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ओलिंपिक की मेजबानी

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ओलिंपिक की मेजबानी

भारत के खेल इतिहास में यह एक सुखद संक्रमण का दौर है. ऐसे दिन जब भारत के सबसे लोकप्रिय खेल क्रिकेट के विश्व कप में दो ऐतिहासिक प्रतिद्वंद्वियों भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला चल रहा था, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बहुत बड़ी घोषणा की. प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत वर्ष 2036 के ओलिंपिक खेलों के आयोजन के लिए दावेदारी पेश करेगा. भारत में ओलंपिक आयोजन की संभावना को लेकर चर्चा होती रही है, लेकिन इसे लेकर लोगों के मन में कई कारणों से संदेह भी रहता था. सबसे पहले तो यही लगता था कि ओलंपिक की मेजबानी अमीर मुल्क किया करते हैं और भारत के लिए यह ज्यादा ही बड़ा ख्वाब लगता है, मगर पिछले दिनों भारत ने जी-20 के शिखर सम्मेलन का सफल आयोजन कर अपनी क्षमता भी साबित की और दुनिया का भरोसा भी जीता.

ओलिंपिक आयोजन को लेकर एक संदेह इस बात से भी होता था कि क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों में भारत का अब तक का जैसा प्रदर्शन रहा है, उसे देखते हुए शायद भारत की दावेदारी को गंभीर नहीं समझा जायेगा, लेकिन 2021 के टोक्यो ओलंपिक के बाद पिछले महीने हांगझोउ एशियाई खेलों में भारत ने अपने प्रदर्शन से यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि उसने अन्य खेलों की दुनिया में भी पांव जमा लिये हैं और वह दिन दूर नहीं जब वह रफ्तार भी पकड़ लेगा. प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले सप्ताह एशियाई खेलों में हिस्सा लेनेवाले खिलाड़ियों का सम्मान करते हुए अगले पांच सालों में खेल को बढ़ावा देने के लिए 3,000 करोड़ रुपये खर्च किये जाने की घोषणा की थी.

भारत में खेलो इंडिया जैसे कार्यक्रम भी चल रहे हैं और उनके सुखद परिणाम भी नजर आने लगे हैं. जी-20 की ही भांति कोई भी बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन किसी भी देश के लिए बहुत बड़ा अवसर होता है. ऐसे आयोजनों से देश की छवि मजबूत होती है. यह आर्थिक उन्नति के मौके भी लाता है, क्योंकि इससे बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विकास होता है, जिससे निवेश आकर्षित होता है. हालांकि, ओलिंपिक आयोजन के खर्चों और खेलों के बाद आयोजन स्थलों के समुचित इस्तेमाल को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं, लेकिन खेल संस्कृति के विकास और खेलों की दुनिया में मजबूती से स्थापित होने के लिए भारत को सकारात्मक होकर ओलिंपिक आयोजन के लिए कदम बढ़ाना चाहिए.

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