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भारत-रूस रिश्ते

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भारत-रूस रिश्ते
भारत-रूस की मित्रता

India-Russia Relations: रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मांटुरोव के दो दिन के भारत दौरे में जिस तरह आपसी रिश्तों को मजबूत करने और दोतरफा व्यापार बढ़ाने की प्रतिबद्धता जतायी गयी, वह भारत-रूस संबंधों की उष्मा के बारे में ही बताती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाकात में मांटुरोव ने व्यापार और आर्थिक संबंधों, ऊर्जा और परिवहन संपर्क में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श किया, तो प्रधानमंत्री ने अपनी हाल की यात्राओं तथा मास्को और कजान में राष्ट्रपति पुतिन के साथ हुई बैठकों के दौरान लिये गये निर्णयों के क्रियान्वयन के प्रयासों का स्वागत किया.

दरअसल पिछले ही महीने प्रधानमंत्री ने रूस के कजान शहर में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया था. मांटुरोव ने मुंबई में रूसी-भारतीय व्यापार मंच के पूर्ण सत्र में भी हिस्सा लिया. मुंबई में हुए इस कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों देशों के उद्यमियों के बीच सहयोग और संबंध बढ़ाना था. व्यापार तथा आर्थिक, वैज्ञानिक, तकनीकी तथा सांस्कृतिक सहयोग के लिए गठित भारत-रूस अंतर सरकारी आयोग के 25वें सत्र में भी मांटुरोव ने हिस्सा लिया, जिसमें बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ठीक ही रेखांकित किया कि बहुध्रुवीय होती दुनिया में दोनों देशों की दोस्ती का विस्तार बेहद अहम है.

हालांकि आपसी व्यापार के मोर्चे पर दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन है, जो रूस के पक्ष में झुका हुआ है. इसके बावजूद विदेश मंत्री ने भरोसा दिलाया कि वर्ष 2030 से पहले रूस के साथ द्विपक्षीय व्यापार मौजूदा 66 अरब डॉलर से बढ़कर 100 अरब डॉलर हो जायेगा. भारत और रूस के 75 साल पुराने रिश्तों की बुनियाद ठोस है. पहले हम रूस से रक्षा, परमाणु सहयोग और अंतरिक्ष अन्वेषण में मदद लेते थे. शिक्षा, फिल्म और सांस्कृतिक आदान-प्रदान ने दोतरफा संबंधों को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभायी. लेकिन आपसी आदान-प्रदान में विविधता आयी है और आज भारत रूसी कच्चे तेल का दूसरा सबसे बड़ा आयातक है.

देश में कच्चे तेल की कुल खपत का 40 फीसदी रूस से आता है. रूस से आने वाले यूरोनियम, कच्चे तेल और कोयले की आपूर्ति भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. जबकि भारत रूस को फार्मास्युटिकल उत्पाद, कृषि उत्पाद, औद्योगिक उपकरणों आदि का निर्यात करता है. भारत और यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (इइयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत भी चल रही है. भारत-रूस के आपसी संबंध, जाहिर है, भविष्य के लिए भी उम्मीद जगाते हैं.

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