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यूरोप से बढ़ते रिश्ते

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यूरोप से बढ़ते रिश्ते

भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार में बीते दशक में लगभग तीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है. भारत जहां यूरोपीय संघ का दसवां सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है, वहीं यूरोपीय संघ हमारे देश का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक सहभागी है. वाणिज्य और निवेश में असीम संभावनाओं को साकार करने के लिए दोनों ही पक्ष प्रयासरत हैं. इस दिशा में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं तकनीक काउंसिल की पहली बैठक एक महत्वपूर्ण मोड़ है.

बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स, जहां यूरोपीय संघ का मुख्यालय है, में यह बैठक मंगलवार को संपन्न हुई, जिसमें भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री एस जयशंकर, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल तथा सूचना-तकनीक मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने किया. इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि इस काउंसिल का गठन बीते अप्रैल में तब हुआ था, जब यूरोपीय कमीशन की प्रमुख उर्सूला लेयेन भारत दौरे पर आयी थीं. इसका प्रारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लेयेन ने संयुक्त रूप से किया था.

इस काउंसिल के अन्तर्गत तीन कार्यकारी समूह बनाये गये हैं. पहला समूह रणनीतिक तकनीक, डिजिटल शासन एवं डिजिटल कनेक्टिविटी से संबंधित है, जबकि दूसरा कार्यकारी समूह हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा से जुड़ा हुआ है. तीसरा समूह व्यापार, निवेश और ठोस वैल्यू चेन पर केंद्रित है. इससे स्पष्ट रूप से यह इंगित होता है कि काउंसिल का उद्देश्य भारत और यूरोपीय संघ के बीच सभी क्षेत्रों में सहकार को बढ़ावा देना है.

उल्लेखनीय है कि इस यात्रा के दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने स्वीडन में आयोजित यूरोपीय संघ हिंद-प्रशांत मंत्री स्तरीय फोरम की बैठक में भी हिस्सा लिया. दोनों पक्षों के बीच संबंध मजबूत करने की ये कवायदें ऐसे समय में हो रही हैं, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति अनेक संकटों का सामना कर रही है. रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भारत के तटस्थ रवैये को लेकर यूरोपीय संघ असहज रहा है, पर भारत ने पश्चिमी देशों को यह समझा दिया है कि उसके लिए राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है और भारत पर अंगुली उठाने से पहले यूरोपीय संघ को भी अपनी कूटनीतिक और व्यापारिक नीतियों की समीक्षा कर लेनी चाहिए.

भारत ने शांति प्रक्रिया में सक्रिय सहयोग का आश्वासन बार-बार दिया है. आज विश्व में राजनीतिक एवं कूटनीतिक स्तर पर भारत की स्थिति सम्मानजनक है. साथ ही, हम सबसे बड़ी पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हैं तथा हमारी आर्थिक वृद्धि की गति भी उत्साहजनक है. ऐसे में यूरोप समेत समूची दुनिया को भारत की जरूरत है.

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