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नियामकों द्वारा निगरानी

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नियामकों द्वारा निगरानी

बीते कुछ दिनों से शेयर बाजार से लेकर संसद तक अदानी समूह की कारोबारी गतिविधियों को लेकर माहौल गर्म है. अमेरिका-स्थित हिंडेनबर्ग रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में इस समूह पर अनेक गंभीर आरोप लगाये हैं, जिन्हें अदानी समूह ने सिरे से खारिज कर दिया है. रिपोर्ट के आने के बाद से स्टॉक मार्केट में समूह की सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों की भारी बिकवाली हुई है, जिससे इन कंपनियों का बाजार मूल्य लगभग आधा घट गया है.

जिन बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने इस समूह में निवेश किया है, उनके शेयरों के भाव पर भी इस हलचल का असर देखा गया है. इस पृष्ठभूमि में पूरे प्रकरण की वस्तुस्थिति समझने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक तथा भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) सक्रिय हो गये हैं. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि ये नियामक संस्थाएं अपना काम करेंगी.

ये संस्थाएं सरकारी नियंत्रण से स्वायत्त होती हैं. रिपोर्टों के अनुसार, रिजर्व बैंक ने अदानी समूह को दिये गये कर्ज के बारे में बैंकों से जानकारी मांगी है. बताया जा रहा है कि रिजर्व बैंक विशेष परिस्थितियों में ऐसी जानकारी इसलिए मांगता है क्योंकि संभवतः केंद्रीय डाटाबेस में ताजा सूचनाएं उपलब्ध नहीं होतीं.

बड़े कर्जों से जुड़े डाटा को कभी मासिक और कभी साप्ताहिक रूप से अद्यतन किया जाता है. अदानी समूह के शेयरों के दाम में भारी गिरावट को सेबी ने बहुत गंभीरता से लिया है और माना जा रहा है कि यह नियामक संस्था समूचे प्रकरण की जांच कर रही है. सेबी ने यह भी कहा है कि उसके संज्ञान में कोई भी जानकारी आती है, तो वह उसकी पूरी जांच करेगी तथा जरूरत पड़ने पर समुचित कार्रवाई भी की जायेगी.

इस पूरे मामले में देश के बैंकिंग प्रणाली पर गंभीर असर होने की आशंकाओं को रिजर्व बैंक ने खारिज कर दिया है. देश के केंद्रीय बैंक की ओर से कहा गया है कि हर मानक पर हमारी बैंकिंग प्रणाली में स्थायित्व है तथा बैंकों ने बड़े कर्ज देने से संबंधित नियमों का ठीक से पालन किया है. रिजर्व बैंक बैंकों को लेकर सचेत भी है.

उल्लेखनीय है कि हालिया तिमाहियों में बैंकों ने कमाई और मुनाफे के मोर्चों पर अच्छा प्रदर्शन किया है. जहां तक समूचे शेयर बाजार की बात है, तो इस मसले का असर बहुत सीमित रहा है. अदानी समूह द्वारा अपने एक एफपीओ को वापस लेने को कुछ जानकार शेयर बाजार के लिए झटका मान रहे हैं, लेकिन, जैसा कि वित्त मंत्री ने रेखांकित किया है, ऐसा कई बार पहले भी हुआ है. फिलहाल सबसे अहम यह है कि नियामक संस्थाएं जांच कर रही हैं और हमें जांच के नतीजों का इंतजार करना चाहिए.

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