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जलवायु परिवर्तन की कीमत

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जलवायु परिवर्तन की कीमत
जलवायु परिवर्तन का असर

Climate change : क्रिश्चियन एड की एक ताजा रिपोर्ट बता रही है कि इस साल जलवायु परिवर्तन की 10 सबसे बड़ी घटनाओं के कारण दुनिया भर में 2,000 से अधिक लोगों की जान गयी और 228 अरब डॉलर से अधिक का नुकसान हुआ. ‘काउंटिंग द कॉस्ट 2024 : अ ईयर ऑफ क्लाइमेट ब्रेकडाउन’ शीर्षक से जारी इस रिपोर्ट में उत्तरी अमेरिका की चार, यूरोप की तीन तथा चीन, ब्राजील और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों की घटनाओं को शामिल किया गया है.

इनमें अमेरिका में आये तूफान मिल्टन, अमेरिका, क्यूबा और मेक्सिको में आये तूफान हेलेन, दक्षिण पूर्व एशिया में तबाही मचाने वाले तूफान यागी आदि का जिक्र है. सिर्फ यही नहीं कि इस साल जलवायु परिवर्तन के कारण हुई आर्थिक नुकसान का आधा अमेरिका को भुगतना पड़ा है, बल्कि जलवायु परिवर्तन को महत्वहीन मुद्दा समझने वाले डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति चुने जाने से वहां इस संदर्भ में आशंकाएं और गहरा रही हैं.

हालांकि यह देखने लायक है कि इस रिपोर्ट में केरल के वायनाड में इस साल जुलाई में हुए भीषण भूस्खलन को शामिल नहीं किया गया, जिसमें 200 से अधिक लोग मारे गये थे. इसे रिपोर्ट में शामिल न करने का औचित्य समझ में नहीं आता, लेकिन यह तो स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन के कारण दुनिया भर में जन-धन का भारी नुकसान हो रहा है. जलवायु परिवर्तन से जुड़े इन हादसों की सबसे ज्यादा मार गरीब देशों पर पड़ी, जहां अनेक लोगों के पास बीमा नहीं है. चूंकि नुकसान से संबंधित ये अनुमान मुख्य रूप से बीमा पर आधारित नुकसान से संबंधित हैं, जिसका मतलब यह है कि वास्तविक धन हानि और अधिक होने के आसार हैं.

यही नहीं, इन गरीब देशों में आंकड़ों की उपलब्धता भी सही नहीं है. रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यदि दुनिया भर में जीवाश्म ईंधन से दूर न हटा गया, तो इस तरह की आपदाएं आने वाले दिनों में और भी विनाशकारी स्वरूप ले सकती हैं. इसका सर्वाधिक नुकसान दुनिया के उन देशों को होने वाला है, जो संसाधनों के मामले में संपन्न नहीं हैं. जाहिर है कि यह रिपोर्ट नये साल में दुनिया भर की सरकारों के लिए सबक होनी चाहिए कि वे जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कदम उठाएं. लेकिन हकीकत यह भी यह है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहे नुकसान के बारे में कई वर्षों से आगाह किया जा रहा है. ऐसे में, कितनी उम्मीद करें कि यह रिपोर्ट पूरे विश्व और खासकर विकसित देशों को सचेत करेगी?

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