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Home Opinion भारत पर ट्रंप के यू टर्न के मायने, पढ़ें अनिल त्रिगुणायत का खास लेख

भारत पर ट्रंप के यू टर्न के मायने, पढ़ें अनिल त्रिगुणायत का खास लेख

भारत पर ट्रंप के यू टर्न के मायने, पढ़ें अनिल त्रिगुणायत का खास लेख
पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप

India US Relations : हाल ही में एक इंटरव्यू में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की. ट्रंप से यह पूछा गया था कि क्या इस समय आप भारत के साथ संबंधों को फिर से सुधारने के लिए तैयार हैं? ट्रंप का जवाब था, ‘मैं हमेशा तैयार रहूंगा. मैं प्रधानमंत्री मोदी का दोस्त रहूंगा. वह महान प्रधानमंत्री हैं. इस समय वह जो कर रहे हैं, वह मुझे पसंद नहीं है, लेकिन भारत और अमेरिका के बीच एक खास रिश्ता है. इसमें चिंता की कोई बात नहीं.’ अच्छी बात यह हुई कि भारत ने तत्काल इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी. प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफॉर्म पर लिखा, ‘मैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भावनाओं और हमारे संबंधों की सकारात्मकता की गहराई से सराहना करता हूं. मैं पूरी तरह से उसका समर्थन करता हूं.


भारत और अमेरिका के बीच एक बहुत ही सकारात्मक और भविष्योन्मुखी व्यापक और वैश्विक रणनीतिक साझेदारी है.’ ट्रंप की इन टिप्पणियों के बाद अब भारत-अमेरिका संबंधों के सामान्य होने की उम्मीद बनी है. अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि नवंबर में भारत में होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन में ट्रंप आयेंगे या नहीं. गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जब ट्रंप को क्वाड में आने का न्योता दिया था, तब ट्रंप ने उसे स्वीकार कर लिया था. लेकिन उसके बाद से बहुत कुछ हो चुका है. ऐसे में, क्वाड का मंच दोनों देशों के संबंधों को सामान्य करने का अवसर बन सकता है. दरअसल ट्रंप भारत के बारे में शुरू से ही दो बातें करते रहे हैं- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके रिश्ते बहुत अच्छे हैं, लेकिन भारत टैरिफ किंग है, जो अमेरिकी उत्पादों पर भारी टैरिफ लगाता है. जब वह पहली बार राष्ट्रपति बने थे, तब भी भारत के साथ उनके रिश्ते बहुत सहज नहीं थे, और उन्होंने भारत को जीएसपी लाभ के दायरे से बाहर कर दिया था. इस बार राष्ट्रपति चुनाव के अपने अभियान में भी भारत के बारे में बातें करते हुए उन्होंने भारतीय टैरिफ के बारे में बातें कही थीं. इसलिए यह स्पष्ट था कि दूसरे राष्ट्रपति काल में भी भारत के साथ उनके रिश्ते उतार-चढ़ाव वाले रहने वाले हैं. ऐसा ही हुआ.


ट्रंप की कटुता की शुरुआत ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संघर्षविराम से हुई. वह चाहते थे कि भारत इस बात को स्वीकारे कि पाकिस्तान के साथ सघर्षविराम ट्रंप ने करवाया था, लेकिन भारत की तरफ से कहा गया कि संघर्षविराम दोनों पक्षों की बातचीत के बाद हुआ था. दूसरी ओर, पाकिस्तान ने न सिर्फ संघर्षविराम का श्रेय ट्रंप को दिया, बल्कि उनका नाम नोबेल पुरस्कार के लिए भी प्रस्तावित किया. ऐसे में, भारत से नाराज ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया. इसके बावजूद नयी दिल्ली ने परिपक्व रवैये का परिचय दिया है. एक तरफ भारत ने अमेरिका के साथ रिश्तों पर टिप्पणी करते हुए लगातार संयम बरता, दूसरी ओर, दूसरे देशों के साथ संपर्क बढ़ाने और व्यापार समझौता करने की दिशा में सक्रियता बढ़ायी. इस बीच प्रधानमंत्री मोदी एससीओ की शिखर बैठक में भाग लेने के लिए चीन गये. सिंगापुर के साथ आर्थिक सहयोग, कौशल विकास, डिजिटलीकरण तथा कनेक्टिविटी के अलावा आतंकवाद से निपटने के तौर-तरीके पर आपसी सहमति बनी है. जर्मनी के विदेश मंत्री भारत दौरे पर आये थे और उन्होंने कहा कि जर्मनी के लिए एशिया का अर्थ भारत ही है. जर्मनी ने मुक्त व्यापार समझौते पर भारत का समर्थन भी किया है. यूरोप के चार देशों ने बिना किसी टैरिफ के भारत के साथ व्यापार करने पर सहमति जतायी है. अगले महीने से इन देशों के साथ बिना किसी आयात शुल्क के कारोबार शुरू हो जायेगा. भारत की इन गतिविधियों से ट्रंप को लगा होगा कि भारत झुकने वाला नहीं है.


इन सबने ट्रंप को सोचने पर मजबूर कर दिया. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया है. ट्रंप को समझना चाहिए कि भारत कोई मिठाई नहीं है. भारत एक स्वतंत्र और संप्रभु देश है और अमेरिका उसका साझेदार देश है. ऐसे में अमेरिका के साथ रिश्ते में भारत को भी बराबरी और सम्मान की अपेक्षा रहती है. भारत ने अमेरिका के साथ रिश्ते को सामान्य बनाये रखने की कोशिश की है. इसे जारी रखना चाहिए. इसके अलावा हमें दूसरे देशों के साथ हमारे संबंधों को बेहतर करने की नीति पर भी आगे बढ़ते रहना चाहिए.
(ये लेखक के निजी विचार हैं.)

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