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वृद्धि दर का बढ़ा अनुमान

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वृद्धि दर का बढ़ा अनुमान
वृद्धि दर का बढ़ा अनुमान

Economic Growth: सप्ताह की शुरुआत में ही दो अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों ने इस साल भारत की आर्थिक विकास दर में वृद्धि का जो अनुमान जारी किया है, वह हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूती के बारे में ही बताता है. इससे पहले एनएसओ, यानी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने इस साल आर्थिक विकास दर के 7.4 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. आइएमएफ (अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष) ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत की वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ा कर 7.3 प्रतिशत कर दिया है. इससे पहले अक्तूबर में उसने वृद्धि दर के 6.6 फीसदी रहने का अनुमान जताया था. मूडीज का भी आकलन है कि इस साल भारत की जीडीपी ग्रोथ 7.3 फीसदी रहेगी.

भारतीय अर्थव्यवस्था ने तीसरी तिमाही में चूंकि उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया, इसी को देखते हुए आइएमएफ को अपना अनुमान बढ़ाना पड़ा. हाल ही में आइएमएफ ने कहा था कि भारत दुनिया के विकास का मुख्य इंजन है और इसकी घरेलू खपत देश की अर्थव्यवस्था की ढाल बन रही है. ‘वर्ष 2025 में भारत की विकास गाथा’ के बारे में आइएमएफ के आकलन पर इसके संचार विभाग की निदेशक ने कहा, ‘हमने देखा है कि भारत दुनिया के लिए विकास का एक मुख्य इंजन है.’

गौरतलब है कि आइएमएफ द्वारा अनुमान बढ़ाने से पहले विश्व बैंक ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.2 प्रतिशत कर दिया था, जो विगत जून के उसके अनुमान से 0.9 प्रतिशत अधिक है. तब उसने भारत की विकास दर के 6.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था. विश्व बैंक ने देश में मजबूत घरेलू मांग और लागू किये गये कर सुधारों के असर को ध्यान में रखते हुए वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाया है. विश्व बैंक की ‘ग्लोबल इकोनोमिक प्रॉस्पेक्ट्स’ रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रोथ की रफ्तार कम होने के बावजूद भारत सबसे तेजी से विकसित होने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा.

मजबूत घरेलू मांग और सरकारी निवेश के कारण यह सब संभव हो रहा है, और इससे अमेरिकी टैरिफ का असर भी कम हो रहा है. रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, नौ जनवरी को खत्म हुए सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 687.19 अरब डॉलर पर पहुंच गया. देश के स्वर्ण भंडार में भी वृद्धि हुई है. विश्व बैंक, आइएमएफ और मूडीज के आकलन यह दिखाते हैं कि वैश्विक दबावों के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है और इसके पीछे घरेलू मांग, उपभोक्ता खर्च, टैक्स सुधार और निवेश जैसे कारण हैं.

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