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गतिशील अर्थव्यवस्था

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गतिशील अर्थव्यवस्था

वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता तथा आपूर्ति शृंखला में अवरोधों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर सर्वाधिक है. निवेश, वाणिज्य एवं वित्तीय प्रवाह को देखते हुए ऐसा लगता है कि भविष्य में भी वृद्धि दर कमोबेश वर्तमान स्तर पर बनी रहेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संभावना के आधार पर आशा जतायी है कि भारत जल्दी ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जायेगा. आर्थिक उपलब्धियों में तकनीक के बढ़ते उपयोग का महत्वपूर्ण योगदान है. आज डिजिटल भुगतान और लेन-देन सामान्य व्यवहार बन चुका है. प्रधानमंत्री मोदी ने रेखांकित किया है कि एक ऐसा समय था, जब कुछ राजनेताओं का मानना था कि भारत में लेन-देन में डिजिटल व्यवस्था कारगर नहीं हो सकती है.

आधुनिक तकनीक के बारे में ऐसी आधारहीन धारणाएं गलत साबित हो चुकी हैं. तकनीक ने पारदर्शिता के साथ-साथ भुगतान प्रक्रिया को बहुत सरल भी बना दिया है. यूपीआई और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने अर्थव्यवस्था को समावेशी भी बनाया है. इससे आर्थिक गति बढ़ाने में स्वाभाविक रूप से बड़ी मदद मिल रही है. यही बात स्टार्टअप के साथ लागू होती है. अर्थव्यवस्था बढ़ने का सीधा अर्थ है औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार. इसका नतीजा यह होता है कि रोजगार के नये-नये मौके बनते हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में आये अध्ययनों के आधार पर कहा है कि पिछले तीन-चार वर्षों में आठ करोड़ रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं.

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले रिजर्व बैंक के प्रकाशित डेटाबेस में जानकारी दी गयी है कि देश में रोजगार वृद्धि की दर वित्त वर्ष 2023-24 में छह प्रतिशत हो गयी, जो 2022-23 में 3.2 प्रतिशत थी. इस डेटाबेस में यह भी बताया गया है कि वित्त वर्ष 2020-21 से 7.8 करोड़ रोजगार सृजित हुए हैं. शिक्षण, प्रशिक्षण और कौशल विकास के साथ-साथ रोजगार की स्थिति के बेहतर होते जाने की उम्मीद है. प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी आश्वासन दिया है कि अपने तीसरे कार्यकाल में केंद्र सरकार तिगुनी गति से काम करेगी.

इससे यह संकेत मिलता है कि विभिन्न क्षेत्रों में सुधारों की प्रक्रिया जारी रहेगी. सरकार उत्पादन से संबंधित प्रोत्साहन योजना के तहत गुणवत्तापूर्ण वस्तुओं के उत्पादन को बढ़ावा दे रही है, जिससे निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है. साथ ही, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के नियमों में बदलाव कर नये क्षेत्रों को शामिल किया गया है. विदेशी कंपनियों को साझा उत्पादन के लिए आमंत्रित किया जा रहा है. इन प्रयासों से देश ने रक्षा उत्पादन में बड़ी छलांग लगायी है. जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोकने एवं प्रदूषण में कमी लाने के लिए स्वच्छ ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.

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