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तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था

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तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था
तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ा. यह बड़ी बात इसलिए भी है, क्योंकि यह उपलब्धि ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू 50 प्रतिशत टैरिफ के पहले पूरे तीन महीनों के दौरान हासिल हुई है. आंकड़ों में वित्त वर्ष 2025-26 की समूची अवधि में देश की अर्थव्यवस्था के 7.6 फीसदी बढ़ने का अनुमान है जबकि पहले इसका अनुमान 7.1 प्रतिशत लगाया गया था. सांख्यिकी मंत्रालय ने इस बार जीडीपी की गणना के तरीके में कई बदलाव किये हैं.

गौरतलब है कि पिछले वर्ष आइएमएफ ने भारत के राष्ट्रीय लेखा डाटा को ‘सी’ श्रेणी में रखा था, जो पुराने आधार वर्ष को दर्शाता है. इसी को देखते हुए बेस ईयर में बदलाव किया गया है. यानी 2011-12 को आधार वर्ष मानने वाली पुरानी शृंखला की जगह अब 2022-23 को नया आधार वर्ष बनाया गया है. बेस ईयर दरअसल वह अवधि होता है, जिसके दाम और उत्पादन स्तर को मानक मानकर आगे की वृद्धि दर की तुलना की जाती है. आधार वर्ष में बदलाव से आर्थिक गतिविधियों के आकलन का दायरा व्यापक होता है और इससे अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को बेहतर तरीके से दर्शाया जा सकता है.

बेस ईयर में बदलाव करने के अलावा पहली बार जीएसटी पोर्टल के वास्तविक डाटा का उपयोग कॉरपोरेट सेक्टर की ग्रोथ मापने के लिए किया गया है. इसके अतिरिक्त वाहनों के रजिस्ट्रेशन के लिए ई-वाहन डाटा का इस्तेमाल निजी खर्च को समझने के लिए किया जा रहा है. उतना ही महत्वपूर्ण यह है कि जीडीपी के नये आकलन में अनौपचारिक क्षेत्र और गिग इकोनॉमी से जुड़े घरेलू नियोक्ताओं के योगदान को भी शामिल किया गया है, जिससे अर्थव्यवस्था का दायरा बढ़ गया है. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाते हुए डबल डिफ्लेशन को लागू किया गया है.

यानी अब इनपुट (कच्चा माल) और आउटपुट (तैयार माल) की कीमतों को अलग-अलग एडजस्ट किया जायेगा. इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के असली वैल्यू एडिशन का पता चल सकेगा. हालांकि जीडीपी और सकल लाभ वृद्धि अनुमानों में अंतर के मामले में यह पुरानी शृंखला के अनुरूप ही है. लेकिन नयी शृंखला के तहत जारी किये गये जीडीपी आंकड़ों से व्यापक स्तर पर विकास की झलक मिलती है और विभिन्न क्षेत्रों में वास्तविक आर्थिक गतिविधियों का सटीक आकलन संभव हो पाया है.

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