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ब्रिक्स में आतंकवाद की निंदा

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ब्रिक्स में आतंकवाद की निंदा
ब्रिक्स सम्मेलन

BRICS : ब्राजील में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहलगाम में हुए आतंकी हमले की सभी सदस्य देशों ने सख्त निंदा तो की ही, सबने आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने का संकल्प भी दोहराया. भारत ने ब्रिक्स घोषणापत्र पर दस्तखत किये, जिसमें पहलगाम हमले और सीमापार आतंकवाद की निंदा की गयी है, हालांकि इसमें आतंकवाद के प्रायोजक के तौर पर पाकिस्तान की सीधे-सीधे आलोचना करने से बचा गया है. ब्रिक्स की तरह क्वाड के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में भी पहलगाम हमले की निंदा करते हुए पाकिस्तान का जिक्र करने से बचा गया था. जबकि एससीओ की बैठक में बलूचिस्तान में हुए हमले का तो जिक्र था, लेकिन पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र नहीं था. इस कारण भारत ने उसके घोषणापत्र पर दस्तखत करने से इनकार कर दिया था.

ब्रिक्स के गठन के बाद पहली बार इसके शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की गैरमौजूदगी रेखांकित करने वाली थी, तो यूक्रेन पर हमले के बाद रूसी राष्ट्रपति पुतिन भी विदेशी दौरा करने से यथासंभव बचते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के मंच से बिना नाम लिये पाकिस्तान और चीन पर हमला बोलते हुए कहा कि आतंक को शह और समर्थन देने वालों को सजा मिलनी चाहिए. उनका कहना था कि आतंकवाद के पीड़ितों और समर्थकों को एक ही तराजू में नहीं तौलना चाहिए. आतंकवाद को इंसानियत का दुश्मन बताते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद की निंदा करना हमारा सिद्धांत होना चाहिए, केवल सुविधा नहीं.

उन्होंने पहलगाम हमले को जहां पूरी मानवता पर हमला बताया, वहीं उन देशों का शुक्रिया भी अदा किया, जिन्होंने मुश्किल समय में भारत का साथ दिया. प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलता रहेगा. उन्होंने पश्चिम एशिया से लेकर यूरोप तक दुनिया में चल रहे विवादों और तनावों पर चिंता जतायी तथा गाजा की स्थिति पर चिंता जताते हुए शांति के रास्ते पर चलने की बात कही. उनका कहना था कि दुनिया में शांति और सुरक्षा बहुत जरूरी है. माहौल शांत, सुरक्षित होगा, तभी लोग तरक्की कर पायेंगे और ब्रिक्स इस लक्ष्य को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. उन्होंने अगले साल भारत में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए जहां सभी देशों को आमंत्रित किया, वहीं यह भी कहा कि भारत हर उस प्रयास का समर्थन करता है, जो दुनिया को विभाजन और संघर्ष से निकाल कर संवाद, सहयोग और समन्वय की ओर ले जाये.

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