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आवास क्षेत्र को मिलती रफ्तार

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आवास क्षेत्र को मिलती रफ्तार
Real state

Real Estate : आवास के क्षेत्र में शीर्ष वित्तीय संस्थान राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 में पिछले वर्ष की तुलना में गांवों एवं शहरों में कहीं ज्यादा यानी रिकॉर्ड 1.71 करोड़ मकान बने, जो रियल एस्टेट में उछाल के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था की मजबूती का भी संकेत है. राष्ट्रीय आवास बैंक दरअसल क्षेत्रीय और स्थानीय स्तर पर आवास वित्त संस्थाओं के विकास को बढ़ावा देता है. इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य आवास ऋण को अधिक किफायती बनाना है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों के सिर पर अपनी छत होने का सपना साकार हो सके.

आंकड़े बताते हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2023-24 में दो से 10 लाख और 10 से 25 लाख रुपये तक के मूल्य तक के मकानों की बिक्री बढ़ी है, जो अपने देश में आवासीय मांग बढ़ने के बारे में ही बताती है. बेशक इस दौरान एक करोड़ रुपये से ज्यादा महंगे मकानों की बिक्री भी बढ़ी है, जिसकी वजह शहरों-महानगरों में बुनियादी ढांचे के विकास को माना जा सकता है. यह वास्तविकता है कि मेट्रो और सड़क नेटवर्क में विस्तार तथा कनेक्टिविटी में सुधार ने देश भर में भू-संपदा की मांग बढ़ा दी है.

आम लोगों की प्राथमिकताओं में अपना घर खरीदना शामिल हो जाना लोगों की क्रय शक्ति बढ़ने के बारे में बताता है, जिस कारण आवास ऋण पर ऊंची ब्याज दरों के बावजूद लोग किराये के घरों में रहने के बजाय अपना घर खरीदने को तवज्जो दे रहे हैं. एक आंकड़े के मुताबिक, पिछले दो वित्त वर्षों में कुल 83.67 लाख मकानों का निर्माण किया गया. आवासों की कीमतों में तेजी और वैश्विक अनिश्चितताओं के बाद भी रियल एस्टेट सेक्टर ने निवेशकों को आकर्षित किया है, तो निश्चित रूप से इसका श्रेय इस क्षेत्र में सरकार के हस्तक्षेप को भी जाता है.

रियल एस्टेट के क्षेत्र में आयी यह तेजी, जाहिर है, भविष्य के लिए बेहद आश्वस्त करने वाली है, क्योंकि माना जाता है कि कृषि के बाद यही एक ऐसा क्षेत्र है, जो सर्वाधिक रोजगार का सृजन करता है. इस क्षेत्र के विकास से लोहा, सीमेंट आदि अन्य बुनियादी औद्योगिक क्षेत्रों का भी विकास होता है. हालांकि भूलना नहीं चाहिए कि रेरा के गठन के बाद भी बिल्डर की मनमानी की शिकायतें मिलती रही हैं, जो इस क्षेत्र की एक कमजोर कड़ी है. खासकर बड़े शहरों और महानगरों में घर खरीदने का सपना बहुतों को अनिश्चय के भंवर में छोड़ देता है. ऐसे में, रियल एस्टेट क्षेत्र की प्रगति संतुलित और समावेशी हो, इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

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