[tdb_header_weather inline="yes" temp_color="#000000" loc_color="#000000" api="653566bd56b7ecfee45d74c0fc937fc1" float_right="yes" align_horiz="content-horiz-center" icon_size="24" icon_space="10" f_temp_font_family="420" f_temp_font_size="14" f_temp_font_weight="500" f_unit_font_size="14" f_loc_font_size="14" f_unit_font_family="882" location="Ranchi" icon_color="#000000"]
[tdb_header_categories align_horiz="content-horiz-left" el_align_horiz="content-horiz-left" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXJpZ2h0IjoiNSIsImhlaWdodCI6IjQwIiwiZGlzcGxheSI6IiJ9fQ==" icon_size="18" limit="18" elem_text_color="#2d2800" f_elem_font_family="420" f_elem_font_size="16px" f_elem_font_weight="500" tdicon="tdc-font-fa tdc-font-fa-navicon-reorder-bars" inline="yes" shadow_shadow_size="0" shadow_shadow_offset_vertical="0" shadow_shadow_spread="0" bg_color="#f9f9f9" include="1028, 1081, 1446, 1228, 3706, 2624,1071"][tdb_mobile_horiz_menu inline="yes" menu_id="372" tdc_css="eyJwaG9uZSI6eyJkaXNwbGF5IjoiIn0sInBob25lX21heF93aWR0aCI6NzY3LCJhbGwiOnsiYm9yZGVyLXN0eWxlIjoibm9uZSIsImRpc3BsYXkiOiIifX0=" f_elem_font_size="18px" f_elem_font_weight="eyJhbGwiOiI3MDAiLCJwaG9uZSI6IiJ9" f_elem_font_family="420" text_color_h="#f58220" main_sub_icon_size="13"]
Home Opinion समय की मांग है हाइब्रिड एआइ मॉडल

समय की मांग है हाइब्रिड एआइ मॉडल

0
समय की मांग है हाइब्रिड एआइ मॉडल
क्लॉड मिथोस 5

Hybrid AI model : बारह जून, 2026 को अमेरिकी एआइ कंपनी ‘एंथ्रोपिक’ ने दुनिया को बताया कि उसे अमेरिकी सरकार द्वारा कुछ ऐसा करने का आदेश दिया गया था, जो वह नहीं करना चाहती थी : हर विदेशी नागरिक को, जिसमें अमेरिका के भीतर काम कर रहे उसके अपने कर्मचारी भी शामिल हैं, उसके दो सबसे सक्षम एआइ मॉडल-‘क्लॉड फेबल 5’ और ‘क्लॉड मिथोस 5’- का उपयोग करने से रोक दिया जाये. ये मॉडल केवल कुछ ही दिन पहले जारी किये गये थे. इस निर्णय से अमेरिकी सीमा के बाहर की हर सरकार, कंपनी और नागरिक को चिंतित होना चाहिए. पहली बार, एक उन्नत एआइ मॉडल को, न कि केवल उस हार्डवेयर को ,जिस पर यह चलता है, एक रणनीतिक निर्यात के रूप में माना गया है, जिसका स्विच अकेले वाशिंगटन नियंत्रित करता है.


संवेदनशील तकनीक के निर्यात को प्रतिबंधित करने की अमेरिका की यह प्रवृत्ति नयी नहीं है. यह 1940 के दशक के युद्धकालीन निर्यात नियंत्रणों से लेकर, शीत युद्ध के दौर की ‘कोऑर्डिनेटिंग कमेटी फॉर मल्टीलेटरल एक्सपोर्ट कंट्रोल्स’, 1979 के ‘एक्सपोर्ट एडमिनिस्ट्रेशन एक्ट’ और 2018 के ‘एक्सपोर्ट कंट्रोल रिफॉर्म एक्ट’ तक जाती है, जिसने वाशिंगटन को उन उभरती और बुनियादी प्रौद्योगिकियों को प्रतिबंधित करने का स्थायी अधिकार दिया, जिन्हें वह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानता है. हालिया आदेश उसी तर्क को एक कदम और आगे बढ़ाता है. यह केवल किसी को एक शक्तिशाली चिप देने से मना करने के बारे में नहीं है. यह उन्हें एक प्रशिक्षित सिस्टम की क्षमता तक पहुंच से वंचित करने के बारे में है.

यह समझने के लिए कि एक एआइ मॉडल के साथ मिसाइल के पुर्जे जैसा व्यवहार क्यों किया जा सकता है, यह समझना होगा कि ‘फ्रंटियर’ मॉडल वास्तव में क्या होते हैं. ये उद्योग के सबसे बड़े और सबसे सक्षम सिस्टम होते हैं, जिन्हें विशाल डाटासेट, व्यापक कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापक मानवीय फीडबैक पर प्रशिक्षित किया जाता है. एक ऐसा मॉडल, जो वेब ब्राउज कर सकता है, कोड लिख व निष्पादित कर सकता है, और निरंतर मानवीय निर्देश के बिना कई सॉफ्टवेयर टूल्स पर काम कर सकता है. वह उस चैटबॉट से गुणात्मक रूप से भिन्न है जो केवल प्रश्नों के उत्तर देता है. यही क्षमता स्वभाव से दोहरे उपयोग वाली है.

यह दोहरा उपयोग चरित्र ही, किसी एक क्षमता से अधिक, सरकारों को फ्रंटियर मॉडलों को साधारण वाणिज्यिक सॉफ्टवेयर के बजाय रणनीतिक संपत्ति के रूप में मानने के लिए प्रेरित कर रहा है.
इस व्यवधान का असर भले ही अमेरिका के बाहर सबसे ज्यादा भारत में पड़ा, जो कथित तौर पर एंथ्रोपिक का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है. पर यह चिंता केवल भारत तक सीमित नहीं है. यूरोपीय आयोग ने एंथ्रोपिक निलंबन के कुछ ही दिनों के भीतर अपने स्वयं के ‘टेक्नोलॉजिकल सॉवरेंटी पैकेज’ का अनावरण किया, जिसमें एक ‘चिप्स एक्ट 2.0’ और एक ‘क्लाउड एंड एआइ डेवलपमेंट एक्ट’ शामिल है, जिसे स्पष्ट रूप से गैर-यूरोपीय संघ एआइ और क्लाउड प्रदाताओं पर यूरोपीय निर्भरता को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है.

‘संप्रभु एआइ’ इस समय का सबसे चर्चित मुहावरा है, पर इसका वास्तव में क्या अर्थ हो सकता है, यह स्पष्ट होना जरूरी है. एक वास्तव में आत्मनिर्भर एआइ स्टैक के लिए चिप डिजाइन और निर्माण, डाटा सेंटर, बड़े पैमाने पर विश्वसनीय बिजली और पानी, विशाल और उच्च गुणवत्ता वाले डाटासेट, गहन तकनीकी प्रतिभा, सुरक्षा और अलाइनमेंट विशेषज्ञता, तथा इन सबको वर्षों तक बनाये रखने के लिए पूंजी पर नियंत्रण की आवश्यकता होती है. आज किसी भी देश के पास यह पूरा स्टैक नहीं है. भारत सहित अधिकांश देशों के लिए पूर्ण एआइ आत्मनिर्भरता न तो व्यावहारिक है और न ही आर्थिक रूप से समझदारी भरा. जो यथार्थवादी है, और जो भारत के अपने प्रयासों में तेजी से झलकता है, वह एक हाइब्रिड (मिश्रित) मॉडल है : सबसे संवेदनशील और रणनीतिक उपयोगों के लिए घरेलू क्षमता, डाटा और प्रशासन पर स्थानीय नियंत्रण, और किसी एकल विदेशी आपूर्तिकर्ता पर निर्भर रहने के बजाय वैश्विक कंप्यूट और फ्रंटियर मॉडलों तक विविध पहुंच.


वैश्विक व्यवस्था के पतन का अध्ययन करने वाले अर्थशास्त्रियों और रणनीतिकारों ने लंबे समय से एक ऐसी दुनिया का वर्णन किया है, जिसके पास नेतृत्व की कमी है. हालिया घटनाएं बताती हैं कि एआइ उन सबसे स्पष्ट मंचों में से एक बनता जा रहा है जिस पर यह अव्यवस्था अब दिखाई दे रही है. भारत के लिए बुद्धिमानी इसी में होगी कि वह घबराहट और आत्मसंतुष्टि से बचे. पर प्रौद्योगिकी नीति में इस दशक का केंद्रीय प्रश्न हर ऐसी घटना के साथ स्पष्ट होता जा रहा है : केवल यह नहीं कि कौन-सा देश सबसे अच्छा एआइ बनाता है, बल्कि यह कि कौन इसकी पहुंच को नियंत्रित करता है, किन शर्तों के तहत, और किसके मूल्यों और हितों के अनुसार. भारत को ऐसा एआइ घर पर, धैर्यपूर्वक तैयार करना होगा-पूर्ण स्वतंत्रता की कल्पना के रूप में नहीं, बल्कि वैसी लचीली, विविध क्षमता के रूप में, जो सुनिश्चित करे कि कोई भी एक विदेशी निर्णय देश के डिजिटल भविष्य के एक महत्वपूर्ण हिस्से को बंद न कर सके. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel