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‘प्रगति’ का मॉडल

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‘प्रगति’ का मॉडल
pragati

Pragati : ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने भारत के डिजिटल ‘प्रगति’ प्लेटफॉर्म की सराहना करते हुए इसे तस्वीर बदल देने वाला बताया है. ‘फ्रॉम ग्रिडलॉक टू ग्रोथ : हाउ लीडरशिप इनेबल्स इंडियाज प्रगति इको सिस्टम टू पावर प्रोग्रेस’ नाम से जारी इस अध्ययन रिपोर्ट में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने केस स्टडी के तौर पर उन 340 परियोजनाओं को शामिल किया है, जिनकी नियमित समीक्षा ‘प्रगति’ के जरिये की गयी. इनमें वे परियोजनाएं भी शामिल हैं, जो तीन से 20 वर्ष में पूरी होनी थी.

डिजिटल शासन किस प्रभावी तरीके से ढांचागत और सामाजिक विकास के क्षेत्र में काम कर सकता है, ‘प्रगति’ इसका अनुकरणीय उदाहरण है. ‘प्रगति’ यानी ‘प्रो एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इंप्लीमेंटेशन’ दरअसल एक बहुद्देश्यीय और बहु-मॉडल प्रोग्राम है, जिसे बुनियादी ढांचे और सामाजिक विकास के क्षेत्र में डिजिटल प्रगति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत लांच किया था. सरकार के मुताबिक, ‘प्रगति’ प्लेटफॉर्म प्रमुख हितधारकों के बीच वास्तविक समय की उपस्थिति और आदान-प्रदान के साथ ई-पारदर्शिता और ई-जवाबदेही लाने की एक मजबूत प्रणाली है.

‘प्रगति’ मंच न केवल केंद्र और राज्यों के विभिन्न हितधारकों को एक मंच पर लाने में सफल रहा है, बल्कि यह भूमि अधिग्रहण से लेकर अंतर-मंत्रालयी समन्वय तक बुनियादी ढांचे के विकास में कुछ सबसे जटिल चुनौतियों को हल करने में भी मददगार रहा है. इसके जरिये समय पर परियोजनाओं के कार्यान्वयन का आर्थिक प्रभाव तो स्पष्ट है ही, सड़क, रेलवे, पानी और बिजली जैसी आवश्यक सेवायें मुहैया कराने वाली परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाकर इसने असंख्य भारतीयों के जीवन की गुणवत्ता भी सुधारी है.

रिपोर्ट में ‘प्रगति’ को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए अनुकरणीय बताने के साथ-साथ यह भी कहा गया है कि शासन में बदलाव के लिए दुनिया को नरेंद्र मोदी की ‘प्रगति’ से सीखना चाहिए. रिपोर्ट का यह निष्कर्ष खासकर गर्व करने लायक है, जिसमें कहा गया है कि डिजिटल उपकरणों को अपनाने और सरकार के सभी स्तरों पर सहयोग को बढ़ावा देने के लिए भारत ने एक ऐसा रास्ता तैयार किया है, जिसका अनुकरण दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाएं कर सकती हैं.

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