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निर्यात में छलांग

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निर्यात में छलांग
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पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय वस्तुओं की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है. निरंतर बढ़ता निर्यात इस बात का ठोस प्रमाण है कि भारत में निर्मित वस्तुओं की गुणवत्ता की विश्वसनीयता वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है. चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में विकसित बाजारों को होने वाले निर्यात में भारी वृद्धि दर्ज की गयी है. पश्चिमी देश विकसित अर्थव्यवस्थाएं हैं. वे दुनिया में अन्य जगहों से चीजों का आयात कर सकते हैं. पर अगर उनका भारतीय उत्पादों पर भरोसा बढ़ रहा है, तो इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि हमारी अर्थव्यवस्था की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती जा रही है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से जून की अवधि में अमेरिका को होने वाले निर्यात में 10.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, तो नीदरलैंड और ब्रिटेन को होने वाले निर्यात में क्रमश: 41.3 और 21.9 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी हुई है.

सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात के लिए ये आंकड़े क्रमश: 26.55 और 17.6 प्रतिशत हैं. भारत सबसे अधिक निर्यात अमेरिका को करता है. इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात और नीदरलैंड का स्थान है. निर्यात में भारी बढ़ोतरी का महत्व इसलिए भी बहुत बढ़ जाता है कि तनावपूर्ण भू-राजनीति और लड़ाइयों से वैश्विक कारोबार और आपूर्ति शृंखला पर नकारात्मक असर पड़ा है. लगभग ढाई साल से रूस-यूक्रेन युद्ध चल रहा है, गाजा पर इस्राइली हमले बीते साल अक्टूबर से जारी हैं और इस कारण पश्चिम एशिया में बड़े क्षेत्रीय युद्ध की आशंकाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं तथा लाल सागर में दिसंबर से जारी यमन के हूथी लड़ाकों की नाकाबंदी से वह मार्ग बुरी तरह बाधित हुआ है.

फिर भी, जैसा कि भारतीय रिजर्व बैंक समेत कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं एवं एजेंसियों का आकलन है, विकसित और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की स्थिति अच्छी बनी हुई है तथा आगे भी सकारात्मक संभावनाएं हैं. विभिन्न देशों में मुद्रास्फीति भी घटने लगी है. यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है. जून में हमारे कुल निर्यात (वस्तु एवं सेवाएं) में 5.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी है. पहली तिमाही में भारत का निर्यात (वस्तु एवं सेवाएं) 200 अरब डॉलर से अधिक रहा है. माना जा रहा है कि इस वर्ष कुल निर्यात 800 अरब डॉलर से अधिक हो सकता है. निर्यात बढ़ाने की रणनीति के तहत भारत ने महत्वपूर्ण 20 देशों को चिह्नित किया है तथा छह ऐसे बड़े क्षेत्रों को चुना गया है, जिससे लक्ष्य-आधारित निर्यात बढ़ सके. निर्यात बढ़ने से वैश्विक उत्पादन शृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ रही है. अर्थव्यवस्था विस्तार के साथ यह हिस्सेदारी बढ़ती जायेगी.

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