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अविश्वास में विश्वास कायम रहे

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अविश्वास में विश्वास कायम रहे

अविश्वास प्रस्ताव आया था, गिर गया. इसका हाल सेंसेक्स जैसा हो गया है, आखिर में गिर जाता है. फर्क मात्र यह है कि अविश्वास प्रस्ताव पांच साल में एकाध बार गिरता है, सेंसेक्स गिरता-उठता रहता है. यूं पॉलिटिक्स और सेंसेक्स में बहुत कुछ मिलता-जुलता है. सेंसेक्स का ताल्लुक शेयरों की रेट से होता है, वैसे ही नेताओं की भी रेट होती है. कुछ साल पहले जब अविश्वास प्रस्ताव आया था, तब सरकार वाले कुछ नेता अविश्वास करने वालों की तरफ थे. अब वो सारे विश्वासी हो लिये. तो मामला परमानेंट नहीं है. जो आज अविश्वासी है, वह कल विश्वासी हो जायेगा. जो आज विश्वासी है, वह क्या पता कल अविश्वासी हो जाए. सो, अविश्वास से विश्वास के बीच झूलने के लिए तैयार रहिए. कुछ भी दिल पर ना लीजिए, क्योंकि कुछ भी आपके बस में नहीं. सब सेट है. नेता इधर से मिनिस्टर बनेंगे, फिर उधर से मिनिस्टर बनेंगे. पहले उधर की सी बोलेंगे, फिर इधर की सी बोलेंगे. आपको क्या बोलना है, यह बेकार की बात है.

राहत बस यह है कि अविश्वास प्रस्ताव की जब खबर आती है, तो टीवी चैनल इसी पर लग जाते हैं और हम बच जाते हैं उन खबरों से, जिनमें बताया जाता है कि आज रात पुतिन यूक्रेन पर एटम बम डाल देंगे. मुझे लगता है कि कुछ चैनलों का पुतिन के साथ गठबंधन है कि जब हम अविश्वास प्रस्ताव पर कवरेज दिखा रहे हों, तो भई तू अपना बम गोदाम में रख आना. कई टीवी चैनलों को पुतिन पर पूरा विश्वास है कि वह यूक्रेन पर कभी भी एटम बम नहीं चलायेंगे, इसलिए यह खबर चलाने की संभावना हमेशा बनी रहेगी कि पुतिन आज रात यूक्रेन पर एटम बम गिरा देंगे.

पर जरा सोचिए कि अगर सब तरफ विश्वास ही विश्वास हो जाए, तो कितनी आफत हो जायेगी, कितने धंधे बंद हो जायेंगे. सीसीटीवी कैमरे के धंधे वालों का तो इस कल्पना से ही दिल बैठ सकता है. आपके घर में दस्तक देनेवाला हर बंदा खतरनाक है, इस विचार से ही कई धंधों की नींव शुरू होती है. सीसीटीवी राष्ट्रीय सुरक्षा की दिशा में बहुत महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं, पर सच यह भी है कि जैसे-जैसे समाज में परस्पर अविश्वास की भावना बढ़ रही है, वैसे-वैसे सीसीटीवी कैमरों का कारोबार बढ़ रहा है. जासूसी सेवाएं देने वाली एक एजेंसी का मालिक बता रहा था कि महानगरों में 10 में से नौ पत्नियां मानती हैं कि उनके पति का बाहर चक्कर है. ऐसे ही 10 में छह पति मानते हैं कि उनकी पत्नियों के चक्कर कहीं और हैं. दोनों तरफ का बिजनेस जासूसी एजेंसी को मिलता है. सो अविश्वास कायम रहे.

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