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डिजिटल अरेस्ट का खतरा

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डिजिटल अरेस्ट का खतरा
Cyber Crime

Digital Arrest : भारत समेत दुनिया के अनेक देशों में विभिन्न प्रकार के साइबर अपराधों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. इन अपराधों में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का फर्जीवाड़ा भी शामिल है. बीते दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी इसका उल्लेख करते हुए लोगों से सचेत रहने का आग्रह किया था. ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धोखाधड़ी में लोग अब तक 120 करोड़ रुपये से अधिक गंवा चुके हैं. अन्य साइबर अपराधों से हुए नुकसान को जोड़ लें, तो लूटी गयी रकम लगभग 18 सौ करोड़ रुपये हो जाती है.

साइबर अपराधों के कहर का अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि इस वर्ष जनवरी से अप्रैल के बीच ही लगभग 7.4 लाख शिकायतें दर्ज हो चुकी थीं. पिछले साल यह आंकड़ा 15.56 लाख रहा था. साल 2021 और 2022 में शिकायतों की संख्या क्रमश: 4.52 और 9.66 लाख रही थी. इन फर्जीवाड़ों में देश में सक्रिय अपराधी तो शामिल हैं ही, विदेशी गिरोह भी भारतीयों को झांसा दे रहे हैं. ‘डिजिटल अरेस्ट’ समेत अन्य अपराधों में 46 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जिसे म्यांमार, लाओस और कंबोडिया में बैठे अपराधी अंजाम दे रहे हैं.

‘डिजिटल अरेस्ट’ की धोखाधड़ी करने वाले अपने शिकार को फोन कर कहते हैं कि उस व्यक्ति ने कोई प्रतिबंधित चीज, नशीला पदार्थ या नकली पासपोर्ट आदि का पार्सल भेजा है. यह सुनकर वह व्यक्ति स्वाभाविक रूप से घबरा जाता है. अपराधी अपने को पुलिस या किसी दूसरी सरकारी एजेंसी से जुड़ा हुआ बताते हैं तथा मामले को रफा-दफा करने के लिए भारी रकम मांगते हैं. भुगतान होने तक पीड़ित व्यक्ति को फोन या वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर किया जाता है. कुछ मामलों में ये अपराधी पीड़ितों के परिजन या मित्रों को भी बताते हैं कि अमुक व्यक्ति किसी अपराध में लिप्त है.

इसी तरीके से साइबर बुलिंग या ब्लैकमेलिंग को भी अंजाम दिया जाता है. पुलिस, बैंक, सरकारी विभाग आदि की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि लोगों को ऐसे कॉल या मैसेज की शिकायत दर्ज करानी चाहिए और अपराधियों के झांसे में नहीं आना चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी ने सलाह दी है कि ऐसे संदेहास्पद कॉल आने पर ‘रुको, सोचो और एक्शन लो’ के मंत्र को अपना चाहिए. अनजान व्यक्ति को अपने बारे में जानकारी देने से परहेज करना चाहिए और ऐसे कॉल को रिकॉर्ड करना चाहिए. शिकायतों को स्थानीय स्तर पर पुलिस के साइबर सेल में दर्ज कराया जा सकता है. राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल कर या संबंधित सरकारी पोर्टल पर भी शिकायत करनी चाहिए. परिजनों को भी तुरंत इस बारे में बताना चाहिए. जैसा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है, ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई व्यवस्था कानून में नहीं है.

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