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मॉनसून की मार बदहाल उत्तर भारत

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मॉनसून की मार बदहाल उत्तर भारत
मॉनसून की मार

Monsoon : वैसे तो बिहार के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है, लेकिन पंजाब समेत उत्तर भारत के राज्यों में लगातार होती वर्षा तथा नदियों के बढ़ते जलस्तर से स्थिति बेहद गंभीर और चिंताजनक है. मॉनसून की मार से वहां लाखों लोग प्रभावित हैं और प्रशासन, एनडीआरएफ तथा सेना राहत व बचाव कार्यों में लगी हैं. वर्षा का अलर्ट जारी किये जाने से तत्काल इस संकट से मुक्ति मिलने की संभावना भी नहीं है. स्थिति की गंभीरता का पता इसी से चलता है कि जम्मू में वर्षा ने सौ साल से अधिक का, हिमाचल में 76 साल का, तो पंजाब में 25 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है.

हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी वर्षा के बाद उफनती सतलुज, ब्यास और रावी नदियों व मौसमी नालों के कारण पंजाब भीषण बाढ़ की चपेट में है. वहां ढाई लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, खेती बुरी तरह प्रभावित हुई है और लगभग 30 लोगों की मौत हुई है. स्कूल-कॉलेजों में छुट्टियां हैं और मेडिकल कैंपों के जरिये स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं. जम्मू-कश्मीर में बादल फटने और बाढ़ से पिछले एक पखवाड़े में सवा सौ से अधिक जान जा चुकी है, तो बाढ़, वर्षा और भूस्खलन से अलग-अलग जगहों पर तबाही के बाद पूरे हिमाचल प्रदेश को आपदाग्रस्त राज्य घोषित किया गया है.

उत्तराखंड के सभी जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद हैं और चारधाम तथा हेमकुंड साहिब यात्रा पांच सितंबर तक स्थगित कर दी गयी है. भूस्खलन के कारण उत्तराखंड समेत दूसरे हिमालयी राज्यों में सैकड़ों सड़कें बंद हो गयी हैं तथा प्रशासन ने अनावश्यक यात्रा से बचने तथा पर्यटकों से पहाड़ी इलाकों की यात्रा टालने का अनुरोध किया है. उत्तर भारत के मैदानी इलाके भी सुरक्षित नहीं हैं. दिल्ली में यमुना उफान पर है और नदी तट के कई इलाके खाली करा लिये गये हैं, जबकि उत्तर प्रदेश में खतरे के निशान से ऊपर बहती यमुना ने मथुरा के घाटों और मंदिरों से लेकर आगरा में ताजमहल के आसपास के इलाके को चपेट में ले लिया है.

हरियाणा में मूसलाधार वर्षा के बाद जल जमाव से गुरुग्राम की सड़कों पर लंबा जाम लगा और वर्क फ्रॉम होम की एडवाइजरी जारी करनी पड़ी. जलवायु परिवर्तन के कारण मॉनसून की अवधि बढ़ने के साथ अतिवृष्टि से भी नुकसान हो रहा है, ऐसे में हिमालयी राज्यों के विकास मॉडल पर विचार करने के साथ-साथ शहरी नियोजन में भी, खासकर जल निकासी व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिये जाने की जरूरत है.

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