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स्वदेशी सुरक्षा कवच ने बढ़ाई भारत की ताकत

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स्वदेशी सुरक्षा कवच ने बढ़ाई भारत की ताकत
वायु रक्षा हथियार प्रणाली

Integrated Air Defence Weapon System : रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने एकीकृत वायु रक्षा हथियार प्रणाली (आइएडीडब्ल्यूएस) के पहले उड़ान परीक्षण को ओडिशा के तट पर सफलतापूर्वक पूरा कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है. टेस्ट के दौरान इस स्वदेशी प्रणाली ने तीन अलग-अलग लक्ष्यों को विभिन्न ऊंचाइयों और दूरी पर एक साथ नष्ट कर अपनी ताकत दिखाई. इसका सबसे खास हिस्सा इसका लेजर आधारित डायरेक्टेड एनर्जी वेपन है. लेजर हथियार प्रकाश की गति से हमला करते हैं, ये एकीकृत होते हैं तथा इनका इस्तेमाल बार-बार किया जा सकता है.

इसका सफल परीक्षण, जाहिर है, देश की स्वदेशी रक्षा क्षमता में एक बड़ा कदम है और इससे विदेशी डिफेंस सिस्टम पर भारत की निर्भरता भी कम हो जायेगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक, इस उपलब्धि ने देश की बहुस्तरीय हवाई सुरक्षा क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है और यह प्रणाली दुश्मन के हवाई खतरों के खिलाफ क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूती देगी. गौरतलब है कि विगत अप्रैल में डीआरडीओ ने इसके जमीनी संस्करण की सफलता दिखाई थी, जिसमें उसने ड्रोन को नष्ट कर उनकी निगरानी प्रणालियों को अक्षम कर दिया था. यह एक मल्टी लेयर्ड एयर डिफेंस सिस्टम है, जो पूरी तरह स्वदेशी तकनीकों से निर्मित है.

तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली छोटी दूरी की इस मिसाइल प्रणाली का मुख्य काम सैन्य टुकड़ियों को दुश्मनों के हवाई हमलों से बचाना है और इसे सेना, नौसेना तथा वायुसेना की जरूरतें पूरी करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह तीन से 30 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य को नष्ट कर सकती है और चलते-फिरते भी हमला कर सकती है. इसमें दो रडार शामिल हैं, जो 360 डिग्री निगरानी और ट्रैकिंग कर सकते हैं. इस पूरे वेपन सिस्टम को बेहद आधुनिक मोबाइल प्लेटफॉर्म पर फिट किया गया है. यह प्रणाली बेशक छोटी दूरी के खतरों को रोकती है, लेकिन भविष्य में इसे लंबी दूरी के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

देश के महत्वपूर्ण ठिकानों को हवाई हमलों से बचाने के लिए बनायी गयी इस प्रणाली को प्रधानमंत्री मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर घोषित ‘सुदर्शन चक्र’ रक्षा कवच का हिस्सा माना जा रहा है, जो कि एक व्यापक सुरक्षा कवच होगा. इसका उद्देश्य 2035 तक एक मजबूत, स्वदेशी रक्षा कवच विकसित करना है, जो निगरानी, भौतिक सुरक्षा और साइबर सुरक्षा को एकीकृत करेगा. इस प्रणाली के साथ भारत अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, जर्मनी और इस्राइल जैसे चुनींदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास ऐसी तकनीक है.

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