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रिकॉर्ड कृषि निर्यात

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रिकॉर्ड कृषि निर्यात
farming

बीते वित्त वर्ष में हमारे देश ने 400 अरब डॉलर मूल्य का निर्यात कर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. इसमें कृषि क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. वर्ष 2021-22 के वित्त वर्ष में भारत ने 50 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का निर्यात किया है. यह अब तक सर्वाधिक है. इससे पहले सबसे अधिक कृषि निर्यात 2013-14 में हुआ था, जब 43 अरब डॉलर के उत्पाद अन्य देशों को भेजे गये थे. उसके बाद निर्यात में बड़ी कमी आ गयी थी.

वर्ष 2016-17 में जब निर्यात 10 अरब डॉलर घट गया, तब वाणिज्य मंत्रालय ने इसके चार मुख्य कारणों को रेखांकित किया था. इनमें पहला कृषि उत्पादन और निर्यात के बीच जुड़ाव का नहीं होना था. राज्य सरकारों और किसानों में निर्यात को ध्यान में रखकर उत्पादन करने को लेकर जागरूकता का अभाव दूसरा कारण था. मंत्रालय ने अपने आकलन में पाया था कि राज्य सरकारें निर्यात को केंद्र सरकार का मामला मानती थीं.

इसके अलावा कृषि निर्यात इंफ्रास्ट्रक्चर तथा राज्य सरकारों के पास संबंधित विशेषज्ञता की कमी भी निर्यात घटने की वजहें थीं. इन खामियों को दूर करने के लिए केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने कार्ययोजना बनाकर राज्य सरकारों के साथ-साथ जिला स्तर पर और गांवों में किसानों तक संपर्क स्थापित किया. चूंकि खेती आज भी आजीविका का सबसे बड़ा स्रोत है, इसलिए किसानों की आय बढ़ाना और कृषि क्षेत्र का विकास करना आवश्यक है.

यह सरकार की प्राथमिकताओं में भी है. वाणिज्य मंत्रालय ने किसानों को अधिशेष उत्पादन के निर्यात का भरोसा दिलाया. इन प्रयासों का परिणाम अब हमारे सामने है. कोरोना महामारी से उत्पन्न हुई समस्याओं और बाधाओं के बावजूद कृषि निर्यात में बढ़ोतरी उत्साहजनक है. वैश्विक स्तर पर एक ओर जहां खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर ढुलाई में मुश्किलें भी हैं. लॉकडाउन और अन्य पाबंदियों से भी निर्यात प्रक्रिया प्रभावित हुई है.

ऐसी मुश्किलों को दूर करने के लिए देश के भीतर और बाहर वाणिज्य मंत्रालय सक्रिय रहा. निर्यात बढ़ने का एक उल्लेखनीय कारक नये बाजारों की तलाश तथा मौजूदा बाजारों में ज्यादा कारोबार भी रहे. हमारे देश में कई तरह के कृषि उत्पाद हैं और सभी के निर्यात को प्रोत्साहित करने से ही निर्यात में वृद्धि को बरकरार रखा जा सकता है. इस संबंध में हो रही प्रगति संतोषजनक है.

पिछले वित्त वर्ष में 10 अरब डॉलर मूल्य के चावल का निर्यात हुआ है. चावल के वैश्विक निर्यात में अब भारत की हिस्सेदारी 50 फीसदी है. इस बार सामुद्रिक उत्पादों का निर्यात भी आठ अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है. अन्य प्रमुख उत्पादों में चीनी, गेहूं, कॉफी, मांस, पॉल्ट्री, दुग्ध, मसाले, कपास आदि हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध से वैश्विक खाद्य आपूर्ति बड़े पैमाने पर बाधित हुई है. ऐसे में भारत एक महत्वपूर्ण निर्यातक के रूप में उभर रहा है और हमारे खाद्यान्न के लिए नये बाजार मिल रहे हैं. ऐसे में कृषि निर्यात में बढ़त बनी रहेगी.

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