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जहाजों पर हमले अस्वीकार्य

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जहाजों पर हमले अस्वीकार्य
व्यापारिक जहाजों पर हमले को भारत ने बताया अस्वीकार्य, फोटो- पीटीआई

Middle East Crisis: लंदन में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन परिषद के 36वें सत्र को संबोधित करते हुए ब्रिटेन में भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोरैस्वामी ने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच व्यापारिक जहाजों पर हमले को अस्वीकार्य बताकर जरूरी हस्तक्षेप किया है. उनका कहना था कि वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाना, नागरिक दल को खतरे में डालना और होर्मुज जलडमरूमध्य सहित अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से सुरक्षित नौवहन में बाधा डालना अस्वीकार्य है. अपने संबोधन में उन्होंने नाविकों की सुरक्षा पर जोर देते हुए संयम बरतने और संवाद के जरिये तनाव कम करने का आह्वान किया.

उनका कहना था कि भारत की ऊर्जा, सुरक्षा और व्यापार होर्मुज जलडमरुमध्य में सुरक्षित आवाजाही पर निर्भर हैं, लिहाजा ऐसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में किसी प्रकार की बाधा के दूरगामी परिणाम होंगे. अंतरराष्ट्रीय नौवहन संगठन (आइएमओ) परिषद ने भी जहाजों की सुरक्षा के लिए सामूहिक सहयोग की जरूरत पर बल दिया है. गौरतलब है कि इस जंग में अब तक करीब 16 तेल टैंकरों, मालवाही जहाजों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया है. जबकि अनुमानित 23,000 भारतीय नाविक इससे प्रभावित हुए हैं.

फिलहाल फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 24 जहाज कार्यरत हैं, जिनमें होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में 22 जहाजों पर भारतीय चालक दल के 611सदस्य और जलडमरूमध्य के पूर्व में स्थित दो जहाजों पर 47 नाविक सवार हैं. ऐसे में, भारत ने सूचना साझाकरण ढांचे को बेहतर बनाने सहित समुद्री निगरानी और तैयारियों को और मजबूत किया है. दौरैस्वामी ने आइएमओ महासचिव द्वारा जारी सूचना साझा करते हुए बताया कि मारे गये सात नाविकों में तीन भारतीय नाविक थे, जबकि चार अन्य घायल हुए और एक अब भी लापता है.

नौवहन क्षेत्र में 13 फीसदी की वैश्विक भागीदारी रखने वाला भारत मौजूदा संकट के बीच नाविकों की सुरक्षा के लिए अत्यंत चिंतित है और इसने सभी देशों के नाविकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाये हैं, जिनमें चौबीसों घंटे हेल्पलाइन, जहाजरानी महानिदेशक द्वारा गठित त्वरित प्रतिक्रिया दल और प्रभावित चालक दल और उनके परिवारों की सहायता के लिए विदेश मंत्रालय द्वारा स्थापित एक समर्पित नियंत्रण कक्ष शामिल हैं. दोरैस्वामी ने इस पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार बनाये रखा जाना चाहिए.

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