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लॉजिस्टिक में प्रगति

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लॉजिस्टिक में प्रगति

भारतीय अर्थव्यवस्था से संबंधित विभिन्न मानकों में निरंतर बेहतरी हो रही है. विश्व बैंक की लॉजिस्टिक परफॉरमेंस इंडेक्स, 2023 में 139 देशों में भारत 38वें स्थान पर आ गया है. इस सूचकांक में 2014 में भारत 54वें और 2018 में 44वें स्थान पर रहा था. यह सूचकांक तकनीक और लॉजिस्टिक इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के आधार पर तैयार किया जाता है. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने अक्टूबर, 2021 में महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री गति शक्ति परियोजना की शुरुआत की थी, जो आवागमन के विभिन्न माध्यमों का राष्ट्रव्यापी विस्तार एवं विकास करने का राष्ट्रीय मास्टर प्लान है. पिछले साल सितंबर में एक राष्ट्रीय लॉजिस्टिक नीति भी निर्धारित की गयी. यह देश की ऐसी पहली नीति है. लॉजिस्टिक नीति की घोषणा के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि यह नीति आठ वर्षों के कार्यों का परिणाम है.

लॉजिस्टिक में औद्योगिक उत्पादन और वितरण में सहायक सभी चीजें शामिल होती है, जैसे- योजना बनाना, भंडारण करना, कामगारों और अन्य संसाधनों का आवागमन, उत्पादित वस्तु को बाजार तक ले जाना आदि. अभी हमारे सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) में लॉजिस्टिक के खर्च की हिस्सेदारी 14 से 18 फीसदी है, जबकि अच्छी अर्थव्यवस्थाओं में यह आंकड़ा आठ प्रतिशत के आसपास होता है. ऐसा होने का मुख्य कारण देश में हाल तक किसी तरह की लॉजिस्टिक नीति का नहीं होना रहा है.

अब अगर हम लॉजिस्टिक नीति के समुचित अनुपालन को सुनिश्चित कर दें, तो 2030 में हम दूसरी अर्थव्यवस्थाओं के स्तर पर आ सकते हैं. इस नीति का दूसरा लक्ष्य लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक में भारत को शीर्ष के 25 देशों में शामिल करना है. आज हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं. सरकार की प्राथमिकता में लॉजिस्टिक कितना महत्वपूर्ण है, इसका अनुमान केवल इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि पूर्वोत्तर में बड़े पैमाने पर रेल और सड़क मार्ग के नेटवर्क का विस्तार हो रहा है.

साथ ही, वास्तविक नियंत्रण रेखा से निकट बसे इलाकों में ब्रॉडबैंड लगाया जा रहा है. सीमावर्ती क्षेत्रों में भी इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण जोरों पर है. लॉजिस्टिक परफॉरमेंस इंडेक्स की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि भारत सरकार ने 2015 से दोनों ओर के बंदरगाहों के साथ देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित आर्थिक केंद्रों को जोड़ने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया है. आशा है कि भारत जल्दी ही इस इंडेक्स में शीर्ष देशों में शामिल होगा.

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