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अमेरिका से तनाव के बीच रूस में जयशंकर, सहयोग को भारत और कर रहा है मजबूत

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अमेरिका से तनाव के बीच रूस में जयशंकर, सहयोग को भारत और कर रहा है मजबूत
पुतिन और एस जयशंकर

Jaishankar : अमेरिका से तनाव के बीच रूस के साथ अपने सहयोग को भारत और मजबूत कर रहा है, इसका पता विदेश मंत्री एस जयशंकर की रूस यात्रा से चलता है. जयशंकर ने मास्को में आयोजित भारत-रूस बिजनेस फोरम में रूसी कंपनियों से भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर काम करने के लिए कहा है. उनका कहना था कि भारत एक बड़ा बाजार है, जहां रूसी कंपनियों के लिए बड़े अवसर हैं. ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था रूसी कंपनियों के लिए सुनहरा अवसर है.

रूस से तेल की खरीद पर अमेरिकी धमकियों के बीच विदेश मंत्री की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है. हालांकि जयशंकर ने भारत-रूस के बीच बढ़ते कारोबार के साथ-साथ व्यापार असंतुलन की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा है कि अब हमें द्विपक्षीय व्यापार को विविधतापूर्ण और संतुलित करने के लिए और जोरदार प्रयास करने होंगे. यह न केवल ऊंचे व्यापारिक लक्ष्यों के लिए जरूरी है, बल्कि मौजूदा स्तर को बनाये रखने के लिए भी आवश्यक है. दूसरी ओर, रूसी उपराजदूत की यह टिप्पणी भी बेहद महत्वपूर्ण है, जिसमें उन्होंने कहा है कि भारत को अगर अमेरिकी बाजार में अपना माल बेचने में परेशानी हो रही है, तो रूस का दरवाजा खुला है. हम भारतीय निर्यात के स्वागत के लिए तैयार हैं. जाहिर है कि यह अमेरिका को ठोस संदेश है.

यह पहले से ही स्पष्ट है कि अमेरिकी टैरिफ के दबाव का रूस से भारत की तेल खरीद पर कोई असर नहीं पड़ा है. रूस के उपराजदूत ने भारतीय तेल खरीद नीति पर अमेरिकी दबाव को अन्यायपूर्ण बताया है. साथ ही, रूस की तरफ से यह खुलासा भी किया गया है कि वह भारत को पांच प्रतिशत डिस्काउंट पर कच्चा तेल बेच रहा है. रूस के प्रमुख विद्वानों और थिंकटैंक प्रतिनिधियों के साथ जयशंकर की वार्ता के दौरान भारत-रूस संबंध तथा बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य और भारत के दृष्टिकोण पर विस्तृत चर्चा हुई.

रूस के विदेश मंत्री के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर ने भारत को रूसी तेल की खरीद के लिए दंडित करने के अमेरिकी फैसले पर आश्चर्य जताया. उन्होंने कहा कि रूस से सबसे ज्यादा तेल चीन खरीदता है, भारत नहीं. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के बड़े द्विपक्षीय संबंधों में भारत-रूस दोस्ती सबसे विश्वसनीय है. कुल मिलाकर, विदेश मंत्री की रूस यात्रा वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत-रूस मैत्री का ठोस संदेश है.

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