रस्तावित इस राष्ट्रीय नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि दुनिया की फार्मेसी कहलाने वाले भारत को अब किफायती और अच्छी गुणवत्ता वाले मेडिकल उपकरणों के निर्माण के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य भारत के लिए एक क्षेत्र भर नहीं बल्कि एक मिशन है जिसका लक्ष्य हर नागरिक को सर्वोत्कृष्ट गुणवत्ता की स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराना है.

विकसित देश बनने की महत्वाकांक्षा रखने वाले भारत में स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा को सुनिश्चित करने के हर प्रयास का स्वागत होना चाहिए. स्वास्थ्य क्षेत्र में अनुसंधान और विकास के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने से ना केवल भारत, बल्कि सारी दुनिया का हित होगा.

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